Punjab and Haryana High Court ने हरियाणा की S+4 नीति पर लगाई रोक, सार्वजनिक सुरक्षा पर जताई चिंता

राजस्व को प्राथमिकता देने पर सवाल, RWAs और सरकार के बीच बहस तेज

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पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा की स्टिल्ट+4 (S+4) फ्लोर नीति पर रोक लगाते हुए कहा कि सरकार सार्वजनिक सुरक्षा और बुनियादी ढांचे की अनदेखी कर रही है।

Punjab and Haryana High Court द्वारा हरियाणा की ‘स्टिल्ट-प्लस-4 (S+4) फ्लोर’ नीति के संचालन पर रोक लगाने के फैसले ने इस नीति का विरोध कर रहे लोगों को राहत दी है, साथ ही इसके प्रभावों को लेकर एक नई बहस भी छेड़ दी है।

अदालत ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि राज्य सरकार सार्वजनिक सुरक्षा और बुनियादी ढांचे की वास्तविकताओं को नजरअंदाज करते हुए केवल राजस्व बढ़ाने को प्राथमिकता दे रही है।


S+4 नीति क्या है?

S+4 नीति के तहत Haryana Shehri Vikas Pradhikaran (HSVP) के सेक्टरों में आवासीय प्लॉट्स पर स्टिल्ट (नीचे पार्किंग स्पेस) के ऊपर चार मंजिल तक निर्माण की अनुमति दी जाती है।

वर्तमान नियमों के अनुसार, बिना स्टिल्ट के केवल तीन मंजिल तक ही निर्माण की अनुमति है।


RWA (Resident Welfare Associations) इसका विरोध क्यों कर रहे हैं?

गुरुग्राम, फरीदाबाद, हिसार और रोहतक जैसे शहरों की RWA इस नीति का विरोध कर रही हैं। उनका कहना है कि:

  • मौजूदा बुनियादी ढांचा (पानी, सीवरेज, बिजली) अतिरिक्त भार संभालने में सक्षम नहीं है
  • इस नीति से रिहायशी क्षेत्रों में ऊंची इमारतें बढ़ रही हैं
  • पार्किंग की समस्या और ट्रैफिक जाम बढ़ रहा है
  • सूर्य की रोशनी और स्वच्छ हवा में कमी आ रही है
  • कॉलोनियों का स्वरूप और घनत्व (density) बदल रहा है

सरकारी पैनल ने क्या सुझाव दिए थे?

2023 में गठित विशेषज्ञ समिति ने S+4 निर्माण को कुछ शर्तों के साथ लागू करने की सिफारिश की थी, जैसे:

  • बुनियादी ढांचे (infrastructure) को मजबूत किया जाए
  • निर्माण से पहले इन्फ्रास्ट्रक्चर ऑडिट किया जाए
  • भवनों की ऊंचाई सीमित की जाए
  • केवल पारिवारिक आवास के लिए अनुमति दी जाए
  • स्टिल्ट पार्किंग के दुरुपयोग को रोकने के लिए क्विक रिस्पॉन्स टीम बनाई जाए
  • स्टिल्ट एरिया को बंद (enclose) करने की अनुमति न दी जाए

साथ ही, जहां पहले से ऐसे निर्माण हो चुके हैं, वहां इन्फ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने की भी सिफारिश की गई।


⚖️ हाई कोर्ट की टिप्पणी

मुख्य न्यायाधीश Sheel Nagu और न्यायमूर्ति Sanjiv Berry की पीठ ने राज्य सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि:

“ऐसा प्रतीत होता है कि हरियाणा सरकार केवल अधिक राजस्व अर्जित करने के लिए सार्वजनिक सुरक्षा और बुनियादी ढांचे की अनदेखी कर रही है।”


🔍 निष्कर्ष (Conclusion)

यह फैसला न केवल S+4 नीति पर रोक का कारण बना है, बल्कि शहरी विकास, बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक सुरक्षा के बीच संतुलन को लेकर एक महत्वपूर्ण बहस को भी जन्म देता है।Screenshot_68

Edited By: Karan Singh

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