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सिरसा नदी में बढ़ता प्रदूषण बना गंभीर संकट, बद्दी के औद्योगिक कचरे और सीवेज पर उठे सवाल
रूपनगर तक पहुंचते-पहुंचते नदी में कोलीफॉर्म और BOD का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ा, सतलुज पर भी पड़ रहा असर
हिमाचल प्रदेश के बद्दी क्षेत्र से निकलने वाले औद्योगिक अपशिष्ट और घरेलू सीवेज को सिरसा नदी के बढ़ते प्रदूषण की बड़ी वजह बताया जा रहा है। प्रदूषित सिरसा आगे चलकर सतलुज नदी में मिलती है, जिससे जल प्रदूषण का दायरा और बढ़ने की चिंता है।
हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक शहर बद्दी के आसपास औद्योगिक अपशिष्ट और घरेलू सीवेज के उपचार में भारी कमी का असर अब सिरसा नदी पर गंभीर रूप से दिखाई दे रहा है। रूपनगर जिले के घनौली तक पहुंचते-पहुंचते नदी के पानी में प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ गया है। सिरसा नदी आगे चलकर सतलुज में मिलती है, ऐसे में इसका प्रदूषण बड़े जल तंत्र को प्रभावित कर सकता है।
रूपनगर से आम आदमी पार्टी के विधायक दिनेश चड्ढा ने पर्यावरण सचिव को लिखे पत्र में बद्दी क्षेत्र की औद्योगिक और सीवेज व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। द ट्रिब्यून के पास उपलब्ध पत्र के अनुसार, बद्दी में करीब 2,200 उद्योग संचालित हो रहे हैं, जिनमें लगभग 1,000 इकाइयां तरल अपशिष्ट पैदा करती हैं।
बद्दी की 1,000 इकाइयों से निकलता है तरल कचरा
केवल 377 इकाइयों का अपशिष्ट CETP तक पहुंचने का दावा
विधायक दिनेश चड्ढा के अनुसार, करीब 1,000 औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला तरल अपशिष्ट कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) तक पहुंचना चाहिए, लेकिन इनमें से केवल लगभग 377 इकाइयों का अपशिष्ट ही CETP तक पहुंच रहा है।आरोप है कि बाकी औद्योगिक अपशिष्ट नालों और जलधाराओं में पहुंच रहा है। यही पानी आगे सिरसा नदी में और फिर सतलुज नदी में मिल रहा है।
चड्ढा ने बताया कि उन्होंने ये आंकड़े हिमाचल प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HPPPCB) की आधिकारिक वेबसाइट और हिमाचल प्रदेश के अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के आधार पर जुटाए हैं।
बद्दी में सीवेज ट्रीटमेंट की क्षमता पर भी सवाल
32 MLD जरूरत के मुकाबले सिर्फ 5 MLD STP
बद्दी की आबादी को लेकर भी स्थिति चिंताजनक बताई गई है। पत्र के मुताबिक, बद्दी की आधिकारिक आबादी करीब 2.2 लाख है, जबकि औद्योगिक और प्रवासी श्रमिकों की बड़ी संख्या के कारण वास्तविक आबादी लगभग चार लाख तक पहुंचने का अनुमान है।
आधिकारिक आबादी के हिसाब से भी यहां करीब 32 MLD यानी प्रतिदिन 3.2 करोड़ लीटर सीवेज के उपचार की जरूरत बताई गई है। इसके मुकाबले वर्तमान में केवल 5 MLD क्षमता वाला सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट संचालित हो रहा है।
विधायक का आरोप है कि उपचार के बिना सीवेज नालों के जरिए बह रहा है। इनमें चामोली ड्रेन भी शामिल है, जिसके जरिए यह गंदा पानी सिरसा नदी तक पहुंचने की बात कही गई है।
घनौली पहुंचते-पहुंचते बेहद खराब हुई नदी की स्थिति
मार्च 2026 में फीकल कोलीफॉर्म 17,000 MPN/100 ml
हिमाचल प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जुलाई 2025 से मार्च 2026 के बीच की सैंपलिंग में सिरसा नदी की स्थिति में गंभीर गिरावट सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार, रूपनगर जिले के घनौली में मार्च 2026 के दौरान कुल कोलीफॉर्म का स्तर 60,000 MPN/100 ml तक पहुंच गया, जबकि फीकल कोलीफॉर्म 17,000 MPN/100 ml दर्ज किया गया।
यह आंकड़ा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के Class B जल गुणवत्ता मानकों की तुलना में बेहद अधिक है। Class B पानी को संगठित बाहरी स्नान के लिए उपयुक्त माना जाता है, जिसके लिए कुल कोलीफॉर्म की सीमा 500 MPN/100 ml निर्धारित है।
