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यूपी के करीब 1 लाख शिक्षा प्रेरकों को मिल सकती है बड़ी राहत, ₹400 करोड़ बकाया भुगतान की तैयारी
साक्षर भारत मिशन के तहत वर्षों से लंबित मानदेय जल्द जारी होने की संभावना
उत्तर प्रदेश सरकार जल्द ही साक्षर भारत मिशन के तहत करीब एक लाख शिक्षा प्रेरकों के ₹400 करोड़ से अधिक बकाया मानदेय का भुगतान कर सकती है, जो पिछले कई वर्षों से लंबित है।
उत्तर प्रदेश में करीब एक लाख पूर्व शिक्षा प्रेरकों (शिक्षा मोटिवेटर्स) के लिए बड़ी राहत की खबर है। राज्य सरकार साक्षर भारत मिशन के तहत ₹400 करोड़ से अधिक के लंबे समय से लंबित मानदेय का भुगतान जल्द कर सकती है।
ये शिक्षा प्रेरक संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) के आधार पर नियुक्त किए गए थे और साक्षरता को बढ़ावा देने का कार्य करते थे। हालांकि, केंद्र सरकार द्वारा इस योजना को लगभग आठ वर्ष पहले बंद कर दिया गया था, जिसके बाद से उनका मानदेय लंबित है।
साक्षरता, वैकल्पिक शिक्षा, उर्दू एवं प्राच्य भाषाएं विभाग के निदेशक अनिल भूषण चतुर्वेदी ने 60 जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे पात्र लाभार्थियों का रिकॉर्ड सत्यापित करें और विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराएं, ताकि भुगतान प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके।
इन अधिकारियों में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET) के प्राचार्य, बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) और जिला विद्यालय निरीक्षक (DIoS) शामिल हैं।
26 मार्च को जारी आदेश के अनुसार, अधिकारियों को 15 दिनों के भीतर जानकारी प्रस्तुत करनी है। यह प्रक्रिया 2017-18 के ऑडिट के दौरान तैयार की गई ब्लॉक-वार देनदारी रिपोर्ट के आधार पर की जा रही है।
साक्षर भारत मिशन की शुरुआत केंद्र सरकार ने 2009-10 में की थी, जिसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर साक्षरता को बढ़ावा देना था। उत्तर प्रदेश में यह योजना 2011-12 में कई जिलों में लागू की गई, जबकि प्रयागराज में इसे 2013-14 शैक्षणिक सत्र से शुरू किया गया।
इस योजना के तहत 49,921 लोक शिक्षा केंद्रों पर कुल 99,482 शिक्षा प्रेरकों को नियुक्त किया गया था, जिन्हें प्रति माह ₹2,000 मानदेय दिया जाता था।
इनका मुख्य कार्य 15 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को साक्षर बनने के लिए प्रेरित करना था। हालांकि, 31 मार्च 2018 को यह योजना बंद कर दी गई, जिसके बाद बड़ी संख्या में शिक्षा प्रेरकों को उनका मानदेय नहीं मिल पाया।
कई जिलों में तो स्थिति यह रही कि अगस्त 2014 से मार्च 2018 के बीच के 43 महीनों में उन्हें एक भी महीने का भुगतान नहीं किया गया।
