जन्नत-ए-जरखड़ संग्रहालय में धूमधाम से मनाया गया तीज उत्सव, लोकगीतों और गिद्धा ने बांधा समां

सावन शुरू होने से पहले पंजाबी संस्कृति की झलक, बच्चों और महिलाओं ने लोक प्रस्तुतियों से किया मंत्रमुग्ध

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शहर स्थित जन्नत-ए-जरखड़ संग्रहालय में सावन से पहले ही तीज उत्सव पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया। भांगड़ा, गिद्धा, लोकगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने पंजाबी विरासत की समृद्ध परंपराओं को जीवंत कर दिया।

जन्नत-ए-जरखड़ संग्रहालय में सजी तीज की रंगारंग महफिल

शहर के जन्नत-ए-जरखड़ संग्रहालय में सावन माह शुरू होने से पहले ही तीज उत्सव का भव्य आयोजन किया गया। पंजाब की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को समर्पित इस आयोजन में लोक कला, संगीत और पारंपरिक नृत्यों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों का दिल जीत लिया।

संग्रहालय परिसर पूरे दिन रंग-बिरंगी सांस्कृतिक गतिविधियों और पारंपरिक माहौल से गुलजार रहा।

बच्चों ने पेश की शानदार पंजाबी लोक प्रस्तुतियां

ड्रैगन भांगड़ा अकादमी के बच्चों ने प्रशिक्षक दिलबाग सिंह के मार्गदर्शन में पंजाबी संस्कृति पर आधारित आकर्षक प्रस्तुतियां दीं।

बच्चों ने लोकगीत, गिद्धा, भांगड़ा और कोरियोग्राफ किए गए पारंपरिक लोक नृत्यों के माध्यम से पंजाब की सांस्कृतिक विरासत को मंच पर जीवंत कर दिया। उनकी प्रस्तुतियों को दर्शकों ने खूब सराहा।

महिलाओं ने गिद्धा डालकर बढ़ाया उत्सव का उत्साह

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं ने भी पारंपरिक गिद्धा में भाग लिया, जिससे पूरे आयोजन का उत्साह और बढ़ गया।

आयोजकों की ओर से उपस्थित लोगों के लिए लंगर की भी व्यवस्था की गई।

तीज पर्व का सांस्कृतिक महत्व बताया गया

समारोह को संबोधित करते हुए 1982 एशियाई खेलों की हॉकी स्वर्ण पदक विजेता एवं सेवानिवृत्त प्राचार्य शरणजीत कौर ने तीज पर्व के सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व पर प्रकाश डाला।

उन्होंने बताया कि तीज का पर्व परंपरागत रूप से सावन महीने की तृतीया से पूर्णिमा तक मनाया जाता है।

सावन की परंपराओं को किया गया याद

शरणजीत कौर ने बताया कि परंपरा के अनुसार विवाहित महिलाएं इस दौरान अपने मायके जाती थीं, जहां वे पीपल के पेड़ों पर झूले झूलतीं, लोकगीत गातीं, गिद्धा करतीं और मेहंदी रचाती थीं।

उन्होंने कहा कि इस अवसर पर खीर, पूरी और गुलगुले जैसे पारंपरिक व्यंजन भी बनाए जाते थे, जो तीज उत्सव की विशेष पहचान रहे हैं।


Key Highlights

  • जन्नत-ए-जरखड़ संग्रहालय में पारंपरिक तीज उत्सव आयोजित।
  • ड्रैगन भांगड़ा अकादमी के बच्चों ने लोकगीत, भांगड़ा और गिद्धा प्रस्तुत किया।
  • बड़ी संख्या में महिलाओं ने गिद्धा में भाग लिया।
  • कार्यक्रम में लंगर का भी आयोजन किया गया।
  • शरणजीत कौर ने तीज पर्व की सांस्कृतिक परंपराओं की जानकारी दी।

FAQ Section

Q1. तीज उत्सव कहां आयोजित किया गया?
Answer: शहर के जन्नत-ए-जरखड़ संग्रहालय में तीज उत्सव आयोजित किया गया।

Q2. कार्यक्रम में किन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आयोजन हुआ?
Answer: लोकगीत, गिद्धा, भांगड़ा और अन्य पारंपरिक पंजाबी लोक नृत्यों की प्रस्तुतियां दी गईं।

Q3. तीज पर्व का पारंपरिक महत्व क्या है?
Answer: तीज सावन माह का प्रमुख पारंपरिक पर्व है, जिसमें महिलाएं झूले झूलती हैं, मेहंदी लगाती हैं, लोकगीत गाती हैं और पारंपरिक व्यंजन बनाती हैं।


Conclusion

जन्नत-ए-जरखड़ संग्रहालय में आयोजित तीज उत्सव ने पंजाब की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और लोक परंपराओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। लोक नृत्य, संगीत और पारंपरिक रीति-रिवाजों ने नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का संदेश दिया।Screenshot_3220

Edited By: Karan Singh

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