- Hindi News
- राज्य
- पंजाब
- डेरों को बढ़ावा देकर सिख मूल्यों को कमजोर किया जा रहा है: दल खालसा
डेरों को बढ़ावा देकर सिख मूल्यों को कमजोर किया जा रहा है: दल खालसा
डेरा प्रमुखों की राजनीतिक सक्रियता और हालिया घटनाओं पर जताई गहरी चिंता
सिख संगठन दल खालसा के नेताओं ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर राजनीति, सामाजिक इंजीनियरिंग और तात्कालिक लाभ के नाम पर डेरों को बढ़ावा देकर सिख मूल सिद्धांतों को कमजोर करने का आरोप लगाया है। उन्होंने हालिया घटनाओं को एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति करार दिया।
दल खालसा के वरिष्ठ नेताओं हरपाल सिंह चीमा और कंवर पाल सिंह ने मंगलवार को जारी एक बयान में केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि डेरा राधा सोमी सत्संग बीस के प्रमुख गुरिंदर सिंह ढिल्लों की जेल में जाकर अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया से मुलाकात, और उसके तुरंत बाद सुप्रीम कोर्ट से मजीठिया को मिली न्यायिक राहत, कई गंभीर सवाल खड़े करती है।
नेताओं ने कहा कि इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जालंधर स्थित डेरा सचखंड बल्लां का हालिया दौरा भी एक गणनात्मक राजनीतिक कदम प्रतीत होता है। उनके अनुसार, ये घटनाएं संस्थागत स्वतंत्रता, नैतिक अधिकार और संविधान से इतर धार्मिक शक्ति केंद्रों के बढ़ते प्रभाव को उजागर करती हैं।
दल खालसा नेताओं ने आरोप लगाया कि यह स्थिति केंद्र सरकार, न्यायपालिका के कुछ वर्गों और विभाजनकारी धार्मिक संस्थाओं के बीच एक लंबे समय से चले आ रहे गठजोड़ की ओर इशारा करती है, जिसका उद्देश्य सिख धर्म के मूल सिद्धांत ‘शब्द गुरु’ की अवधारणा को कमजोर करना रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और सत्तारूढ़ प्रतिष्ठान द्वारा बार-बार संप्रदायिक डेरों से संपर्क साधना, खासकर डेरा सचखंड बल्लां का दौरा, धार्मिक मध्यस्थों के जरिए वोट बैंक को प्रभावित करने की रणनीति का हिस्सा है।
दल खालसा प्रवक्ता कंवर पाल सिंह ने कहा,
“यह कोई आकस्मिक या अलग-थलग घटना नहीं है। 1970 के दशक में इंदिरा गांधी के दौर से ही भारतीय राज्य ने ‘डेरावाद’ और ‘गुरुडोम’ को सिख एकता को तोड़ने, सिख संस्थाओं को कमजोर करने और गुरमत दर्शन को क्षीण करने के औजार के रूप में इस्तेमाल किया है। दुर्भाग्य से यह नीति आज भी जारी है।”
दल खालसा नेताओं ने चेतावनी दी कि डेरों को दिया जा रहा संरक्षण उन विभाजनकारी ताकतों को मजबूत कर रहा है, जिनकी विचारधारा श्री गुरु ग्रंथ साहिब को एकमात्र और शाश्वत गुरु मानने के सिख सिद्धांत को चुनौती देती है। उन्होंने सिख संगत से इन घटनाक्रमों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की।
