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UP की सुष्मिता सिंह को बड़ा अंतरराष्ट्रीय मौका, सैफ अली खान के क्लासिक लेखक सआदत हसन मंटो की कहानी से जुड़ी फिल्म में निभा रहीं अहम भूमिका
अज़मगढ़–गोरखपुर से जुड़ी जड़ों वाली एक्ट्रेस का ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर प्रतिनिधित्व, भावनात्मक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण किरदार
उत्तर प्रदेश से जुड़ी अभिनेत्री सुष्मिता सिंह को अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में अपनी फिल्म के चयन का मौका मिला है। मंटो की कहानी से प्रेरित इस फिल्म में उनका किरदार बेहद भावनात्मक और चुनौतीपूर्ण बताया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश के अज़मगढ़ और गोरखपुर से गहरी जड़ें रखने वाली अभिनेत्री सुष्मिता सिंह को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। उनकी फिल्म का चयन जनवरी में हुआ था, जिसके बाद उन्होंने इसे अपने करियर का बेहद खास और अविस्मरणीय पल बताया।
सुष्मिता ने कहा कि फिल्म चयन की खबर के बाद वह अपनी खुशी को नियंत्रित नहीं कर पाईं, खासकर इसलिए क्योंकि वह किसी फिल्मी परिवार से नहीं आतीं।
गैर-फिल्मी पृष्ठभूमि से ग्लोबल मंच तक का सफर
सुष्मिता सिंह ने बताया कि उनके लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उनका कोई बॉलीवुड बैकग्राउंड नहीं है। उन्होंने इसे “अवास्तविक और बेहद भावनात्मक अनुभव” बताया।वे इस फिल्म के साथ अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के सामने अपने काम को प्रस्तुत करेंगी, जिसे शुरुआत से ही वैश्विक ऑडियंस के लिए तैयार किया गया था।
मंटो की कहानी से प्रेरित फिल्म में चुनौतीपूर्ण किरदार
यह फिल्म प्रसिद्ध लेखक सआदत हसन मंटो की रचनाओं से प्रेरित है। इसमें सुष्मिता एक छात्रा का किरदार निभा रही हैं, जो एक दर्दनाक घटना से गुजरती है।
उन्होंने बताया कि यह उनके करियर का अब तक का सबसे कठिन भावनात्मक किरदार है, क्योंकि यह किरदार गहराई से मानसिक और भावनात्मक संघर्ष को दर्शाता है।
किरदार के दर्द से जुड़ना बना सबसे बड़ी चुनौती
सुष्मिता ने बताया कि इस किरदार को निभाने के दौरान उन्हें मानसिक रूप से बहुत संघर्ष करना पड़ा। उन्होंने मंटो की कहानी ‘खुशिया’ को बार-बार पढ़ा ताकि किरदार की भावनात्मक गहराई को समझ सकें।
उन्होंने कहा कि कई बार शूटिंग के बाद उन्हें मानसिक रूप से खुद को अलग करने के लिए लंबे समय तक अकेले रहना पड़ता था।
मोंनी रॉय और अनुप्रिया गोयनका के साथ काम का अनुभव
इस प्रोजेक्ट में उन्होंने अनुभवी कलाकारों जैसे मोंनी रॉय और अनुप्रिया गोयनका के साथ काम किया। सुष्मिता ने कहा कि इन कलाकारों की सबसे बड़ी खासियत सिर्फ उनका टैलेंट नहीं बल्कि उनका जमीन से जुड़े रहना भी है।
यूपी और मध्य प्रदेश से जुड़ी पहचान पर गर्व
सुष्मिता सिंह ने कहा कि यूपी और मध्य प्रदेश से जुड़ी अपनी जड़ों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रतिनिधित्व करना उनके लिए बेहद खास अनुभव है।
उन्होंने यह भी कहा कि वह मानती हैं कि छोटे शहरों की कई महिलाएं भी इसी तरह की कहानियों और संघर्षों से गुजरती हैं।
Key Highlights:
- यूपी की सुष्मिता सिंह को अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में चयन
- फिल्म मंटो की रचनाओं से प्रेरित
- भावनात्मक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण किरदार
- गैर-फिल्मी बैकग्राउंड से ग्लोबल मंच तक सफर
- मोंनी रॉय और अनुप्रिया गोयनका के साथ काम
FAQ Section:
Q1. सुष्मिता सिंह कहां की रहने वाली हैं?
उनकी जड़ें उत्तर प्रदेश के अज़मगढ़ और गोरखपुर से जुड़ी हैं।
Q2. फिल्म किस पर आधारित है?
यह फिल्म सआदत हसन मंटो की रचनाओं से प्रेरित है।
Q3. सुष्मिता सिंह का किरदार क्या है?
वे एक छात्रा की भूमिका निभा रही हैं जो एक दर्दनाक घटना से गुजरती है।
Q4. क्या यह फिल्म अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जा रही है?
हां, इसे अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के लिए तैयार किया गया है और फेस्टिवल में प्रदर्शित किया जाएगा।
Conclusion:
सुष्मिता सिंह का यह सफर दिखाता है कि प्रतिभा किसी बैकग्राउंड की मोहताज नहीं होती। यूपी की जड़ों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचना उनके करियर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जो कई नए कलाकारों के लिए प्रेरणा बन सकता है।

