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गुरुग्राम में बाढ़ की समस्या पर बड़ा खुलासा, 117 सेक्टरों में जुड़ा है जलभराव का नेटवर्क; IIT की स्टडी में सामने आया पूरा सिस्टम
IIT गांधीनगर और AIReSQ की तकनीकी रिपोर्ट में 257 सीमा-पार जल प्रवाह की पहचान, एक बारिश के दौरान शहर में 3.14 करोड़ क्यूबिक मीटर पानी पहुंचने का अनुमान
गुरुग्राम में जलभराव को लेकर नई तकनीकी स्टडी ने बताया है कि शहर में बाढ़ कुछ चुनिंदा स्थानों तक सीमित नहीं है, बल्कि 117 सेक्टर आपस में जुड़े जल निकासी नेटवर्क का हिस्सा हैं। रिपोर्ट में राजीव चौक, सुभाष चौक और शीतला माता रोड को प्राथमिकता वाले हॉटस्पॉट बताया गया है।
गुरुग्राम में हर मानसून जलभराव से जूझने की समस्या को लेकर एक नई तकनीकी स्टडी ने अहम तस्वीर सामने रखी है। रिपोर्ट के मुताबिक शहर में बाढ़ कुछ चुनिंदा चौराहों या सड़कों तक सीमित नहीं है, बल्कि अलग-अलग सेक्टर और ड्रेनेज नेटवर्क आपस में जुड़े होने के कारण एक इलाके का पानी दूसरे इलाके में भी बाढ़ की स्थिति पैदा कर सकता है।
नगर निगम गुरुग्राम (MCG) के लिए IIT गांधीनगर और AIReSQ की ओर से तैयार की गई इस स्टडी में 117 सेक्टरों के बीच पानी के प्रवाह का अध्ययन किया गया। एक डिजाइन स्टॉर्म के दौरान पानी ने 257 अलग-अलग स्थानों पर सेक्टरों की सीमाएं पार कीं।
तीन घंटे में 107.3 MM बारिश का मॉडल
स्टडी में शहरव्यापी 'FloodAstra' सिमुलेशन के आधार पर 107.3 MM बारिश को तीन घंटे की अवधि में मॉडल किया गया। इस दौरान अधिकतम बारिश की तीव्रता 73 MM प्रति घंटे तक मानी गई।रिपोर्ट के अनुसार, छह घंटे की अवधि में गुरुग्राम में कुल करीब 3.148 करोड़ क्यूबिक मीटर पानी पहुंचा। इसमें करीब 3.098 करोड़ क्यूबिक मीटर पानी सीधे बारिश से आया, जबकि लगभग 0.50 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी ऊपरी क्षेत्रों से बहकर शहर में पहुंचा।
स्टडी में सबसे बड़ा सेक्टर-टू-सेक्टर जल प्रवाह सेक्टर 1 से सेक्टर 111 की ओर दर्ज किया गया। इस मार्ग पर करीब 44,237 क्यूबिक मीटर पानी के स्थानांतरण का अनुमान लगाया गया।
125 जुड़े ड्रेनेज एरिया की पहचान
शोधकर्ताओं ने गुरुग्राम में 125 ऐसे जुड़े हुए ड्रेनेज क्षेत्रों की पहचान की है, जो वार्ड और सेक्टर की सीमाओं से आगे जाकर साझा जल निकासी कॉरिडोर में पानी पहुंचाते हैं।
एक जगह ड्रेन ठीक करने से दूसरी जगह बढ़ सकता है खतरा
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि किसी एक स्थान पर ड्रेन को केवल ठीक करने या पानी का रास्ता बदलने की कोशिश की जाती है, तो इससे समस्या पूरी तरह खत्म होने के बजाय नेटवर्क के दूसरे हिस्से में जलभराव बढ़ सकता है।
इसका मतलब है कि गुरुग्राम में बाढ़ नियंत्रण के लिए किसी एक सड़क, नाले या चौराहे को अलग-अलग देखकर समाधान निकालने के बजाय पूरे शहर के ड्रेनेज नेटवर्क को एक साथ समझना जरूरी है।
MCG ने माना- पूरे शहर को एक इकाई की तरह देखना जरूरी
MCG कमिश्नर प्रदीप दहिया ने स्टडी को शहर की बाढ़ प्रबंधन रणनीति में बदलाव की दिशा में अहम कदम बताया।
उन्होंने कहा कि MCG का लक्ष्य जलभराव के असली कारणों को दूर करना है, न कि केवल अस्थायी समाधान करना। उनके अनुसार, शहर की समस्या का समाधान पूरे गुरुग्राम को एक इकाई मानकर किया जाना चाहिए।
तीन बड़े फ्लड हॉटस्पॉट चिन्हित
स्टडी में तीन पुराने और गंभीर जलभराव वाले इलाकों को प्राथमिकता के आधार पर हस्तक्षेप के लिए चुना गया है।
- राजीव चौक
- सुभाष चौक
- शीतला माता रोड
डिजाइन स्टॉर्म के दौरान इन तीनों स्थानों पर पानी की अधिकतम मात्रा करीब 5.26 करोड़ से 10.80 करोड़ लीटर के बीच आंकी गई।
