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जनगणना 2027 में 'रविदासिया धर्म' के लिए अलग कॉलम की मांग तेज, फगवाड़ा सम्मेलन में उठी आवाज
अखिल भारतीय रविदासिया धर्म संगठन के सम्मेलन में संतों और समाज के प्रतिनिधियों ने अलग धार्मिक पहचान की मांग दोहराई
कपूरथला जिले के फगवाड़ा में आयोजित रविदासिया समुदाय के एक बड़े सम्मेलन में जनगणना 2027 में 'रविदासिया धर्म' को अलग धार्मिक श्रेणी के रूप में शामिल करने की मांग उठाई गई। सम्मेलन में संतों, धार्मिक नेताओं और विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने समुदाय की अलग धार्मिक पहचान को आधिकारिक मान्यता देने की अपील की।
फगवाड़ा में रविदासिया समुदाय का विशाल सम्मेलन
कपूरथला जिले के फगवाड़ा स्थित दाना मंडी में अखिल भारतीय रविदासिया धर्म संगठन के बैनर तले रविदासिया समुदाय का एक विशाल सम्मेलन आयोजित किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व संगठन के संयोजक सतीश सुमन ने किया।
सम्मेलन में पंजाब सहित विभिन्न राज्यों से संत, धार्मिक नेता, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
जनगणना 2027 में अलग धार्मिक श्रेणी की मांग
सम्मेलन का मुख्य मुद्दा जनगणना 2027 में 'रविदासिया धर्म' के लिए अलग धार्मिक कॉलम शामिल करने की मांग रहा।वक्ताओं ने कहा कि समुदाय लंबे समय से अपनी अलग धार्मिक पहचान को आधिकारिक मान्यता दिलाने की मांग करता आ रहा है। उनका कहना था कि अलग कॉलम मिलने से समुदाय की विशिष्ट धार्मिक पहचान को मान्यता मिलेगी और उसके संवैधानिक अधिकारों को मजबूती मिलेगी।
संत निरंजन दास रहे मुख्य अतिथि
कार्यक्रम में डेरा सचखंड बल्लां, जालंधर के प्रमुख संत निरंजन दास मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनके साथ रविदासिया समुदाय के कई अन्य प्रमुख संत भी मंच पर मौजूद रहे।
सभा को संबोधित करते हुए संतों और समुदाय के प्रतिनिधियों ने एक स्वर में कहा कि जनगणना में अलग धार्मिक श्रेणी शामिल करना उनकी लंबे समय से चली आ रही मांग है।
अलग धार्मिक पहचान का किया दावा
वक्ताओं का कहना था कि रविदासिया समुदाय की अपनी विशिष्ट धार्मिक पहचान, परंपराएं, पूजा स्थल, धार्मिक प्रतीक और आस्था से जुड़ी अलग मान्यताएं हैं। इसी आधार पर उन्होंने आधिकारिक रिकॉर्ड में अलग धार्मिक पहचान दर्ज करने की मांग की।
संवैधानिक अधिकारों का दिया हवाला
सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को अपनी धार्मिक आस्था को मानने, उसका पालन करने और प्रचार-प्रसार करने का अधिकार देता है।
उनका कहना था कि समुदाय के अनेक सदस्य वर्षों से विभिन्न सामाजिक और आधिकारिक दस्तावेजों में स्वयं को 'रविदासिया' के रूप में दर्ज कराते रहे हैं।
वक्ताओं ने तर्क दिया कि जनगणना 2027 में 'रविदासिया धर्म' के लिए अलग कॉलम उपलब्ध कराना संविधान में निहित समानता, धार्मिक स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक न्याय की भावना के अनुरूप होगा।
Key Highlights
- फगवाड़ा की दाना मंडी में रविदासिया समुदाय का बड़ा सम्मेलन आयोजित।
- जनगणना 2027 में 'रविदासिया धर्म' के लिए अलग कॉलम की मांग उठी।
- डेरा सचखंड बल्लां के संत निरंजन दास मुख्य अतिथि रहे।
- संतों और प्रतिनिधियों ने अलग धार्मिक पहचान को आधिकारिक मान्यता देने की अपील की।
- वक्ताओं ने संविधान में धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का हवाला दिया।
FAQ Section
Q1. सम्मेलन कहां आयोजित किया गया?
Answer: सम्मेलन कपूरथला जिले के फगवाड़ा स्थित दाना मंडी में आयोजित किया गया।
Q2. सम्मेलन की मुख्य मांग क्या थी?
Answer: जनगणना 2027 में 'रविदासिया धर्म' के लिए अलग धार्मिक कॉलम शामिल करने की मांग की गई।
Q3. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कौन थे?
Answer: डेरा सचखंड बल्लां, जालंधर के संत निरंजन दास मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
Conclusion
फगवाड़ा में आयोजित इस सम्मेलन में रविदासिया समुदाय के प्रतिनिधियों ने अपनी अलग धार्मिक पहचान को आधिकारिक मान्यता देने की मांग दोहराई। वक्ताओं का कहना था कि जनगणना 2027 में अलग धार्मिक श्रेणी शामिल करना संविधान में प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता और समानता के सिद्धांतों के अनुरूप होगा।

