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Punjab Power Crisis: लुधियाना समेत 5 औद्योगिक क्षेत्रों में रात 7 से 12 बजे तक बिजली कटौती, उद्योगों में बढ़ी चिंता
लेहरा मोहब्बत और रोपड़ थर्मल प्लांट की यूनिट बंद होने से बिजली संकट, उद्योगपतियों ने मंत्री से मुलाकात कर फैसला वापस लेने की मांग की
पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) ने बिजली की कमी के चलते लुधियाना, मिलर गंज, मंडी गोबिंदगढ़, खन्ना और मोहाली के उद्योगों के लिए रात 7 बजे से 12 बजे तक बिजली कटौती का ऐलान किया है। उद्योग संगठनों ने फैसले से उत्पादन और सुरक्षा पर असर पड़ने की आशंका जताई है।
पंजाब में बिजली संकट के बीच औद्योगिक क्षेत्र को बड़ा झटका लगा है। पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) के ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस डिवीजन ने लुधियाना शहर, मिलर गंज, मंडी गोबिंदगढ़, खन्ना और मोहाली के उद्योगों के लिए रात के समय पांच घंटे की बिजली कटौती का आदेश जारी किया है।
PSPCL के अनुसार, यह कटौती शाम 7 बजे से रात 12 बजे तक लागू रहेगी और अगले आदेश तक जारी रहेगी। बिजली उत्पादन में आई कमी और ग्रिड सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है।
क्यों लिया गया बिजली कटौती का फैसला?
कई पावर प्लांट की यूनिट उपलब्ध नहीं
PSPCL के मुताबिक, लेहरा मोहब्बत और रोपड़ थर्मल पावर प्लांट की कुछ उत्पादन इकाइयों के बंद होने के कारण बिजली की उपलब्धता प्रभावित हुई है। इसके अलावा रंजीत सागर डैम (RSD) परियोजना की यूनिटें भी उपलब्ध नहीं हैं।इन्हीं परिस्थितियों के चलते बिजली की मांग और उपलब्धता के बीच अंतर पैदा हुआ है। PSPCL ने कहा है कि ग्रिड की सुरक्षा बनाए रखने और बिजली व्यवस्था को संतुलित करने के लिए औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली कटौती की जा रही है।
उद्योगपतियों ने फैसले का किया विरोध
उत्पादन और सुरक्षा पर असर की जताई आशंका
रात के समय पांच घंटे बिजली बंद करने के फैसले से औद्योगिक संगठनों में नाराजगी है। फेडरेशन ऑफ इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल ऑर्गनाइजेशन (FICO) के अध्यक्ष गुरमीत सिंह कूलर ने PSPCL के फैसले का कड़ा विरोध किया है।
कूलर के नेतृत्व में उद्योगपतियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने पंजाब के बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंड से मुलाकात की और उन्हें लिखित ज्ञापन सौंपा। उद्योगपतियों ने कहा कि बिजली संकट का समाधान तय समय पर ब्लैकआउट करना नहीं है।
ब्लैकआउट के दौरान चोरी-लूट का खतरा
उद्योगों की सुरक्षा को लेकर चिंता
FICO अध्यक्ष गुरमीत सिंह कूलर ने कहा कि तय समय पर बिजली बंद होने से औद्योगिक इकाइयों में चोरी और लूट का खतरा बढ़ सकता है। उनके मुताबिक, असामाजिक तत्वों को अगर ब्लैकआउट का समय पता हो तो वे अंधेरे का फायदा उठाकर औद्योगिक परिसरों को निशाना बना सकते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि बिजली उद्योगों के लिए एक महत्वपूर्ण उत्पादन संसाधन है। कई विनिर्माण इकाइयां उत्पादन लक्ष्य और निर्यात प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए रात की शिफ्ट में काम करती हैं।
उत्पादन लागत और डिलीवरी पर भी असर की आशंका
लगातार चलने वाली मशीनरी को नुकसान का डर
उद्योग संगठनों का कहना है कि अचानक बिजली कटौती से उत्पादन बाधित होगा, लागत बढ़ेगी और तैयार माल की डिलीवरी में देरी हो सकती है। इसका सीधा असर पंजाब के उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर पड़ने की आशंका है।
