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MSME सेक्टर की चुनौतियों पर DBRANLU में मंथन, IIT दिल्ली के विशेषज्ञों ने साझा किए विचार
डॉ. बीआर आंबेडकर नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी और IIT दिल्ली के अटल इनक्यूबेशन सेंटर के सहयोग से राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस आयोजित; श्रम कानून, सामाजिक सुरक्षा और कारोबार में आसानी जैसे मुद्दों पर हुई चर्चा।
डॉ. बीआर आंबेडकर नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (DBRANLU) में MSME सेक्टर से जुड़ी चुनौतियों पर विशेषज्ञों ने विचार-विमर्श किया। सम्मेलन में शिक्षा जगत, उद्योग और नीति क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों ने छोटे कारोबारों के सामने आने वाली समस्याओं और संभावित समाधानों पर चर्चा की।
MSME सेक्टर की चुनौतियों पर आयोजित हुई राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस
डॉ. बीआर आंबेडकर नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (DBRANLU) के सेंटर फॉर लेबर स्टडीज ने IIT दिल्ली के अटल इनक्यूबेशन सेंटर के सहयोग से MSME सेक्टर को लेकर एक विशेष राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस आयोजित की।
इस सम्मेलन का विषय ‘MSMEs and Emerging Challenges: Labour Laws, Social Protection and Ease of Doing Business’ रखा गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के सामने उभर रही चुनौतियों पर चर्चा के लिए शिक्षाविदों, उद्योग विशेषज्ञों और नीति क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों को एक साझा मंच उपलब्ध कराना था।
कुलपति देविंदर सिंह की अध्यक्षता में हुआ आयोजन
सम्मेलन का आयोजन यूनिवर्सिटी के कुलपति देविंदर सिंह की अध्यक्षता में किया गया।
कार्यक्रम में XLRI दिल्ली-NCR के चीफ-स्ट्रेटेजी एंड HR हरभजन सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। वहीं, IIT दिल्ली के अटल इनक्यूबेशन सेंटर से आलोक पांडे और राय इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश छाबड़ा विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे।
श्रम कानून और सामाजिक सुरक्षा पर विशेषज्ञों ने रखे विचार
कॉन्फ्रेंस में MSME सेक्टर से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए।
इस दौरान MSME टर्नअराउंड कोच और बिजनेस कंसल्टेंट रजनीश शर्मा, IIT दिल्ली के फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (FITT) के सीनियर मैनेजर नीलाभ पाठक और okDriver Smart Dashcams Private Limited के संस्थापक तुषित गुप्ता ने भी विशेषज्ञ के तौर पर योगदान दिया।
चर्चा के प्रमुख विषयों में श्रम कानूनों का अनुपालन, कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा और कारोबार शुरू करने व संचालित करने की प्रक्रिया को आसान बनाना शामिल रहा।
छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए साझा मंच का प्रयास
सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य MSME क्षेत्र से जुड़े विभिन्न पक्षों के बीच संवाद को बढ़ावा देना था। इस क्षेत्र में कारोबार करने वाले उद्यमियों को श्रम कानूनों के अनुपालन, कर्मचारियों की सुरक्षा और व्यावसायिक प्रक्रियाओं से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
विशेषज्ञों के अनुभव और विचारों के माध्यम से इन मुद्दों को समझने तथा व्यावहारिक समाधान तलाशने पर जोर दिया गया।
आयोजन में बलविंदर कौर और डॉ. मणि यादव की अहम भूमिका
कॉन्फ्रेंस के आयोजन में सेंटर फॉर लेबर स्टडीज की निदेशक एवं आयोजन सचिव तथा एसोसिएट प्रोफेसर बलविंदर कौर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनके साथ असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मणि यादव ने भी कार्यक्रम के आयोजन में योगदान दिया।
मुख्य बातें
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DBRANLU में MSME सेक्टर की चुनौतियों पर राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस आयोजित हुई।
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कार्यक्रम का आयोजन IIT दिल्ली के अटल इनक्यूबेशन सेंटर के सहयोग से किया गया।
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कुलपति देविंदर सिंह ने सम्मेलन की अध्यक्षता की।
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श्रम कानून, सामाजिक सुरक्षा और Ease of Doing Business पर चर्चा हुई।
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XLRI, IIT दिल्ली और उद्योग जगत से जुड़े विशेषज्ञ शामिल हुए।
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बलविंदर कौर और डॉ. मणि यादव ने आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. MSME कॉन्फ्रेंस का आयोजन कहां हुआ?
यह सम्मेलन डॉ. बीआर आंबेडकर नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (DBRANLU) में आयोजित किया गया।
2. कॉन्फ्रेंस का आयोजन किन संस्थानों ने किया?
इसका आयोजन यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर लेबर स्टडीज ने IIT दिल्ली के अटल इनक्यूबेशन सेंटर के सहयोग से किया।
3. सम्मेलन में किन विषयों पर चर्चा हुई?
श्रम कानून, सामाजिक सुरक्षा और कारोबार करने में आसानी यानी Ease of Doing Business जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
4. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कौन थे?
XLRI दिल्ली-NCR के चीफ-स्ट्रेटेजी एंड HR हरभजन सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
5. MSME का पूरा नाम क्या है?
MSME का पूरा नाम Micro, Small and Medium Enterprises है, जिसे हिंदी में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम कहा जाता है।
निष्कर्ष
DBRANLU में आयोजित इस राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस ने MSME सेक्टर से जुड़े श्रम कानूनों, सामाजिक सुरक्षा और कारोबारी प्रक्रियाओं पर चर्चा के लिए विशेषज्ञों को एक मंच दिया। शिक्षा जगत, उद्योग और नीति क्षेत्र के प्रतिनिधियों की भागीदारी से छोटे और मध्यम उद्यमों की चुनौतियों को समझने तथा व्यावहारिक समाधान तलाशने की दिशा में संवाद को बढ़ावा मिला।