अंडरग्राउंड टैंक से पानी रोकने की योजना
रिपोर्ट में बाढ़ के पानी को तत्काल निकालने के बजाय कुछ मात्रा में रोकने के लिए भूमिगत डिटेंशन टैंकों का विकल्प सुझाया गया है।
स्टडी में परीक्षण के लिए करीब 14,000 क्यूबिक मीटर क्षमता वाले भूमिगत टैंक का उदाहरण दिया गया है। इन टैंकों में बाढ़ का पानी एकत्र करने के बाद उसे उपचार की प्रक्रिया से गुजारने का प्रस्ताव है।
चार चरणों में होगा पानी का उपचार
प्रस्तावित प्रणाली में पानी को चार चरणों से गुजारने की बात कही गई है:
- स्क्रीनिंग
- सेटलिंग
- फिल्ट्रेशन
- पानी की गुणवत्ता की जांच
उपचार के बाद पानी को दो संभावित रास्तों से छोड़ा जा सकता है। यदि डाउनस्ट्रीम ड्रेनेज सिस्टम में पर्याप्त क्षमता हो तो पानी को सतही नालों में छोड़ा जा सकता है। दूसरी स्थिति में निगरानी वाले रिचार्ज वेल के जरिए सत्यापित गहरे जलभृत (Deep Aquifer) में पानी पहुंचाने का विकल्प रखा गया है।
रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि पानी को उथले भूजल स्तर में रिचार्ज करने का विकल्प प्रस्तावित डिजाइन में शामिल नहीं किया गया है।
Key Highlights:
- गुरुग्राम के 117 सेक्टरों में जल प्रवाह का अध्ययन किया गया।
- 257 अलग-अलग सीमा-पार जल प्रवाह की पहचान हुई।
- छह घंटे में करीब 3.148 करोड़ क्यूबिक मीटर पानी पहुंचने का अनुमान।
- 125 जुड़े हुए ड्रेनेज क्षेत्रों की पहचान की गई।
- सेक्टर 1 से सेक्टर 111 तक 44,237 क्यूबिक मीटर का सबसे बड़ा सेक्टर-टू-सेक्टर प्रवाह दर्ज हुआ।
- राजीव चौक, सुभाष चौक और शीतला माता रोड को प्राथमिकता वाले फ्लड हॉटस्पॉट बनाया गया।
- भूमिगत डिटेंशन टैंक की क्षमता के लिए 14,000 क्यूबिक मीटर का उदाहरण दिया गया।
- पानी को स्क्रीनिंग, सेटलिंग, फिल्ट्रेशन और क्वालिटी चेक से गुजारने का प्रस्ताव है।
- उथले भूजल स्तर में रिचार्ज को डिजाइन से बाहर रखा गया है।
FAQ Section:
सवाल: गुरुग्राम में जलभराव को लेकर नई स्टडी ने क्या बताया?
स्टडी के अनुसार, गुरुग्राम में बाढ़ कुछ चुनिंदा स्थानों की समस्या नहीं है। शहर के कई सेक्टर और ड्रेनेज क्षेत्र आपस में जुड़े हैं, इसलिए एक इलाके में पानी का प्रवाह दूसरे इलाके में भी जलभराव को प्रभावित कर सकता है।
सवाल: स्टडी किसने तैयार की है?
यह तकनीकी स्टडी नगर निगम गुरुग्राम (MCG) के लिए IIT गांधीनगर और AIReSQ ने तैयार की है।
सवाल: स्टडी में कितने सेक्टरों को शामिल किया गया?
स्टडी में 117 सेक्टरों के बीच जल प्रवाह का अध्ययन किया गया और 257 सीमा-पार जल प्रवाह दर्ज किए गए।
सवाल: गुरुग्राम में कौन से इलाके प्रमुख फ्लड हॉटस्पॉट हैं?
राजीव चौक, सुभाष चौक और शीतला माता रोड को प्राथमिकता वाले जलभराव क्षेत्रों के रूप में चिन्हित किया गया है।
सवाल: भूमिगत डिटेंशन टैंक का क्या उद्देश्य है?
इन टैंकों का उद्देश्य भारी बारिश के दौरान अतिरिक्त पानी को अस्थायी रूप से रोकना है, ताकि ड्रेनेज सिस्टम पर अचानक दबाव न बढ़े और पानी को उपचार के बाद नियंत्रित तरीके से छोड़ा या गहरे जलभृत में रिचार्ज किया जा सके।
Conclusion:
गुरुग्राम की बाढ़ समस्या पर सामने आई यह तकनीकी स्टडी बताती है कि शहर में जलभराव का समाधान केवल एक-दो नालों या चौराहों पर काम करके नहीं निकाला जा सकता। 117 सेक्टरों और 125 जुड़े ड्रेनेज क्षेत्रों का नेटवर्क दिखाता है कि बारिश का पानी पूरे शहर में एक-दूसरे से जुड़ी व्यवस्था के जरिए आगे बढ़ता है। ऐसे में भूमिगत डिटेंशन टैंक और वैज्ञानिक जल प्रबंधन जैसी योजनाएं गुरुग्राम की लंबे समय से चली आ रही बाढ़ समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकती हैं।
