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यूपी के सरकारी स्कूल अब हर साल 25 जून से खुलेंगे, भीषण गर्मी को देखते हुए बदला गया शैक्षणिक कैलेंडर
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत 220 शिक्षण दिवस सुनिश्चित करने के लिए लिया गया फैसला, स्कूल खुलने पर बच्चों की सेहत का विशेष ध्यान रखने के निर्देश।
उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी स्कूलों के ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद हर वर्ष 25 जून से स्कूल खोलने का निर्णय लिया है। नई व्यवस्था का उद्देश्य भीषण गर्मी के कारण छुट्टियां बढ़ाने की जरूरत को खत्म करना और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुसार 220 शिक्षण दिवस सुनिश्चित करना है।
यूपी के सरकारी स्कूलों का नया शैक्षणिक कैलेंडर, हर साल 25 जून से शुरू होंगी कक्षाएं
उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी स्कूलों के शैक्षणिक कैलेंडर में बड़ा बदलाव किया है। अब प्रदेश के सभी सरकारी विद्यालय ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद हर वर्ष 25 जून को नियमित रूप से खुलेंगे। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य भीषण गर्मी के कारण बार-बार ग्रीष्मकालीन छुट्टियां बढ़ाने की आवश्यकता को समाप्त करना और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप 220 शिक्षण दिवस सुनिश्चित करना है।
यह जानकारी बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने मंगलवार को आयोजित विशेष यूट्यूब लाइव संवाद के दौरान दी।
## स्कूल खुलने पर बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता
अपर मुख्य सचिव ने कहा कि 25 जून को स्कूल खुलने पर विद्यार्थियों का उत्साहपूर्वक स्वागत किया जाए। साथ ही, मौजूदा गर्मी को देखते हुए स्कूलों को बच्चों को डिहाइड्रेशन और गर्मी से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से बचाने के लिए विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं।उन्होंने स्कूलों से अनावश्यक बाहरी गतिविधियों से बचने और बच्चों के स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की अपील की।
## 1 जुलाई से शुरू होगा 'स्कूल चलो अभियान' का दूसरा चरण
उन्होंने बताया कि 1 जुलाई से 'स्कूल चलो अभियान' का दूसरा चरण शुरू किया जाएगा, जिसका मुख्य उद्देश्य स्कूल से बाहर रह गए बच्चों की पहचान कर उनका नामांकन सुनिश्चित करना होगा।
इसके लिए आशा कार्यकर्ताओं के पास उपलब्ध जन्म रिकॉर्ड का उपयोग किया जाएगा ताकि अधिक से अधिक बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।
## ड्रॉपआउट रोकने पर रहेगा विशेष फोकस
पार्थ सारथी सेन शर्मा ने कहा कि कक्षा 5 के विद्यार्थियों का कक्षा 6 में प्रवेश सुनिश्चित करना संबंधित कक्षा शिक्षक की जिम्मेदारी होगी। इससे स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या कम करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने शिक्षकों को निर्देश दिया कि वे अनुपस्थित रहने वाले विद्यार्थियों के अभिभावकों से नियमित संपर्क बनाए रखें और उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करें।
## कमजोर विद्यार्थियों के लिए चलेगा 'कैच-अप प्रोग्राम'
शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में पढ़ाई में पिछड़ रहे विद्यार्थियों को अतिरिक्त सहायता देने के लिए 'कैच-अप प्रोग्राम' संचालित किया जाएगा।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य ऐसे छात्रों की सीखने की क्षमता में सुधार करना और उन्हें अन्य विद्यार्थियों के बराबर लाना है।
## अभिभावकों की भागीदारी और पढ़ने की आदत पर जोर
अपर मुख्य सचिव ने कहा कि विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए होलिस्टिक प्रोग्रेस रिपोर्ट, नियमित पठन-पाठन की आदत और अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
उन्होंने शिक्षकों से बच्चों में पढ़ने की संस्कृति विकसित करने और अभिभावकों के साथ लगातार संवाद बनाए रखने की अपील की।
Key Highlights:
- यूपी के सरकारी स्कूल अब हर साल 25 जून से खुलेंगे।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत 220 शिक्षण दिवस सुनिश्चित करने का लक्ष्य।
- भीषण गर्मी के कारण छुट्टियां बढ़ाने की जरूरत होगी कम।
- 1 जुलाई से शुरू होगा 'स्कूल चलो अभियान' का दूसरा चरण।
- स्कूल से बाहर बच्चों के नामांकन पर रहेगा विशेष फोकस।
- कमजोर विद्यार्थियों के लिए 'कैच-अप प्रोग्राम' चलाया जाएगा।
- बच्चों की सुरक्षा और डिहाइड्रेशन से बचाव के विशेष निर्देश।
## FAQ Section
प्रश्न 1: उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूल अब कब खुलेंगे?
अब हर वर्ष ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद 25 जून को सरकारी स्कूल खुलेंगे।
प्रश्न 2: यह बदलाव क्यों किया गया है?
भीषण गर्मी के कारण छुट्टियां बढ़ाने की आवश्यकता को कम करने और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार 220 शिक्षण दिवस सुनिश्चित करने के लिए।
प्रश्न 3: 'स्कूल चलो अभियान' का दूसरा चरण कब शुरू होगा?
1 जुलाई से।
प्रश्न 4: पढ़ाई में कमजोर छात्रों के लिए क्या व्यवस्था की गई है?
ऐसे विद्यार्थियों के लिए 'कैच-अप प्रोग्राम' चलाया जाएगा ताकि उनकी सीखने की क्षमता में सुधार हो सके।
Conclusion:
उत्तर प्रदेश सरकार का यह निर्णय शिक्षा व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। नए शैक्षणिक कैलेंडर, स्कूल चलो अभियान और कैच-अप प्रोग्राम जैसे प्रयासों से नामांकन बढ़ाने, ड्रॉपआउट कम करने और विद्यार्थियों की सीखने की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद है।

