Bharatiya Janata Party पर किसान संगठनों का हमला, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ राष्ट्रव्यापी आंदोलन की तैयारी

पिपली में 23 मार्च को महापंचायत, कई राज्यों में प्रदर्शन और ट्रैक्टर मार्च का ऐलान; व्यापार समझौते को कृषि क्षेत्र के लिए खतरा बताया

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भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को किसानों के हितों के खिलाफ बताते हुए विभिन्न किसान संगठनों ने देशभर में महापंचायत, ट्रैक्टर मार्च और प्रदर्शन की घोषणा की है। एमएसपी की कानूनी गारंटी सहित लंबित मांगों को लेकर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी गई है।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर देशभर में किसान संगठनों ने एक बार फिर आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी है। संगठनों ने आरोप लगाया है कि Bharatiya Janata Party सरकार ने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के दबाव में किसानों के हितों से समझौता किया है।

किसान संगठनों ने महापंचायत, सम्मेलन और विरोध-प्रदर्शन आयोजित करने की घोषणा की है। उनकी प्रमुख मांगों में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर कानूनी गारंटी, कर्ज माफी, फसल नुकसान पर उचित मुआवजा, भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन, Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana में सुधार, किसान आंदोलन के दौरान दर्ज एफआईआर रद्द करना और हरियाणा में धान घोटाले से जुड़े अधिकारियों व निजी खिलाड़ियों पर कार्रवाई शामिल हैं।

पिपली में महापंचायत की घोषणा

Bharatiya Kisan Union (Charuni) ने 23 मार्च को पिपली अनाज मंडी में महापंचायत बुलाने की घोषणा की है। यह दिन शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है, जो Bhagat Singh, Rajguru और Sukhdev Thapar की शहादत से जुड़ा है।

संघ के अध्यक्ष Gurnam Singh Charuni ने कुरुक्षेत्र में हुई राज्य स्तरीय बैठक में पदाधिकारियों को किसानों और मजदूरों को संगठित करने के निर्देश दिए। उन्होंने जागरूकता अभियान चलाने और तकनीक का उपयोग कर अधिक से अधिक लोगों तक संदेश पहुंचाने को कहा।

चरूनी ने कहा, “किसान अमेरिका के कृषि क्षेत्र से प्रतिस्पर्धा करने की स्थिति में नहीं हैं। यह निर्णायक लड़ाई होगी और किसान हर बलिदान के लिए तैयार हैं। सरकार खेती को कॉरपोरेट घरानों को सौंपना चाहती है।”

उन्होंने 27 फरवरी को हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और राजस्थान में प्रदर्शन करने, 5 से 22 मार्च तक ‘प्रचार रथ’ निकालने और 10 मार्च को तहसील स्तर पर ट्रैक्टर मार्च आयोजित करने की घोषणा की।

संयुक्त किसान मोर्चा भी मैदान में

इसी तरह Samyukt Kisan Morcha ने भी अपनी राष्ट्रीय परिषद की बैठक के बाद देशभर में महापंचायत आयोजित करने का ऐलान किया है।

एसकेएम नेता Rakesh Tikait ने कहा, “यह समझौता किसानों, मजदूरों, व्यापारियों और छोटे व्यवसायियों सभी को प्रभावित करेगा। यदि अमेरिकी उत्पाद सस्ते दामों पर बाजार में आए, तो भारतीय बाजार प्रभावित होंगे। हमें इस समझौते का कड़ा विरोध करना होगा।”

हरियाणा किसान मजदूर मोर्चा का महापड़ाव

हरियाणा में 10 किसान संगठनों के बैनर तले Haryana Kisan Mazdoor Morcha ने कुरुक्षेत्र में तीन दिवसीय महापड़ाव आयोजित किया। संगठनों ने चेतावनी दी कि मांगें न माने जाने पर राज्य में बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा।

Bharatiya Kisan Union (Shaheed Bhagat Singh) के अध्यक्ष Amarjeet Singh Mohri ने कहा कि 26 मार्च को चंडीगढ़ में एक सम्मेलन आयोजित कर आगे की रणनीति तय की जाएगी।

एकता पर उठते सवाल

हालांकि, समान मुद्दों पर आंदोलन के बावजूद किसान संगठनों में एकजुटता की कमी चर्चा का विषय बनी हुई है। इस पर चरूनी ने हल्के अंदाज में कहा, “हम दुश्मन नहीं, भाई हैं। विचारधारा और कार्यशैली के कारण मतभेद हो सकते हैं। ‘हम पिटने के बाद एक साथ आते हैं।’”

वहीं राकेश टिकैत ने आरोप लगाया कि सरकारें समाज को जाति और धर्म के नाम पर बांटने की तरह किसान संगठनों को भी कमजोर करने का प्रयास करती हैं। उन्होंने कहा कि एसकेएम सभी किसान संगठनों को एकजुट करने की कोशिश करेगा, ताकि किसानों और मजदूरों की आवाज प्रभावी ढंग से उठाई जा सके।Screenshot_1570

Edited By: Karan Singh

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