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ED का पंजाब पुलिस पर बड़ा आरोप, ‘विस्तृत सबूत’ देने के बावजूद FIR दर्ज नहीं करने का दावा
पुलिस ट्रांसफर, हवाला लेनदेन और जमीन सौदों से जुड़े कथित नेटवर्क की जांच में FIR को बताया अनिवार्य कानूनी कदम
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पंजाब पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। एजेंसी का कहना है कि पुलिस ट्रांसफर, हवाला लेनदेन और जमीन सौदों से जुड़े कथित नेटवर्क के संबंध में विस्तृत सबूत सौंपने के बावजूद FIR दर्ज नहीं की गई।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पंजाब में कथित ‘कैश-फॉर-ट्रांसफर’ नेटवर्क को लेकर पंजाब पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ED के मुताबिक, केंद्रीय एजेंसी ने पुलिस ट्रांसफर, हवाला लेनदेन, जमीन सौदों और नकद भुगतान से जुड़े मामले में विस्तृत साक्ष्य पंजाब के DGP को सौंपे थे, लेकिन इसके बावजूद FIR दर्ज नहीं की गई।
ED ने पंजाब सरकार की ओर से FIR दर्ज करने को लेकर सामने रखे गए रुख के जवाब में यह बयान जारी किया है। एजेंसी का कहना है कि उसने Prevention of Money Laundering Act (PMLA) की धारा 66(2) के तहत 30 जुलाई और 7 अगस्त को पंजाब के DGP के साथ संबंधित साक्ष्य औपचारिक रूप से साझा किए थे।
ED ने क्या आरोप लगाए?
पुलिस ट्रांसफर से लेकर हवाला लेनदेन तक का दावा
ED के अनुसार, जांच में कथित बिचौलिये नितिन गोहल की भूमिका सामने आई है। एजेंसी का आरोप है कि वह पुलिस अधिकारियों के ट्रांसफर से संबंधित अनुरोधों को एकत्र करने, पहले से हस्ताक्षरित ट्रांसफर आदेशों को बाहर पहुंचाने, हवाला लेनदेन की व्यवस्था करने और जमीन के सौदों को प्रभावित करने में कथित तौर पर शामिल था।एजेंसी ने यह भी दावा किया कि यात्रा और होटल खर्चों से जुड़े नकद भुगतान का प्रबंधन भी कथित नेटवर्क के जरिए किया जाता था।
पंजाब पुलिस पर FIR नहीं करने का आरोप
ED का कहना है कि संबंधित अधिकारियों के साथ बाद में भी संवाद किया गया, लेकिन पंजाब पुलिस की ओर से FIR दर्ज नहीं की गई। केंद्रीय एजेंसी ने FIR दर्ज करने को अनिवार्य कानूनी कदम बताया है।
ED के बयान के मुताबिक, एजेंसी के एक प्रतिनिधि ने 1 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से पंजाब पुलिस को जांच रिपोर्ट और संबंधित दस्तावेज सौंपने की कोशिश की। ED का आरोप है कि पुलिस ने इन दस्तावेजों की प्राप्ति की कोई पावती तक उपलब्ध नहीं कराई।
30 जुलाई और 7 अगस्त को साझा किए गए थे सबूत
ED के मुताबिक, मामले से जुड़ी जानकारी और कथित वित्तीय गतिविधियों के साक्ष्य पंजाब के DGP को दो अलग-अलग मौकों पर दिए गए थे।
एजेंसी ने कहा कि 30 जुलाई और 7 अगस्त को PMLA की धारा 66(2) के तहत संबंधित सामग्री औपचारिक रूप से साझा की गई। इसके बाद भी FIR दर्ज नहीं होने पर ED ने पंजाब पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।
Key Highlights:
- ED ने पंजाब पुलिस पर FIR दर्ज करने में देरी का आरोप लगाया।
- एजेंसी के अनुसार, 30 जुलाई और 7 अगस्त को DGP पंजाब को साक्ष्य सौंपे गए।
- मामला कथित पुलिस ट्रांसफर नेटवर्क, हवाला लेनदेन और जमीन सौदों से जुड़ा है।
- ED ने कथित बिचौलिये नितिन गोहल की भूमिका का उल्लेख किया।
- एजेंसी ने FIR को अनिवार्य कानूनी कदम बताया।
- ED के अनुसार, 1 सितंबर को उसके प्रतिनिधि को दस्तावेज सौंपने की पावती भी नहीं दी गई।
FAQ Section:
ED ने पंजाब पुलिस पर क्या आरोप लगाया है?
ED का आरोप है कि विस्तृत साक्ष्य उपलब्ध कराने के बावजूद पंजाब पुलिस ने कथित पुलिस ट्रांसफर, हवाला लेनदेन और जमीन सौदों से जुड़े मामले में FIR दर्ज नहीं की।
ED ने पंजाब पुलिस को सबूत कब दिए?
एजेंसी के अनुसार, PMLA की धारा 66(2) के तहत 30 जुलाई और 7 अगस्त को पंजाब के DGP के साथ संबंधित साक्ष्य औपचारिक रूप से साझा किए गए थे।
नितिन गोहल पर क्या आरोप हैं?
ED के अनुसार, नितिन गोहल की कथित भूमिका पुलिस ट्रांसफर के अनुरोध जुटाने, हस्ताक्षरित ट्रांसफर आदेशों को बाहर पहुंचाने, हवाला लेनदेन, जमीन सौदों और नकद खर्चों के प्रबंधन से जुड़ी थी।
1 सितंबर को क्या हुआ?
ED के अनुसार, उसका एक प्रतिनिधि 1 सितंबर को जांच रिपोर्ट पंजाब पुलिस को व्यक्तिगत रूप से देने पहुंचा, लेकिन उसे दस्तावेजों की प्राप्ति की पावती नहीं दी गई।
Conclusion:
ED और पंजाब पुलिस के बीच FIR दर्ज करने को लेकर विवाद ने मामले को और गंभीर बना दिया है। केंद्रीय एजेंसी का कहना है कि उसने कथित वित्तीय और प्रशासनिक नेटवर्क से जुड़े विस्तृत साक्ष्य पहले ही साझा कर दिए थे। अब इस मामले में पंजाब पुलिस की अगली कार्रवाई और जांच की दिशा पर नजर रहेगी।
