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करनाल में 4 सरकारी गर्ल्स कॉलेज अब भी अधूरे, अस्थायी इमारतों में पढ़ने को मजबूर छात्राएं
कई बार बढ़ाई जा चुकी है निर्माण की समयसीमा, तीन कॉलेजों का काम धीमा और एक के लिए अब तक जमीन का इंतजार
करनाल जिले में ग्रामीण छात्राओं को घर के नजदीक उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए शुरू किए गए चार सरकारी कॉलेजों के स्थायी भवन अब तक पूरे नहीं हो सके हैं। इसके चलते सैकड़ों छात्राएं अस्थायी परिसरों में पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
करनाल जिले में छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई सरकारी कॉलेज परियोजनाओं की रफ्तार सवालों के घेरे में है। कई बार समयसीमा बढ़ाए जाने के बावजूद जिले के चार सरकारी कॉलेजों के स्थायी भवन अभी तक पूरे नहीं हो पाए हैं।
तीन कॉलेजों में निर्माण कार्य जारी है, लेकिन इसकी गति धीमी बताई जा रही है। वहीं, एक कॉलेज के लिए अभी तक जमीन आवंटित नहीं हो सकी है। स्थायी भवन नहीं होने के कारण सैकड़ों छात्राएं फिलहाल सरकारी स्कूलों, ITI भवनों और अन्य अस्थायी परिसरों में कक्षाएं लेने को मजबूर हैं।
ग्रामीण छात्राओं को घर के पास उच्च शिक्षा देने की थी योजना
राज्य सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों की छात्राओं को उच्च शिक्षा उनके घर के करीब उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इन कॉलेजों की योजना बनाई थी। लक्ष्य था कि छात्राओं को करीब 20 किलोमीटर के दायरे में उच्च शिक्षा की सुविधा मिल सके।तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने करनाल जिले में सात कॉलेजों की घोषणा की थी। इनमें असंध के जयसिंहपुरा और निघड़ू में सहशिक्षा कॉलेजों के अलावा दादूपुर, पाढ़ा, तरावड़ी, बस्तली और बस्तारा में महिला कॉलेज शामिल थे।
हालांकि, परियोजनाएं शुरू होने के कई साल बाद भी इनमें से चार कॉलेजों के स्थायी भवन निर्माणाधीन हैं।
पाढ़ा गर्ल्स कॉलेज का निर्माण अभी तक अधूरा
पाढ़ा स्थित सरकारी कॉलेज भी लंबे समय से निर्माण पूरा होने का इंतजार कर रहा है। कॉलेज भवन का निर्माण सितंबर 2019 में शुरू हुआ था और इसे 21 महीने के भीतर यानी जुलाई 2021 तक पूरा किया जाना था।
बाद में निर्माण की समयसीमा बढ़ाकर 31 मई 2024 कर दी गई। अधिकारियों के अनुसार अब तक भवन का करीब 45 प्रतिशत निर्माण ही पूरा हो पाया है।
स्थायी भवन तैयार नहीं होने के कारण कॉलेज की कक्षाएं फिलहाल पाढ़ा स्थित आर्य कन्या गुरुकुल स्कूल के भवन में संचालित की जा रही हैं।
तय समयसीमा के बाद भी निर्माण जारी
पाढ़ा कॉलेज के मामले में मूल समयसीमा बीतने के बाद भी भवन का निर्माण पूरा नहीं हो सका। इससे छात्राओं को अपने कॉलेज परिसर के बजाय वैकल्पिक स्थान पर पढ़ाई करनी पड़ रही है।
बस्तली कॉलेज का करीब 78 प्रतिशत काम पूरा
डॉ. बीआर अंबेडकर राजकीय कॉलेज, बस्तली की स्थिति भी पूरी तरह सामान्य नहीं है। अधिकारियों के अनुसार कॉलेज भवन का लगभग 78 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है।
पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने 13 सितंबर 2017 को इस कॉलेज की घोषणा की थी। भवन का निर्माण 29 मई 2019 को शुरू हुआ और 8 जून 2021 तक इसे पूरा करने की मूल समयसीमा तय की गई थी।
समयसीमा पूरी होने के बावजूद भवन तैयार नहीं हो सका। इसके बाद परियोजना के लिए समय बढ़ाया गया और 30 अगस्त 2024 की संशोधित समयसीमा तय की गई। इसके बाद भी भवन का काम पूरा नहीं हुआ और एक बार फिर समयसीमा बढ़ाई गई।
फिलहाल कॉलेज की कक्षाएं एक सरकारी स्कूल के भवन में संचालित की जा रही हैं।
बस्तारा महिला कॉलेज का निर्माण भी अटका
