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रायपुर कलां गौशाला मामले में मजिस्ट्रेट जांच पूरी, कुप्रबंधन की पुष्टि
इंसीनेरेटर की खराबी से शवों का ढेर; साजिश से किया इनकार
रायपुर कलां स्थित गौशाला के इंसीनेरेशन प्लांट परिसर में 50 से अधिक गायों के शव मिलने के मामले में मजिस्ट्रेट जांच रिपोर्ट ने विभिन्न स्तरों पर लापरवाही पाई है। हालांकि, रिपोर्ट में किसी साजिश या आपराधिक पहलू से इनकार किया गया है।
रायपुर कलां स्थित गौशाला के इंसीनेरेशन प्लांट परिसर में 50 से अधिक गायों के शव मिलने की घटना के एक माह से अधिक समय बाद की गई मजिस्ट्रेट जांच में गौशाला और इंसीनेरेटर के प्रबंधन में विभिन्न स्तरों पर “चूक” पाई गई है। हालांकि जांच में किसी भी प्रकार की साजिश या आपराधिक कृत्य से इनकार किया गया है।
सूत्रों के अनुसार, अतिरिक्त उपायुक्त-सह-अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (एडीएम) Amandeep Singh Bhatti ने विस्तृत जांच रिपोर्ट यूटी के मुख्य सचिव H Rajesh Prasad को सौंप दी है।
प्रशासन ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए मवेशियों की मौत के कारणों का पता लगाने के लिए मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए थे। एडीएम की सहायता के लिए पशुपालन विभाग के निदेशक, उपमंडल मजिस्ट्रेट (पूर्व) और क्षेत्र के उपमंडल पुलिस अधिकारी को भी निर्देशित किया गया था।
सूत्रों ने बताया कि एडीएम ने गौशाला और इंसीनेरेशन प्लांट के कर्मचारियों के बयान दर्ज किए तथा रिकॉर्ड का निरीक्षण किया। जांच के दौरान गौशाला और इंसीनेरेशन प्लांट के संचालन में कई विसंगतियां सामने आईं।
रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया कि इंसीनेरेटर के संचालन में बार-बार आने वाली तकनीकी खराबी के कारण शवों का ढेर लग गया। नगर निगम की शव निस्तारण इकाई लंबे समय से बंद थी, जिसके कारण मृत गायों का समय पर निपटान नहीं हो सका।
रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि पशुपालन विभाग के डॉक्टरों की एक समर्पित टीम नियुक्त की जाए, जो नियमित रूप से गौशालाओं का दौरा कर पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण करे। इससे समय पर उपचार और मवेशियों के समग्र कल्याण को सुनिश्चित किया जा सकेगा।
मुख्य सचिव एच. राजेश प्रसाद ने संपर्क करने पर बताया कि प्रशासन को विस्तृत रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है और उसका परीक्षण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।
