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PAU में बौद्धिक संपदा अधिकारों पर कार्यशाला, युवा फैकल्टी को दी गई अहम जानकारी
IPR के संरक्षण और व्यावसायीकरण पर जोर, शोध को बाजार तक पहुंचाने की अपील
पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी में आयोजित कार्यशाला में बौद्धिक संपदा अधिकारों के महत्व और उनके प्रबंधन पर चर्चा की गई, जिसमें युवा शिक्षकों को जागरूक किया गया।
Punjab Agricultural University (PAU) ने नई ज्ञान अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए बौद्धिक संपदा (IP) अधिकारों के महत्व पर एक कार्यशाला का आयोजन किया।
यह कार्यशाला टेक्नोलॉजी मार्केटिंग और IPR सेल तथा Punjab State Council for Science and Technology, चंडीगढ़ के सहयोग से आयोजित की गई, जिसका उद्देश्य युवा फैकल्टी को IP अधिकारों के क्षेत्र में आवश्यक जानकारी से लैस करना था।
टेक्नोलॉजी मार्केटिंग और IPR सेल के एसोसिएट डायरेक्टर Khushdeep Dharni ने बताया कि कार्यशाला में बौद्धिक संपदा अधिकारों के प्रबंधन से जुड़े विभिन्न पहलुओं—जैसे अधिग्रहण, संरक्षण और व्यावसायीकरण—पर विस्तृत चर्चा की गई।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, कृषि इंजीनियरिंग के अतिरिक्त निदेशक अनुसंधान Mahesh Kumar ने तकनीक विकास और उसके व्यावसायीकरण के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि PAU द्वारा विकसित तकनीकों को बाजार तक पहुंचाना बेहद जरूरी है।
Ruchi Singla (डायरेक्टर एवं CEO, RAS Intellect, मोहाली) और Divya Kaushik (वैज्ञानिक, पंजाब स्टेट काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी) इस कार्यशाला की मुख्य वक्ता थीं।
रुचि सिंगला ने प्रतिभागियों को देश में IP सिस्टम की मूल संरचना से अवगत कराया और बौद्धिक संपदा की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए। वहीं दिव्या कौशिक ने पेटेंट ड्राफ्टिंग और फाइलिंग की प्रक्रिया पर विस्तार से जानकारी दी।
खुशदीप धरनी ने IP अधिकारों के प्रभावी प्रबंधन के प्रमुख पहलुओं पर चर्चा करते हुए कहा कि प्रयोगशाला में हुए शोध को वास्तविक जीवन में लागू करना जरूरी है, ताकि सभी हितधारकों को उसका लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि किसी पेटेंट की सफलता का अंतिम पैमाना उसका व्यावसायीकरण ही होता है।
