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यूपी में आगजनी की घटनाओं की फिर जांच, ATS को पाकिस्तान लिंक का शक
26 मामलों को फिर खोला गया, आरोप—विदेशी हैंडलर के इशारे पर ‘ट्रायल’ हमले कर भेजे जाते थे वीडियो
उत्तर प्रदेश ATS ने पिछले छह महीनों में हुई आगजनी की 26 घटनाओं की जांच दोबारा शुरू की है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में पाकिस्तान से जुड़े नेटवर्क का शक सामने आया है।
Uttar Pradesh ATS ने राज्यभर में पिछले छह महीनों के दौरान हुई कम से कम 26 वाहन आगजनी और छोटी आग लगाने की घटनाओं की जांच दोबारा शुरू कर दी है। यह फैसला हाल ही में गिरफ्तार चार आरोपियों से मिली नई जानकारी के बाद लिया गया है, जिसमें पाकिस्तान से जुड़े नेटवर्क की भूमिका की आशंका जताई गई है।
ये घटनाएं Aligarh, Ghaziabad, Bulandshahr, Kanpur, Bareilly, Prayagraj और Bijnor जैसे जिलों में सामने आई थीं। पहले इन मामलों को सामान्य या आकस्मिक आग लगने की घटनाएं मानकर बंद कर दिया गया था।
जांच दोबारा तब शुरू हुई जब आरोपियों ने पूछताछ में कथित तौर पर स्वीकार किया कि वे सीमा पार बैठे हैंडलरों के निर्देश पर “ट्रायल” आगजनी कर रहे थे। वे इन घटनाओं के वीडियो बनाकर सबूत के तौर पर भेजते थे और बदले में उन्हें QR कोड के जरिए डिजिटल भुगतान मिलता था।
इन खुलासों का पता 3 अप्रैल को Lucknow में ATS द्वारा गिरफ्तार चार आरोपियों से पूछताछ के दौरान चला। इनमें Saqib alias Devil (मुख्य आरोपी), Vikas Gehlawat, Lokesh alias Papla Pandit और Arbaaz शामिल हैं।
जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी जानबूझकर वाहनों और छोटे ढांचों को निशाना बनाते थे ताकि इलाके में डर का माहौल बनाया जा सके, स्थानीय प्रतिक्रिया प्रणाली की जांच की जा सके और सांप्रदायिक तनाव भड़काने की कोशिश की जा सके। साथ ही, वे अपने हैंडलर को अपनी “क्षमता” दिखाने के लिए ये वीडियो भेजते थे। इस नेटवर्क का कथित संचालक Abu Bakar बताया जा रहा है, जो पाकिस्तान में सक्रिय है।
Amitabh Yash ने कहा कि आमतौर पर वाहन में आग लगने की घटनाओं को दुर्घटना मान लिया जाता है, जिससे आरोपियों को फायदा मिला। लेकिन अब पैसों के लेन-देन और डिजिटल सबूत सामने आने के बाद इन मामलों की गहराई से जांच की जा रही है।
बिजनौर के किरातपुर इलाके में 4 मार्च को हुई पिकअप वाहन आगजनी की घटना भी अब दोबारा जांच के दायरे में है। आरोपियों के पास से बरामद मोबाइल फोन में मिले वीडियो को इस घटना से जोड़कर देखा जा रहा है।
फॉरेंसिक टीमें अब जब्त किए गए मोबाइल फोन से मिले वीडियो की जांच कर रही हैं, ताकि घटनाओं का स्थान, समय और क्रम स्पष्ट किया जा सके।
जांच के दौरान महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों से जुड़े संदिग्ध फोन नंबर भी सामने आए हैं, जिनकी जानकारी केंद्रीय एजेंसियों के साथ साझा की गई है।
अधिकारी आरोपियों के बैंक खातों में हुए संदिग्ध लेन-देन की तारीखों का मिलान आगजनी की घटनाओं से कर रहे हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि किसी विशेष घटना के बाद पैसे ट्रांसफर किए गए थे या नहीं।

