यहां Indian Oil Corporation Limited (आईओसीएल) रिफाइनरी में 23 फरवरी से चल रहा मजदूरों का आंदोलन गुरुवार को फिर तेज हो गया। बुधवार शाम अधिकारियों के आश्वासन के बाद आंदोलन स्थगित कर दिया गया था और हजारों मजदूर गुरुवार सुबह काम पर लौट आए थे।
हालांकि, कुछ ही घंटों बाद श्रमिकों ने दोबारा काम बंद कर दिया और समूहों में साइट से बाहर निकलते हुए मुख्य सड़क पर धरना शुरू कर दिया। सुरक्षा कर्मियों द्वारा लौटने की अपील के बावजूद वे नहीं माने। किसी अप्रिय घटना से बचने के लिए भारी पुलिस बल, वज्र वाहन, पानी की बौछार करने वाली गाड़ियां और दंगा-रोधी दस्ते तैनात किए गए।
इस बीच जिला प्रशासन, ट्रेड यूनियन प्रतिनिधियों, श्रमिक नेताओं और रिफाइनरी प्रबंधन के बीच करीब छह घंटे तक बैठक चली, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। शाम को पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को धरना स्थल से हटा दिया।
नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त विवेक चौधरी, एसडीएम, पुलिस अधिकारियों और सीटू नेताओं—जय भगवान (राज्य महासचिव) और सुनील दत्त (राज्य सचिव)—की मौजूदगी में वार्ता हुई। अधिकारियों ने बताया कि रिफाइनरी, श्रम विभाग और ठेकेदार—तीनों पक्षों की सहमति से मजदूरों की मांगों के अनुरूप एक मसौदा तैयार किया गया और लिखित आश्वासन भी दिया गया, लेकिन मजदूर वेतन संबंधी एक प्रमुख मांग पर अड़े रहे।
अधिकारियों के अनुसार, यहां 20,000 से अधिक मजदूर कार्यरत हैं और वेतन भुगतान को लेकर असंतोष बना हुआ है। प्रशासन ने कहा कि बातचीत के जरिए फिर से समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी।
अलग से मिनी सचिवालय में उपायुक्त डॉ. वीरेंद्र कुमार दहिया की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय बैठक भी आयोजित की गई। इसमें पुलिस अधीक्षक भूपेंद्र सिंह, निदेशक (रिफाइनरी) अरविंद कुमार, कार्यकारी निदेशक एमएल देहरिया और डीईटीसी सार्थक कोहली मौजूद रहे।
उपायुक्त ने ठेकेदारों को जनवरी तक के सभी लंबित वेतन तुरंत जारी करने और फरवरी का वेतन होली से पहले देने के निर्देश दिए। साथ ही, उन्होंने भविष्य निधि (पीएफ) नियमों का पालन सुनिश्चित करने को कहा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि मजदूर के वेतन से 12 प्रतिशत पीएफ की कटौती और ठेकेदार द्वारा 13 प्रतिशत अंशदान, कुल 25 प्रतिशत राशि, विधिवत जमा की जानी चाहिए। रिकॉर्ड में सुधार कर इसकी जानकारी जिला प्रशासन को देने के भी निर्देश दिए गए।

