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Maharshi Dayanand University के शोधकर्ताओं की बड़ी खोज, मिर्गी के इलाज के लिए नई उम्मीद
पुरानी दवाओं के नए उपयोग से Epilepsy के उपचार की संभावना, अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित शोध
एमडीयू रोहतक के वैज्ञानिकों ने मौजूदा दवाओं को मिर्गी के इलाज में उपयोग करने की संभावना खोजी है, जिससे इलाज सस्ता और तेज हो सकता है।
Maharshi Dayanand University (MDU), रोहतक के बायोइन्फॉर्मेटिक्स सेंटर के शोधकर्ताओं ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर ऐसी मौजूदा दवाओं की पहचान की है, जिन्हें Epilepsy (मिर्गी) के इलाज में उपयोग किया जा सकता है। यह शोध अंतरराष्ट्रीय जर्नल Scientific Reports में प्रकाशित हुआ है।
बायोइन्फॉर्मेटिक्स सेंटर के प्रोफेसर Ajit Kumar ने बताया कि इस शोध में वैज्ञानिकों ने उन्नत बायोइन्फॉर्मेटिक्स और कम्प्यूटेशनल ड्रग डिस्कवरी तकनीकों का उपयोग किया।
नई दवाएं विकसित करने के बजाय, जो महंगा और समय लेने वाला होता है, टीम ने यह जांचा कि क्या पहले से स्वीकृत दवाओं को मिर्गी के इलाज में दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है।
कंप्यूटर आधारित स्क्रीनिंग, मॉलिक्यूलर डॉकिंग और सिमुलेशन तकनीकों की मदद से शोधकर्ताओं ने यह विश्लेषण किया कि विभिन्न दवाएं मस्तिष्क के उन महत्वपूर्ण प्रोटीनों के साथ कैसे इंटरैक्ट करती हैं, जो दौरे (seizure) से जुड़े होते हैं।
डॉ. अजीत कुमार ने बताया कि मिर्गी एक न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जो दुनिया भर में लाखों लोगों को प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि लगभग एक-तिहाई मरीजों में उपलब्ध इलाज के बावजूद दौरे नियंत्रित नहीं हो पाते, जिससे बेहतर उपचार विकल्पों की आवश्यकता स्पष्ट होती है।
इस अध्ययन में 2,500 से अधिक स्वीकृत दवाओं की जांच की गई, जिनमें से कई दवाओं ने मिर्गी से जुड़े मस्तिष्क के लक्ष्यों (targets) पर प्रभावी होने की संभावना दिखाई।
इनमें तीन दवाएं विशेष रूप से प्रभावशाली पाई गईं:
- Oxaprozin
- Pizotifen
- Cyproheptadine
इन दवाओं ने मिर्गी से जुड़े कई प्रोटीनों के साथ प्रभावी रूप से जुड़कर बेहतर परिणाम दिखाए।
