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ऑस्ट्रेलिया भेजने के नाम पर ठगे गए पंजाब के 34 युवा, तिमोर-लेस्ते में महीनों से फंसे; परिवारों ने Seechewal से मांगी मदद
नौकरी और बेहतर भविष्य का झांसा देकर एजेंटों ने कथित तौर पर परिवारों से लाखों रुपये लिए, 8 परिवारों का दावा- घर, जमीन और गहने गिरवी रखकर जुटाए करीब 3 करोड़ रुपये
ऑस्ट्रेलिया में नौकरी दिलाने के नाम पर पंजाब के 33 और राजस्थान के एक युवक को कथित तौर पर तिमोर-लेस्ते भेजे जाने का मामला सामने आया है। इनमें से 34 युवा अभी भी वहां फंसे बताए जा रहे हैं। परिवारों ने राज्यसभा सांसद संत बलबीर सिंह सीचेवाल से मदद की गुहार लगाई है।
पंजाब के युवाओं को विदेश में नौकरी और बेहतर भविष्य का सपना दिखाकर कथित तौर पर ठगी किए जाने का मामला सामने आया है। पंजाब के 33 और राजस्थान के एक युवक पिछले करीब पांच से छह महीने से दक्षिण-पूर्व एशिया के द्वीपीय देश तिमोर-लेस्ते में फंसे बताए जा रहे हैं। आरोप है कि इन युवाओं को ऑस्ट्रेलिया में रोजगार दिलाने का वादा करके विदेश भेजा गया था।
शुक्रवार को प्रभावित आठ परिवारों ने वीडियो कॉल के जरिए राज्यसभा सांसद संत बलबीर सिंह सीचेवाल से संपर्क कर अपने बच्चों की सुरक्षित भारत वापसी में मदद की अपील की। सीचेवाल इस समय इंग्लैंड में हैं। उन्होंने परिवारों की शिकायत के बाद विदेश मंत्रालय से संपर्क कर युवाओं की वापसी के प्रयास शुरू किए हैं।
ऑस्ट्रेलिया में नौकरी का वादा, लाखों रुपये लेने का आरोपसुल्तानपुर लोधी स्थित सीचेवाल के डेरे में पहुंचे आठ परिवारों ने आरोप लगाया कि एजेंटों ने उनके बच्चों को ऑस्ट्रेलिया में नौकरी दिलाने और बेहतर भविष्य का भरोसा दिया था। इसके बदले प्रत्येक परिवार से कथित तौर पर 5 लाख रुपये से लेकर 11 लाख रुपये तक लिए गए।
आठ परिवारों के मुताबिक, उन्होंने बच्चों को विदेश भेजने के लिए करीब 3 करोड़ रुपये की रकम जुटाई। इसके लिए कई परिवारों ने अपने घर और जमीन गिरवी रखे, गहने बेचे या गिरवी रखे और कर्ज तक लिया।
बाली और मलेशिया के रास्ते पहुंचाया गया तिमोर-लेस्ते
परिवारों के अनुसार, युवाओं को भारत के अलग-अलग एयरपोर्ट से विदेश भेजा गया। दो से छह दिन तक चली यात्राओं के बाद उन्हें बाली और मलेशिया के रास्ते तिमोर-लेस्ते पहुंचाया गया।
आरोप है कि विदेश पहुंचने के बाद एजेंटों ने युवाओं को बाघा पुराना के एक गांव निवासी विजय नामक व्यक्ति के हवाले कर दिया। परिवारों का दावा है कि युवाओं को सौंपे जाने के बाद उनके पासपोर्ट भी कथित तौर पर अपने कब्जे में ले लिए गए।
युवाओं को बंधक बनाकर रखने का आरोप
पीड़ित परिवारों ने आरोप लगाया कि तिमोर-लेस्ते पहुंचने के बाद युवाओं को कथित तौर पर बंधक बनाकर रखा गया। उन्होंने धमकाने और डराने के अलावा अपनी इच्छा के विरुद्ध काम कराने के भी आरोप लगाए।
परिवारों के मुताबिक, युवाओं से काम तो कराया गया, लेकिन उनकी मजदूरी कथित तौर पर रोक ली गई। उन्हें पर्याप्त भोजन नहीं दिए जाने का आरोप भी लगाया गया है।
सामूहिक विरोध के बाद लौटाए गए पासपोर्ट
परिवारों ने बताया कि जब सभी युवाओं ने मिलकर विरोध किया तो उनके पासपोर्ट वापस किए गए। इसके बाद स्थानीय पुलिस ने विजय नामक व्यक्ति को हिरासत में लिया, ऐसी जानकारी भी सामने आई है।
हालांकि, मामले में स्थानीय स्तर पर हुई कार्रवाई और युवाओं की वर्तमान स्थिति को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी अभी सामने आना बाकी है।
10 युवा अपने खर्च पर लौटे भारत
परिवारों के अनुसार, अब तक करीब 10 युवा अपने प्रयासों और निजी खर्च पर भारत लौटने में सफल हुए हैं। वहीं, 34 युवा अभी भी तिमोर-लेस्ते में फंसे बताए जा रहे हैं।
