राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सोमवार को घोषित भारत–अमेरिका व्यापार समझौते के प्रमुख बिंदुओं को लेकर मंगलवार को सामने आए विवरण के अनुसार, यह समझौता भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। इस समझौते में डेयरी और अन्य संवेदनशील कृषि उत्पादों को पूरी तरह बाहर रखा गया है, जिससे इन क्षेत्रों को किसी तरह की प्रतिस्पर्धात्मक चोट नहीं लगेगी।
सूत्रों के अनुसार, अमेरिका द्वारा रूसी तेल खरीदने के कारण भारतीय उत्पादों पर लगाया गया 25 प्रतिशत दंडात्मक शुल्क अगले कुछ दिनों में हटा लिया जाएगा। इसके अलावा, करीब 30 अरब डॉलर मूल्य के श्रम-प्रधान भारतीय उत्पादों पर लगाया गया 25 प्रतिशत का पारस्परिक (रेसिप्रोकल) शुल्क, समझौते को औपचारिक रूप से संयुक्त बयान के जरिए लागू किए जाने के कुछ ही दिनों बाद 18 प्रतिशत कर दिया जाएगा। यह आंकड़े कैलेंडर वर्ष 2024 के द्विपक्षीय व्यापार डेटा पर आधारित बताए जा रहे हैं।
अब तक भारतीय निर्यातकों को अपने सबसे बड़े बाजार अमेरिका में बांग्लादेश, कंबोडिया, वियतनाम, इंडोनेशिया, चीन, मलेशिया और थाईलैंड जैसे देशों की तुलना में भारी शुल्क नुकसान झेलना पड़ रहा था। जहां इन देशों पर औसतन 19–20 प्रतिशत शुल्क लगता था, वहीं भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक शुल्क वसूला जा रहा था। सूत्रों ने कहा कि नए समझौते के बाद भारतीय निर्यातकों को 1–2 प्रतिशत अंकों का शुल्क लाभ मिलेगा, जिससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत होगी।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने नई दिल्ली में कहा कि इस समझौते में संवेदनशील कृषि और डेयरी क्षेत्रों की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित की गई है, जबकि इससे श्रम-प्रधान और निर्यात-उन्मुख क्षेत्रों को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा, “यह ऐसा समझौता है, जिस पर हर भारतीय को गर्व होना चाहिए।”
वहीं, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने एक साक्षात्कार में कहा कि भारत ने अमेरिकी निर्यात पर शुल्क घटाने पर सहमति दी है और भारत के औद्योगिक उत्पादों पर औसत शुल्क 13.5 प्रतिशत से घटकर शून्य हो जाएगा। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत ने कृषि उत्पादों के मामले में कुछ संरक्षण बनाए रखा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता न केवल भारतीय निर्यातकों को राहत देगा, बल्कि भारत–अमेरिका व्यापार संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने में भी अहम भूमिका निभाएगा।
