हरियाणा के होंध-चिल्लर गांव में 1984 में हुए सिख नरसंहार के पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प दोहराया गया। आम आदमी पार्टी के विधायक और होंध-चिल्लर समन्वय समिति के अध्यक्ष मनविंदर सिंह गियासपुरा ने कहा कि समिति कानूनी लड़ाई को अंतिम मुकाम तक ले जाएगी।
सोमवार को नरसंहार स्थल पर आयोजित एक धार्मिक दीवान में समिति के कार्यकर्ताओं और पीड़ित परिवारों के समर्थकों ने श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उन 32 सिखों को याद किया गया, जिनमें दो वर्ष के मासूम बच्चे से लेकर 70 वर्षीय बुजुर्ग तक शामिल थे।
गियासपुरा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वर्तमान में कानूनी कार्यवाही चल रही है और समिति ने संबंधित अदालत से मामले की सुनवाई तेज करने की मांग की है। इसके साथ ही पीड़ित परिवारों को कुछ राहत दिलाने के लिए राष्ट्रपति से हस्तक्षेप का अनुरोध भी किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय की कांग्रेस सरकार और प्रशासन दंगाइयों के खिलाफ कार्रवाई करने में पूरी तरह विफल रहा।
गौरतलब है कि होंध-चिल्लर नरसंहार 2 नवंबर 1984 को हरियाणा के रेवाड़ी जिले में हुआ था, जिसमें कथित तौर पर एक राजनीतिक भीड़ ने 32 सिखों की निर्मम हत्या कर दी थी। समिति का आरोप है कि उस समय रेवाड़ी पुलिस ने कोई हस्तक्षेप नहीं किया और जीवित बचे लोगों के बयानों पर दर्ज की गई एफआईआर महज औपचारिकता साबित हुई।
समिति ने यह भी आरोप लगाया कि बाद की सरकारें भी पीड़ितों की मदद के लिए आगे नहीं आईं, यहां तक कि जनवरी 2011 में सामूहिक कब्रों के फिर से मिलने के बाद भी न्याय की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए।
समिति के नेताओं ने कहा कि जब तक दोषियों को सजा और पीड़ित परिवारों को न्याय नहीं मिलता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
