Central Bureau of Investigation सुप्रीम कोर्ट जाएगी, Bhupinder Singh Hooda को राहत देने के हाईकोर्ट फैसले को चुनौती

पंचकूला प्लॉट मामले में SLP दायर करने की तैयारी, ED केस भी फिलहाल बंद

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सीबीआई पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने जा रही है, जिसमें भूपिंदर सिंह हुड्डा और AJL को प्लॉट पुनः आवंटन मामले में राहत दी गई थी।

Central Bureau of Investigation (CBI) पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर करने की तैयारी कर रही है, जिसमें पूर्व हरियाणा मुख्यमंत्री Bhupinder Singh Hooda और Associated Journals Limited (AJL) को विवादित प्लॉट पुनः आवंटन मामले में आरोपों से मुक्त कर दिया गया था।

यह जानकारी तब सामने आई जब Enforcement Directorate (ED) ने पंचकूला की एक अदालत को बताया कि सीबीआई, चंडीगढ़ के DIG ने जांच अधिकारी को सूचित किया है कि एजेंसी इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी।

25 फरवरी को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अपने फैसले में हुड्डा और AJL के पक्ष में निर्णय देते हुए कहा था कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से आरोपों के आवश्यक तत्व prima facie भी साबित नहीं होते। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस मामले को आगे बढ़ाना न्याय प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।

न्यायमूर्ति Tribhivan Dahiya की पीठ ने ट्रायल कोर्ट द्वारा लगाए गए आरोपों को रद्द करते हुए कार्यवाही समाप्त कर दी थी।

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि नीतियों, दिशा-निर्देशों या तथ्यों की अनदेखी में लिया गया कोई निर्णय अपने आप में आरोपी की बेईमानी साबित नहीं करता।

इस फैसले के बाद, 27 मार्च को हरियाणा की CBI विशेष अदालत ने हुड्डा और AJL के खिलाफ मामला बंद कर दिया। इसके बाद शुक्रवार को Prevention of Money Laundering Act (PMLA) के तहत चल रहे ED के मामले को भी बंद कर दिया गया।

हुड्डा के वकील SPS Parmar ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले के बाद ED का मामला टिक नहीं सकता। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के Vijay Madanlal Choudhary case का हवाला देते हुए कहा कि यदि मूल अपराध (predicate offence) में आरोपी बरी हो जाता है, तो मनी लॉन्ड्रिंग का मामला भी नहीं बनता।

हालांकि, सुनवाई के दौरान ED के वकील HPS Verma ने अदालत में सीबीआई का पत्र पेश किया, जिसमें हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने की बात कही गई थी। ED ने अदालत से मामले को लंबित रखने की मांग की, लेकिन अदालत ने इसे खारिज कर दिया।

हालांकि अदालत ने ED को यह अनुमति दी कि यदि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से मूल मामला फिर से शुरू होता है, तो वह भी अपनी कार्यवाही दोबारा शुरू कर सकती है।

ED के अनुसार, AJL को पंचकूला के सेक्टर-6 में स्थित प्लॉट 1982 की दरों पर लगभग 59.39 लाख रुपये में आवंटित किया गया था। बाद में इस संपत्ति को “बिना विवाद” (untainted) बताकर लगभग 72.57 करोड़ रुपये के ऋण प्राप्त किए गए और इनका उपयोग अन्य संपत्तियां बनाने में किया गया।

यह प्लॉट मूल रूप से हिंदी दैनिक ‘नवजीवन’ के प्रकाशन के लिए “नो प्रॉफिट, नो लॉस” आधार पर दिया गया था। लेकिन निर्धारित समय में निर्माण न होने के कारण इसे वापस ले लिया गया और 1996 तक सभी अपीलें खारिज हो गई थीं।Screenshot_60

Edited By: Karan Singh

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