विशेष रूप से वे उद्योग ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं जहां उत्पादन प्रक्रिया लगातार चलती रहती है। फर्नेस, हीट-ट्रीटमेंट प्लांट, तापमान-संवेदनशील प्रक्रियाओं और लगातार चलने वाली उत्पादन लाइनों में मशीनों को अचानक बंद करना और दोबारा शुरू करना तकनीकी और आर्थिक दोनों लिहाज से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
डाइंग उद्योग ने भी जताई नाराजगी
मुफ्त बिजली और उद्योगों की कटौती पर सवाल
पंजाब डायर्स एसोसिएशन ने भी PSPCL के फैसले को अनुचित बताया है। एसोसिएशन के बॉबी जिंदल ने राज्य सरकार की बिजली नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार के स्तर पर पंजाब में अतिरिक्त बिजली होने की बात कही जाती है, जबकि 300 यूनिट से कम मासिक खपत करने वाले घरेलू उपभोक्ताओं को मुफ्त बिजली दी जा रही है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब कुछ उपभोक्ताओं को मुफ्त बिजली दी जा रही है, तो उद्योगों को बिजली से वंचित करना किस तरह उचित है।
MSME क्षेत्र ने भी किया विरोध
वर्ल्ड MSME फोरम के अध्यक्ष ने भी उद्योगों पर लगाए गए प्रतिबंधों की आलोचना की है। उन्होंने सरकार के इस कदम को उद्योगों के लिए कठोर और एकतरफा फैसला बताया।
औद्योगिक संगठनों ने पंजाब सरकार और बिजली विभाग से रात के समय लगाए गए प्रतिबंधों की तत्काल समीक्षा कर उन्हें वापस लेने की मांग की है। उनका कहना है कि उद्योगों के विकास, निर्यात बढ़ाने और पंजाब की औद्योगिक प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए निर्बाध बिजली आपूर्ति जरूरी है।
Key Highlights:
- लुधियाना, मिलर गंज, मंडी गोबिंदगढ़, खन्ना और मोहाली के उद्योग प्रभावित होंगे।
- रात 7 बजे से 12 बजे तक पांच घंटे बिजली कटौती का आदेश।
- कटौती अगले आदेश तक जारी रहने की बात कही गई है।
- लेहरा मोहब्बत और रोपड़ थर्मल प्लांट की यूनिटों के बंद होने से बिजली उपलब्धता प्रभावित।
- रंजीत सागर डैम परियोजना की यूनिटें भी उपलब्ध नहीं हैं।
- PSPCL ने ग्रिड सुरक्षा के लिए कदम उठाने की बात कही।
- FICO समेत कई औद्योगिक संगठनों ने फैसले का विरोध किया।
- उद्योगपतियों ने चोरी, उत्पादन नुकसान और लागत बढ़ने की आशंका जताई।
- उद्योग प्रतिनिधिमंडल ने बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंड को ज्ञापन सौंपा।
- डाइंग और MSME क्षेत्र ने भी बिजली कटौती पर सवाल उठाए।
FAQ Section:
पंजाब में उद्योगों के लिए बिजली कटौती कितने बजे होगी?
PSPCL के आदेश के अनुसार, प्रभावित औद्योगिक क्षेत्रों में शाम 7 बजे से रात 12 बजे तक बिजली कटौती की जाएगी।
किन क्षेत्रों के उद्योग बिजली कटौती से प्रभावित होंगे?
लुधियाना शहर, मिलर गंज, मंडी गोबिंदगढ़, खन्ना और मोहाली के औद्योगिक क्षेत्र इस फैसले से प्रभावित होंगे।
बिजली कटौती क्यों की जा रही है?
PSPCL के अनुसार, लेहरा मोहब्बत और रोपड़ थर्मल पावर प्लांट की उत्पादन इकाइयों के बंद होने तथा रंजीत सागर डैम परियोजना की यूनिटों के उपलब्ध न होने से बिजली की कमी हुई है।
उद्योग संगठनों ने क्या मांग की है?
उद्योग संगठनों ने रात के समय बिजली कटौती को वापस लेने और उद्योगों को निर्बाध बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराने की मांग की है।
बिजली कटौती से किन उद्योगों पर ज्यादा असर पड़ सकता है?
लगातार उत्पादन वाली इकाइयां, फर्नेस, हीट-ट्रीटमेंट प्लांट और तापमान-संवेदनशील प्रक्रियाओं से जुड़े उद्योग विशेष रूप से प्रभावित हो सकते हैं।
Conclusion:
पंजाब में बिजली उत्पादन से जुड़ी मौजूदा समस्याओं के बीच उद्योगों पर रात में पांच घंटे की बिजली कटौती ने औद्योगिक संगठनों की चिंता बढ़ा दी है। PSPCL ने इसे ग्रिड सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बताया है, जबकि उद्योगपतियों का कहना है कि इससे उत्पादन, सुरक्षा, लागत और निर्यात प्रतिबद्धताओं पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। अब उद्योग जगत की नजर पंजाब सरकार और PSPCL की अगली कार्रवाई पर है।
