खालसा कॉलेज में पेड़ों को मिली Digital पहचान, QR Code स्कैन करते ही मिलेगी पूरी जानकारी

Ranjit Avenue स्थित कॉलेज में Heritage Trees की हुई टैगिंग, पेड़ों की प्रजाति, उम्र और स्वास्थ्य की जानकारी होगी डिजिटल

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खालसा कॉलेज, Ranjit Avenue में पर्यावरण संरक्षण के साथ तकनीक का अनोखा इस्तेमाल किया गया है। कॉलेज परिसर के Heritage Trees को QR Code से टैग किया गया है, जिससे मोबाइल से स्कैन कर पेड़ की विस्तृत जानकारी हासिल की जा सकेगी।

 

अमृतसर के Ranjit Avenue स्थित Khalsa College में तकनीक और पर्यावरण संरक्षण को जोड़ते हुए एक नई पहल शुरू की गई है। कॉलेज परिसर में मौजूद Heritage Trees को QR Code आधारित डिजिटल पहचान दी जा रही है।

अब किसी पेड़ के बारे में विस्तृत जानकारी हासिल करने के लिए लोग केवल अपने मोबाइल फोन से उसके QR Code को स्कैन कर सकेंगे। इस पहल का उद्देश्य कॉलेज की हरित संपदा को डिजिटल रूप से दर्ज करने के साथ-साथ पुराने और महत्वपूर्ण पेड़ों के संरक्षण को मजबूत करना है।

Heritage Trees को मिली डिजिटल पहचान

Khalsa College Governing Council, Amritsar के Joint Secretary (Farms & Dairy) Rajbir Singh ने परिसर में QR Code वाले पहचान बोर्ड लगाए।

उन्होंने इस पहल को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उनके अनुसार, QR Code के जरिए प्रत्येक पेड़ की एक अलग डिजिटल पहचान तैयार की जा रही है।

पेड़ की उम्र और स्वास्थ्य की भी होगी जानकारी

डिजिटल रिकॉर्ड में पेड़ की प्रजाति, स्थान, अनुमानित उम्र और स्वास्थ्य की स्थिति जैसी जानकारी दर्ज की जा सकती है। इससे कॉलेज प्रशासन को परिसर के पेड़ों की वैज्ञानिक तरीके से निगरानी और देखभाल करने में मदद मिलेगी।

इसके जरिए पुराने, दुर्लभ या कमजोर पेड़ों की पहचान कर उन्हें विशेष संरक्षण देने की योजना भी बनाई जा सकती है।

विकास कार्यों के प्रभाव की भी होगी निगरानी

डिजिटल ट्री इन्वेंटरी केवल पेड़ों की जानकारी जुटाने तक सीमित नहीं रहेगी। इससे कॉलेज परिसर में हरित क्षेत्र पर विकास कार्यों के संभावित प्रभाव का आकलन करने में भी मदद मिल सकती है।

पेड़ों के रखरखाव का रिकॉर्ड रखने और समय के साथ उनकी स्थिति में होने वाले बदलावों को ट्रैक करने के लिए भी यह डिजिटल व्यवस्था उपयोगी हो सकती है।

Rajbir Singh पहले भी कर चुके हैं Green Initiatives

Rajbir Singh हॉर्टिकल्चर क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ हैं और Khalsa College संस्थानों में पहले भी कई पर्यावरण आधारित पहलों का नेतृत्व कर चुके हैं।

इनमें Organic Farms के प्रबंधन और Vermiculture जैसी पहलों को बढ़ावा देना शामिल है। QR Code आधारित Tree Identification को भी इसी व्यापक पर्यावरण संरक्षण प्रयास की कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।

GNDU ने 2024 में शुरू किया था QR Tree Coding

Rare और Old Trees पर भी दिया गया था जोर

पेड़ों को QR Code से जोड़ने की अवधारणा Guru Nanak Dev University (GNDU) द्वारा वर्ष 2024 में शुरू की गई थी। विश्वविद्यालय ने अपने परिसर में मौजूद दुर्लभ और पुराने पेड़ों की पहचान एवं संरक्षण के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल किया।

GNDU ने अपने लगभग 90 प्रतिशत पेड़-पौधों की संपदा को QR Code व्यवस्था से जोड़कर परिसर को एक तरह के Living Classroom में बदलने की दिशा में कदम उठाया।