सरकारी महिला कॉलेज, बस्तारा के भवन निर्माण में भी लंबे समय से देरी हो रही है। भवन को मूल रूप से जून 2021 तक पूरा किया जाना था, लेकिन तय समयसीमा तक निर्माण पूरा नहीं हो सका।
अधिकारियों के अनुसार भवन का लगभग 70 प्रतिशत काम पूरा हुआ है। इसके बाद शेष निर्माण कार्य रुक गया और बाकी हिस्से के निर्माण के लिए परियोजना फिलहाल री-टेंडरिंग प्रक्रिया में है।
वर्तमान में कॉलेज ITI भवन से संचालित हो रहा है।
कॉलेज के लिए 10 करोड़ रुपये मंजूर
बस्तारा महिला कॉलेज के अधूरे भवन को पूरा करने के लिए सरकार ने अब 10 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। इससे शेष निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने की उम्मीद है।
छात्राओं और अभिभावकों में चिंता
कॉलेजों के स्थायी भवनों के निर्माण में लगातार हो रही देरी से छात्राओं और उनके अभिभावकों में चिंता बढ़ रही है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली छात्राओं के लिए इन कॉलेजों की स्थापना का उद्देश्य उच्च शिक्षा को उनके घर के नजदीक उपलब्ध कराना था।
स्थायी परिसर की जगह अस्थायी भवनों में कक्षाएं संचालित होने के कारण कॉलेजों में उपलब्ध सुविधाओं और शैक्षणिक माहौल को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
Key Highlights:
- करनाल जिले में चार सरकारी कॉलेजों के स्थायी भवन अब तक अधूरे हैं।
- तीन कॉलेजों में निर्माण कार्य जारी है, लेकिन गति धीमी है।
- एक कॉलेज के लिए अभी तक जमीन आवंटित नहीं हुई है।
- पाढ़ा कॉलेज का करीब 45 प्रतिशत निर्माण पूरा होने की जानकारी है।
- बस्तली कॉलेज का लगभग 78 प्रतिशत काम पूरा बताया गया है।
- बस्तारा महिला कॉलेज का करीब 70 प्रतिशत निर्माण पूरा हुआ है।
- पाढ़ा कॉलेज अस्थायी रूप से आर्य कन्या गुरुकुल स्कूल भवन से चल रहा है।
- बस्तली कॉलेज की कक्षाएं सरकारी स्कूल भवन में हो रही हैं।
- बस्तारा महिला कॉलेज ITI भवन से संचालित हो रहा है।
- बस्तारा कॉलेज के अधूरे निर्माण के लिए सरकार ने 10 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं।
FAQ Section:
सवाल: करनाल में कितने सरकारी कॉलेजों के भवन अधूरे हैं?
जवाब: उपलब्ध जानकारी के अनुसार करनाल जिले में चार सरकारी कॉलेजों के स्थायी भवन अभी तक पूरे नहीं हुए हैं।
सवाल: पाढ़ा कॉलेज का निर्माण कब शुरू हुआ था?
जवाब: पाढ़ा स्थित सरकारी कॉलेज का निर्माण सितंबर 2019 में शुरू हुआ था। इसे मूल रूप से जुलाई 2021 तक पूरा किया जाना था।
सवाल: पाढ़ा कॉलेज का कितना निर्माण पूरा हुआ है?
जवाब: अधिकारियों के अनुसार पाढ़ा कॉलेज भवन का करीब 45 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हुआ है।
सवाल: बस्तारा महिला कॉलेज की वर्तमान स्थिति क्या है?
जवाब: बस्तारा महिला कॉलेज का करीब 70 प्रतिशत निर्माण पूरा बताया गया है। शेष काम के लिए परियोजना री-टेंडरिंग प्रक्रिया में है और कॉलेज फिलहाल ITI भवन से संचालित हो रहा है।
सवाल: बस्तारा कॉलेज के लिए कितनी राशि मंजूर की गई है?
जवाब: सरकार ने बस्तारा महिला कॉलेज के भवन का निर्माण पूरा करने के लिए 10 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं।
Conclusion:
करनाल जिले में ग्रामीण छात्राओं को घर के करीब उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई कॉलेज परियोजनाओं में लगातार हो रही देरी अब चिंता का विषय बन गई है। कई बार समयसीमा बढ़ने के बावजूद पाढ़ा, बस्तली और बस्तारा के कॉलेज अभी तक अपने स्थायी परिसरों में पूरी तरह शिफ्ट नहीं हो सके हैं। बस्तारा कॉलेज के लिए 10 करोड़ रुपये की मंजूरी के बाद अब निर्माण कार्य में तेजी आने की उम्मीद है, जबकि बाकी परियोजनाओं के पूरा होने का इंतजार जारी है।
