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डीजल-पेट्रोल कीमतों और किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ KMSC का बड़ा ऐलान, पंजाबभर में फूंके जाएंगे पुतले
भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते, भूमि अधिग्रहण, खाद संकट और पटियाला लाठीचार्ज के विरोध में किसानों का राज्यव्यापी प्रदर्शन
किसान मजदूर संघर्ष कमेटी (KMSC) ने डीजल-पेट्रोल कीमतों में वृद्धि, प्रस्तावित भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौतों, भूमि अधिग्रहण नीतियों और अन्य मुद्दों के खिलाफ पंजाबभर में पुतला फूंक प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। संगठन ने सरकार की नीतियों को किसान और मजदूर विरोधी बताया।
पंजाब में किसान संगठन का विरोध प्रदर्शन, कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी
किसान मजदूर संघर्ष कमेटी (KMSC) ने डीजल और पेट्रोल की बढ़ी कीमतों, प्रस्तावित भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौतों, भूमि अधिग्रहण नीतियों, खाद की कमी और पटियाला में बिजली कर्मचारियों पर कथित लाठीचार्ज के विरोध में राज्यव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है।
संगठन ने घोषणा की है कि इन मुद्दों के विरोध में पूरे पंजाब में पुतला फूंक प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। किसान नेताओं का कहना है कि यह आंदोलन किसानों, मजदूरों और छोटे व्यापारियों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने के लिए किया जा रहा है।
खियाला गांव में आयोजित हुआ प्रतिनिधि सम्मेलन
अमृतसर के निकट खियाला गांव में आयोजित जोनल प्रतिनिधि सम्मेलन में संगठन के कई वरिष्ठ नेताओं और प्रतिनिधियों ने भाग लिया।सम्मेलन में सरवन सिंह पंधेर, जिला अध्यक्ष रणजीत सिंह कालेर बाला और जिला नेता सैक्टरी सिंह कोटला सहित अन्य प्रतिनिधि मौजूद रहे।
13 सदस्यीय जोनल कोर कमेटी का गठन
बैठक के दौरान प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से 13 सदस्यीय जोनल कोर कमेटी का गठन किया।
इसमें नरेंद्र सिंह भिट्टेविध को अध्यक्ष और कुलजीत सिंह को सचिव चुना गया।
भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते पर जताई चिंता
सम्मेलन को संबोधित करते हुए सरवन सिंह पंधेर ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की कुछ नीतियां किसानों, खेत मजदूरों और छोटे व्यापारियों के हितों के खिलाफ हैं।
उन्होंने प्रस्तावित भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौतों को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे देश की कृषि अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर का दावा
किसान नेताओं का कहना है कि ऐसे समझौते ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक चुनौतियों को और बढ़ा सकते हैं तथा किसानों की आय और कृषि क्षेत्र पर दबाव डाल सकते हैं।
बिजली संशोधन विधेयक और मनरेगा पर भी उठाए सवाल
किसान संगठन ने बिजली संशोधन विधेयक 2025, बीज कानूनों, श्रम संहिताओं और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) से संबंधित नीतिगत बदलावों पर भी चिंता जताई।
रोजगार और किसान हितों पर प्रभाव की आशंका
नेताओं का कहना है कि इन नीतिगत परिवर्तनों का असर रोजगार के अवसरों और ग्रामीण विकास योजनाओं पर पड़ सकता है, इसलिए इन मुद्दों पर व्यापक चर्चा और पुनर्विचार की आवश्यकता है।
डीजल-पेट्रोल मूल्य वृद्धि और खाद संकट भी प्रमुख मुद्दे
KMSC ने ईंधन कीमतों में हालिया बढ़ोतरी और किसानों को खाद उपलब्ध कराने में आ रही समस्याओं को भी प्रमुख मुद्दा बताया।
संगठन का कहना है कि बढ़ती लागत के कारण खेती करना पहले से अधिक महंगा हो गया है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है।
Key Highlights:
- KMSC ने पंजाबभर में पुतला फूंक प्रदर्शन का ऐलान किया।
- डीजल-पेट्रोल कीमतों में वृद्धि के खिलाफ विरोध।
- भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौतों पर जताई चिंता।
- भूमि अधिग्रहण नीतियों और खाद संकट को बनाया मुद्दा।
- पटियाला में बिजली कर्मचारियों पर कथित लाठीचार्ज का विरोध।
- 13 सदस्यीय जोनल कोर कमेटी का गठन किया गया।
- बिजली संशोधन विधेयक 2025 और मनरेगा से जुड़े मुद्दे भी उठाए गए।
FAQ Section:
Q1. KMSC ने प्रदर्शन क्यों घोषित किया है?
डीजल-पेट्रोल कीमतों में वृद्धि, मुक्त व्यापार समझौतों, भूमि अधिग्रहण नीतियों और अन्य मुद्दों के विरोध में प्रदर्शन की घोषणा की गई है।
Q2. प्रदर्शन का स्वरूप क्या होगा?
संगठन के अनुसार पंजाबभर में पुतला फूंककर विरोध दर्ज कराया जाएगा।
Q3. सम्मेलन कहां आयोजित किया गया?
अमृतसर के निकट खियाला गांव में जोनल प्रतिनिधि सम्मेलन आयोजित किया गया।
Q4. सम्मेलन में कौन-कौन से प्रमुख नेता शामिल हुए?
सरवन सिंह पंधेर, रणजीत सिंह कालेर बाला और सैक्टरी सिंह कोटला सहित कई नेता उपस्थित रहे।
Q5. किसान संगठन ने किन अन्य मुद्दों को उठाया?
बिजली संशोधन विधेयक 2025, बीज कानून, श्रम संहिताएं और मनरेगा से जुड़े मुद्दों पर भी चिंता व्यक्त की गई।
Conclusion:
किसान मजदूर संघर्ष कमेटी द्वारा घोषित राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन से पंजाब में किसानों और मजदूरों से जुड़े मुद्दे एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। संगठन का कहना है कि वह कृषि, रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों को लेकर अपनी आवाज बुलंद करता रहेगा। आने वाले दिनों में इन मुद्दों पर सरकार और किसान संगठनों के बीच संवाद महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