फीकल कोलीफॉर्म के लिए वांछनीय सीमा भी 500 MPN/100 ml है, जबकि अधिकतम अनुमेय स्तर 2,500 MPN/100 ml है। इस लिहाज से घनौली में दर्ज 17,000 MPN/100 ml का स्तर वांछनीय सीमा से करीब 34 गुना अधिक रहा।
BOD का स्तर भी मानक से ऊपर
दिसंबर 2025 में BOD 15 mg/L तक पहुंचा
सिरसा नदी में बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD) का स्तर भी निर्धारित मानकों से लगातार ऊपर दर्ज किया गया।
दिसंबर 2025 में BOD 15 mg/L तक पहुंच गया था, जबकि CPCB के Class B मानक के तहत इसकी सीमा 3 mg/L है। इसके बाद जनवरी 2026 में यह 4 mg/L, फरवरी में 6 mg/L और मार्च में 4.8 mg/L दर्ज किया गया।
BOD का अधिक होना पानी में जैविक प्रदूषण की अधिक मात्रा का संकेत माना जाता है और इससे जलीय पारिस्थितिकी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
पुराने CPCB आंकड़ों ने भी जताई थी चिंता
नालों में BOD का स्तर कई गुना अधिक
विधायक के पत्र में पहले के CPCB आकलनों का भी उल्लेख किया गया है। इन आकलनों में बद्दी-नालागढ़ औद्योगिक क्षेत्र से सिरसा नदी में जाने वाले नालों में काफी अधिक प्रदूषण भार दर्ज किया गया था।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, सैंडहोली नाले में BOD 56 mg/L, हाउसिंग बोर्ड नाले में 30 mg/L और HPSIDC ड्रेन में 200 से 230 mg/L तक दर्ज किया गया था।
पत्र में एक CETP आउटफॉल का भी उल्लेख है, जहां 17.5 MLD प्रवाह के साथ BOD 22 mg/L दर्ज किए जाने की बात कही गई है।
Key Highlights:
- बद्दी क्षेत्र में करीब 2,200 उद्योग संचालित होने का दावा।
- लगभग 1,000 इकाइयों से तरल औद्योगिक अपशिष्ट निकलता है।
- केवल करीब 377 इकाइयों का अपशिष्ट CETP तक पहुंचने की बात कही गई।
- बद्दी की आधिकारिक आबादी करीब 2.2 लाख, जबकि अनुमानित वास्तविक आबादी करीब 4 लाख बताई गई।
- 32 MLD सीवेज उपचार की जरूरत के मुकाबले केवल 5 MLD STP संचालित होने का दावा।
- मार्च 2026 में घनौली में कुल कोलीफॉर्म 60,000 MPN/100 ml और फीकल कोलीफॉर्म 17,000 MPN/100 ml दर्ज हुआ।
- दिसंबर 2025 में सिरसा का BOD 15 mg/L तक पहुंचा, जबकि CPCB Class B सीमा 3 mg/L है।
- सिरसा नदी आगे जाकर सतलुज नदी में मिलती है, जिससे प्रदूषण का प्रभाव व्यापक होने की चिंता है।
FAQ Section:
सिरसा नदी में प्रदूषण की मुख्य वजह क्या बताई जा रही है?
बद्दी क्षेत्र से निकलने वाले बिना पर्याप्त उपचार वाले औद्योगिक अपशिष्ट और घरेलू सीवेज को सिरसा नदी के प्रदूषण की प्रमुख वजहों में शामिल बताया गया है।
बद्दी में कितने उद्योग होने का दावा है?
रूपनगर विधायक दिनेश चड्ढा के पत्र के अनुसार, बद्दी क्षेत्र में करीब 2,200 उद्योग संचालित हैं। इनमें लगभग 1,000 इकाइयां तरल अपशिष्ट पैदा करती हैं।
कितनी औद्योगिक इकाइयों का अपशिष्ट CETP तक पहुंच रहा है?
पत्र में दावा किया गया है कि करीब 1,000 तरल अपशिष्ट पैदा करने वाली इकाइयों में से लगभग 377 का अपशिष्ट CETP तक पहुंच रहा है।
मार्च 2026 में सिरसा नदी में कोलीफॉर्म का स्तर कितना था?
घनौली में मार्च 2026 में कुल कोलीफॉर्म 60,000 MPN/100 ml और फीकल कोलीफॉर्म 17,000 MPN/100 ml दर्ज किया गया।
सिरसा नदी का प्रदूषण सतलुज को क्यों प्रभावित कर सकता है?
सिरसा नदी आगे चलकर सतलुज नदी में मिलती है। इसलिए सिरसा में पहुंचने वाला प्रदूषित पानी सतलुज के जल तंत्र पर भी असर डाल सकता है।
Conclusion:
बद्दी-नालागढ़ औद्योगिक क्षेत्र से निकलने वाले अपशिष्ट और सीवेज के उपचार में कथित कमी ने सिरसा नदी के प्रदूषण को गंभीर पर्यावरणीय चिंता बना दिया है। घनौली में सामने आए कोलीफॉर्म और BOD के आंकड़े स्थिति की गंभीरता को रेखांकित करते हैं। चूंकि सिरसा नदी आगे सतलुज में मिलती है, इसलिए औद्योगिक अपशिष्ट और सीवेज के प्रभावी उपचार के साथ निगरानी व्यवस्था मजबूत करना महत्वपूर्ण होगा।