Students और Visitors के लिए बनेगा Living Classroom

QR Code तकनीक से छात्र और परिसर में आने वाले लोग पेड़ों के बारे में आसानी से जानकारी हासिल कर सकते हैं। मोबाइल से कोड स्कैन करने पर संबंधित पेड़ की प्रजाति और उसके पर्यावरणीय महत्व जैसी जानकारी उपलब्ध कराई जा सकती है।

इससे छात्रों को किताबों के अलावा परिसर में मौजूद वास्तविक पेड़ों के माध्यम से पर्यावरण और जैव विविधता को समझने का अवसर मिलता है।

Sustainable Management पर जोर

Khalsa College की Principal Prof. Dr. Mandeep Kaur ने कहा कि यह पहल दिखाती है कि तकनीक का इस्तेमाल केवल रिकॉर्ड तैयार करने के लिए ही नहीं, बल्कि कॉलेज की मौजूदा हरित संपदा के दीर्घकालिक संरक्षण और Sustainable Management के लिए भी किया जा सकता है।

उनके अनुसार, डिजिटल रिकॉर्ड भविष्य में पेड़ों की देखभाल और संरक्षण की योजनाएं तैयार करने में उपयोगी साबित हो सकता है।

Key Highlights:

  • Khalsa College Ranjit Avenue में Heritage Trees को QR Code से टैग किया गया।
  • मोबाइल से QR Code स्कैन कर पेड़ की जानकारी हासिल की जा सकेगी।
  • पेड़ों की प्रजाति, स्थान, उम्र और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी डिजिटल रूप से दर्ज की जा सकती है।
  • पुराने, दुर्लभ और कमजोर पेड़ों की पहचान में मदद मिलेगी।
  • डिजिटल इन्वेंटरी से पेड़ों के रखरखाव की निगरानी आसान होगी।
  • GNDU ने वर्ष 2024 में QR Coding of Trees की पहल शुरू की थी।
  • GNDU ने अपने लगभग 90 प्रतिशत पेड़-पौधों को QR Code व्यवस्था से जोड़ा था।
  • तकनीक के जरिए छात्रों और आगंतुकों को पेड़ों के पर्यावरणीय महत्व की जानकारी मिल सकेगी।

FAQ Section:

Q1. Khalsa College में पेड़ों को QR Code से क्यों जोड़ा गया है?
पेड़ों की डिजिटल पहचान बनाने, उनकी जानकारी दर्ज करने और लंबे समय तक उनके संरक्षण व रखरखाव की निगरानी के लिए QR Code लगाए गए हैं।

Q2. QR Code स्कैन करने पर क्या जानकारी मिल सकती है?
QR Code के जरिए संबंधित पेड़ की प्रजाति, स्थान, उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और पर्यावरणीय महत्व जैसी जानकारी उपलब्ध कराई जा सकती है।

Q3. यह पहल किस कॉलेज में शुरू की गई है?
यह पहल अमृतसर के Ranjit Avenue स्थित Khalsa College परिसर में की गई है।

Q4. पेड़ों की QR Coding की शुरुआत कब हुई थी?
दिए गए विवरण के अनुसार, Guru Nanak Dev University ने वर्ष 2024 में दुर्लभ और पुराने पेड़ों सहित परिसर के पेड़ों की QR Coding की पहल शुरू की थी।

Q5. छात्रों को इससे क्या फायदा होगा?
छात्र मोबाइल से QR Code स्कैन करके परिसर में मौजूद पेड़ों की प्रजातियों और उनके पर्यावरणीय महत्व के बारे में आसानी से जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।

Conclusion:

Khalsa College में Heritage Trees को QR Code से जोड़ने की पहल तकनीक और पर्यावरण संरक्षण के बीच एक उपयोगी कड़ी तैयार करती है। डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए पेड़ों की पहचान, निगरानी और संरक्षण को अधिक व्यवस्थित बनाया जा सकता है। साथ ही, छात्रों और आगंतुकों के लिए यह पहल परिसर को एक Living Classroom में बदलने में भी मदद कर सकती है।Screenshot_1506

Edited By: Atul Sharma

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