केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि बजट 2026-27 का उद्देश्य करदाताओं, उद्योग और राज्यों को नीतिगत स्थिरता प्रदान करना है, ताकि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार सुधारों की गति को बनाए रखते हुए चीजों को “लगातार बेहतर” बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
एक साक्षात्कार में बजट पर विस्तार से चर्चा करते हुए वित्त मंत्री ने सोमवार रात घोषित भारत–अमेरिका व्यापार समझौते का स्वागत किया। इस समझौते के तहत भारतीय निर्यात पर शुल्क 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह कदम भारतीय निर्यातकों के लिए बेहद सकारात्मक है और इससे उन्हें वैश्विक प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले बढ़त मिलेगी।
सीतारमण ने कहा, “यह शुल्क में बड़ी कटौती है और हमारे निर्यातकों के लिए राहत लेकर आई है। यह बहुत स्वागतयोग्य कदम है।” उन्होंने यह भी संकेत दिया कि चीन+1 रणनीति के तहत पूंजी प्रवाह भारत की ओर बढ़ सकता है, जिससे न केवल निवेश को बल मिलेगा, बल्कि भारतीय मुद्रा को भी मजबूती मिल सकती है। उल्लेखनीय है कि मंगलवार को रुपया मार्च 2020 के बाद एक दिन में सबसे अधिक मजबूत हुआ।
वित्त मंत्री ने कहा कि यह समझौता यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की प्रगति के बाद आया है। उन्होंने बताया कि भारत अब तक यूएई, ऑस्ट्रेलिया, ईएफटीए, न्यूजीलैंड, यूरोपीय संघ और कतर सहित कई देशों के साथ व्यापार समझौते कर चुका है।
बजट के व्यापक दृष्टिकोण पर बात करते हुए सीतारमण ने कहा कि महामारी के बाद से सरकार की बजट नीति में निरंतरता दिखाई देती है। उन्होंने कहा, “हमारा अंतिम लक्ष्य विकसित भारत 2047 है। इसे हासिल करने का माध्यम स्थिरता है—करदाताओं के लिए स्थिरता, उद्योग के लिए नीति स्थिरता, केंद्र-राज्य संबंधों में स्थिरता और सुधारों की निरंतरता।”
उन्होंने कहा कि सरकार के तीसरे कार्यकाल और एक ही प्रधानमंत्री के नेतृत्व में निरंतरता से व्यवसायों को भरोसा मिलता है। सरकार उद्योग जगत की जरूरतों के प्रति संवेदनशील रही है और आगे भी सुधारों को आगे बढ़ाया जाएगा।
वित्त मंत्री के अनुसार, बजट 2026-27 केवल एक वित्तीय दस्तावेज नहीं, बल्कि दीर्घकालिक दृष्टि और स्थिर विकास का खाका है, जो भारत को वैश्विक आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक और मजबूत कदम है।
