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बेल्जियम की ल्यूवेन यूनिवर्सिटी का प्रतिनिधिमंडल खालसा कॉलेज परिसर पहुंचा
1892 में निर्मित ऐतिहासिक भवन और सिख इतिहास शोध केंद्र की सराहना, शैक्षणिक सहयोग पर चर्चा
बेल्जियम की ल्यूवेन यूनिवर्सिटी के शिक्षकों, शोधार्थियों और छात्रों का 16 सदस्यीय उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को खालसा कॉलेज के ऐतिहासिक परिसर के दौरे पर पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने कॉलेज की विरासत और सिख इतिहास से जुड़े संसाधनों की प्रशंसा की।
बेल्जियम की ल्यूवेन यूनिवर्सिटी के शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों का 16 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को खालसा कॉलेज के ऐतिहासिक परिसर पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने वर्ष 1892 में निर्मित खालसा कॉलेज की भव्य विरासत इमारत का अवलोकन किया और इसकी स्थापत्य कला की सराहना की।
प्रतिनिधिमंडल ने कॉलेज स्थित सिख इतिहास शोध केंद्र का भी दौरा किया, जहां उन्हें सिख इतिहास से जुड़े अनेक दुर्लभ अवशेष और कलाकृतियां दिखाई गईं। इनमें प्रथम विश्व युद्ध में सिख सैनिकों के बलिदान को समर्पित एक बेल्जियम कलाकार द्वारा निर्मित मूर्ति भी शामिल थी, जिसे देखकर प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने विशेष रुचि दिखाई।
इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने कॉलेज के शिक्षकों और छात्रों के साथ संक्षिप्त संवाद भी किया। इस दौरान शिक्षा, अनुसंधान और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व डॉ. बर्ट ब्रोकर्ट, प्रोफेसर (विश्व धर्म) कर रहे थे। कॉलेज पहुंचने पर उनका स्वागत खालसा कॉलेज गवर्निंग काउंसिल के सचिव राजिंदर मोहन सिंह छिना और प्राचार्य आत्मा रंधावा ने किया।
डॉ. ब्रोकर्ट ने कहा कि उनका प्रतिनिधिमंडल पंजाब की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, विशेषकर सिख वास्तुकला और इतिहास को समझने के उद्देश्य से यहां आया है। उन्होंने कहा, “हम इस दौरे के माध्यम से भारत और बेल्जियम के बीच शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं को तलाश रहे हैं।”
प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने खालसा कॉलेज के शैक्षणिक वातावरण और ऐतिहासिक महत्व की सराहना करते हुए भविष्य में आपसी सहयोग को और मजबूत करने की इच्छा जताई।