इनमें मोगा के आठ, जालंधर के सात, फिरोजपुर के छह, लुधियाना के पांच और फाजिल्का के दो युवा शामिल हैं। इसके अलावा तरनतारन, कपूरथला, पटियाला और जलालाबाद से एक-एक युवा बताए गए हैं। एक युवक राजस्थान का रहने वाला है।
वीडियो जारी कर Seechewal से मांगी मदद
मामला तब सामने आया जब तिमोर-लेस्ते में फंसे युवाओं ने एक वीडियो जारी किया। वीडियो के माध्यम से उन्होंने राज्यसभा सांसद और पद्मश्री से सम्मानित संत बलबीर सिंह सीचेवाल से भारत सुरक्षित लौटने के लिए मदद की अपील की।
इसके बाद प्रभावित परिवार भी सीचेवाल के संपर्क में पहुंचे। परिवारों की अपील के बाद सीचेवाल ने विदेश मंत्रालय से संपर्क कर फंसे हुए युवाओं की सुरक्षित वापसी के लिए प्रयास शुरू किए हैं।
Key Highlights:
- पंजाब के 33 और राजस्थान का एक युवक तिमोर-लेस्ते में फंसे बताए जा रहे हैं।
- युवाओं को ऑस्ट्रेलिया में नौकरी दिलाने का कथित वादा किया गया था।
- आठ परिवारों का दावा है कि उनसे 5 से 11 लाख रुपये तक लिए गए।
- इन आठ परिवारों ने करीब 3 करोड़ रुपये जुटाए।
- परिवारों ने घर, जमीन और गहने गिरवी रखकर तथा कर्ज लेकर रकम जुटाने की बात कही।
- युवाओं को बाली और मलेशिया के रास्ते तिमोर-लेस्ते ले जाने का आरोप है।
- पासपोर्ट कथित तौर पर अपने कब्जे में लेने और युवाओं को बंधक बनाकर रखने के आरोप लगाए गए।
- करीब 10 युवा अपने खर्च पर भारत लौट चुके हैं।
- 34 युवा अब भी तिमोर-लेस्ते में फंसे बताए जा रहे हैं।
- संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने विदेश मंत्रालय से संपर्क कर मदद के प्रयास शुरू किए हैं।
FAQ Section:
सवाल: तिमोर-लेस्ते में कितने युवा फंसे हुए हैं?
परिवारों के अनुसार, पंजाब के 33 और राजस्थान का एक युवक समेत कुल 34 युवा अभी तिमोर-लेस्ते में फंसे बताए जा रहे हैं।
सवाल: युवाओं को तिमोर-लेस्ते क्यों भेजा गया था?
परिवारों का आरोप है कि उन्हें ऑस्ट्रेलिया में नौकरी और बेहतर भविष्य का वादा करके विदेश भेजा गया था।
सवाल: एजेंटों ने कितने रुपये लिए?
आठ प्रभावित परिवारों के अनुसार, प्रत्येक परिवार से करीब 5 लाख से 11 लाख रुपये तक लिए गए। इन आठ परिवारों ने कुल करीब 3 करोड़ रुपये देने का दावा किया है।
सवाल: युवाओं को किस रास्ते से तिमोर-लेस्ते पहुंचाया गया?
परिवारों के अनुसार, युवाओं को भारत के अलग-अलग एयरपोर्ट से रवाना करने के बाद बाली और मलेशिया के रास्ते तिमोर-लेस्ते ले जाया गया।
सवाल: युवाओं की वापसी के लिए कौन मदद कर रहा है?
राज्यसभा सांसद संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने परिवारों से संपर्क के बाद विदेश मंत्रालय से बात की है और युवाओं की सुरक्षित भारत वापसी के प्रयास शुरू किए हैं।
सवाल: क्या सभी युवा अभी भी तिमोर-लेस्ते में हैं?
नहीं। परिवारों के अनुसार, करीब 10 युवा अपने प्रयासों और खर्च पर भारत लौट चुके हैं, जबकि 34 युवा अभी भी वहां फंसे हुए हैं।
Conclusion:
ऑस्ट्रेलिया में नौकरी दिलाने के नाम पर पंजाब और राजस्थान के युवाओं को कथित तौर पर तिमोर-लेस्ते भेजे जाने का मामला गंभीर सवाल खड़े करता है। परिवारों का आरोप है कि उन्होंने लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद अपने बच्चों को मुश्किल हालात में फंसा पाया। अब संत बलबीर सिंह सीचेवाल द्वारा विदेश मंत्रालय से संपर्क किए जाने के बाद परिवारों को युवाओं की सुरक्षित भारत वापसी की उम्मीद है। मामले में एजेंटों और विदेश में युवाओं को कथित तौर पर रखने वाले लोगों की भूमिका की जांच भी अहम होगी।
