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कचरे से जंग जीतने के बाद अब नशा तस्करों से भिड़ा पंजाब का युवा सरपंच, पाकिस्तान से मिल रही धमकियां
अटारी के सरपंच हरप्रीत सिंह ने गांव के बच्चों को खेलों से जोड़कर नशे से दूर रखने की मुहिम शुरू की। अब कथित नशा तस्करों के निशाने पर हैं हरप्रीत, ड्रोन और हेरोइन तस्करी के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों की भी कर रहे मदद।
पंजाब के सीमावर्ती गांव अटारी के युवा सरपंच हरप्रीत सिंह नशे के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं। गांव में सफाई अभियान और बच्चों के लिए खेल गतिविधियां शुरू करने के बाद उन्होंने नशा तस्करी के खिलाफ आवाज उठाई। उनका दावा है कि इस मुहिम के कारण उन्हें पाकिस्तान से जुड़े विदेशी नंबरों से धमकियां मिल रही हैं। वह सुरक्षा एजेंसियों को नशे और ड्रोन तस्करी से जुड़े मामलों में सहयोग भी दे चुके हैं।
पंजाब के सीमावर्ती इलाकों में नशे की समस्या लंबे समय से चिंता का विषय बनी हुई है। युवाओं को नशे से बचाने और गांवों में बेहतर माहौल तैयार करने के लिए कुछ लोग अपने स्तर पर प्रयास कर रहे हैं। ऐसी ही एक कहानी अटारी के युवा सरपंच हरप्रीत सिंह की है, जिन्होंने पहले गांव को साफ-सुथरा बनाने की मुहिम चलाई और फिर बच्चों को खेलों से जोड़ने का अभियान शुरू किया। अब उनका मुख्य संघर्ष नशे के कारोबार और कथित तस्करी नेटवर्क के खिलाफ है।
हरप्रीत सिंह का मानना है कि यदि गांव के बच्चों और युवाओं को खेल मैदानों में व्यस्त रखा जाए तो उन्हें नशे जैसी बुराइयों से दूर रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि, नशे के खिलाफ उनकी आवाज उठाने की कोशिशों के दौरान उन्हें कथित तौर पर धमकियों, हमलों और राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा है।
कुवैत से लौटकर गांव की सेवा में जुटे हरप्रीत सिंह
हरप्रीत सिंह स्थानीय हॉकी खिलाड़ी और खेलों के प्रति विशेष रुचि रखने वाले युवा हैं। वह पांच साल तक कुवैत में रहने के बाद 2024 में भारत लौटे थे।
वापस आने के बाद उन्होंने अपने गांव के बच्चों और युवाओं को खेलों का प्रशिक्षण देना शुरू किया। खासतौर पर हॉकी और फुटबॉल के माध्यम से युवाओं को सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ने की कोशिश की।
उनका उद्देश्य केवल खेलों को बढ़ावा देना नहीं था, बल्कि युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए एक बेहतर विकल्प उपलब्ध कराना भी था।
अक्टूबर 2024 में बने निर्दलीय सरपंच
अक्टूबर 2024 में हरप्रीत सिंह निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतकर गांव के सरपंच बने। सरपंच बनने के बाद गांव में बढ़ती नशे की समस्या उनकी सबसे बड़ी चिंता बन गई।
उन्होंने नशे के कारण प्रभावित परिवारों की स्थिति को सार्वजनिक रूप से उठाना शुरू किया। इसी दौरान एक परिवार का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें कथित तौर पर परिवार के कई युवा सदस्यों के नशे की वजह से जान गंवाने की बात सामने आई थी।
इस घटना को लेकर हरप्रीत सिंह ने सरकार के नशा विरोधी अभियान और सीमावर्ती गांवों में नशीले पदार्थों की उपलब्धता पर सवाल उठाए।
पाकिस्तान से जुड़े नंबरों से धमकी मिलने का दावा
हरप्रीत सिंह का आरोप है कि नशे और ड्रोन के खिलाफ आवाज उठाने के कारण उन्हें विदेशों से धमकियां मिल रही हैं।
उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान से जुड़े बताए जा रहे विदेशी फोन नंबरों से उन्हें नियमित रूप से कॉल आती हैं। इन कॉल के माध्यम से कथित तौर पर उन्हें नशे और ड्रोन से जुड़े मामलों पर बोलने से रोकने की कोशिश की जाती है।
हरप्रीत सिंह ने अपने दावों के समर्थन में कुछ ऑडियो रिकॉर्डिंग भी साझा की हैं।
हालांकि, इन कॉल की वास्तविक उत्पत्ति और धमकियों के पीछे मौजूद लोगों की पहचान की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
STF, NCB और BSF के साथ मिलकर तस्करी के खिलाफ किया काम
हरप्रीत सिंह ने नशा तस्करी के खिलाफ कार्रवाई में सुरक्षा और जांच एजेंसियों की मदद करने का भी दावा किया है।
उनके मुताबिक, उन्होंने स्पेशल टास्क फोर्स (STF), नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) और सीमा सुरक्षा बल (BSF) को कई अभियानों में सहयोग दिया।
इन अभियानों के दौरान बड़ी मात्रा में हेरोइन बरामद होने की बात सामने आई। इसके अलावा, उन्होंने सुरक्षा कर्मियों को पाकिस्तान की ओर से कथित तौर पर नशीले पदार्थ लेकर आ रहे एक ड्रोन को रोकने में भी मदद की।
सीमावर्ती इलाकों में ड्रोन के माध्यम से नशीले पदार्थों और हथियारों की तस्करी सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक गंभीर चुनौती बनी हुई है।
सरपंच पद से निलंबन और जानलेवा हमलों का भी दावा
नशे के खिलाफ अपनी मुहिम को लेकर हरप्रीत सिंह को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा है।
रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें कथित तौर पर आर्थिक लालच देने की कोशिश की गई। इसके अलावा धमकियों, सरपंच पद से निलंबन और जानलेवा हमलों जैसी घटनाओं का भी सामना करना पड़ा।
इसके बावजूद उन्होंने गांव के युवाओं को खेलों से जोड़ने और नशे के खिलाफ अपनी आवाज जारी रखने की बात कही है।
पंजाब के सीमावर्ती गांवों में नशे के खिलाफ बड़ी चुनौती
पंजाब के सीमावर्ती गांवों में नशे की समस्या केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका असर युवाओं, परिवारों और सामाजिक जीवन पर भी पड़ता है।
हरप्रीत सिंह की पहल इस बात को सामने लाती है कि नशे के खिलाफ लड़ाई में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के साथ-साथ स्थानीय समुदाय, पंचायतों, खेल संगठनों और परिवारों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।
Key Highlights
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अटारी के युवा सरपंच हरप्रीत सिंह नशे के खिलाफ मुहिम चला रहे हैं।
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पांच साल कुवैत में रहने के बाद 2024 में भारत लौटे।
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बच्चों को हॉकी और फुटबॉल का प्रशिक्षण देना शुरू किया।
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अक्टूबर 2024 में निर्दलीय सरपंच चुने गए।
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नशे से प्रभावित परिवार का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।
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पाकिस्तान से जुड़े विदेशी नंबरों से धमकियां मिलने का दावा।
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STF, NCB और BSF को नशा तस्करी विरोधी अभियानों में सहयोग देने की बात कही।
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कथित ड्रोन के जरिए नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने में मदद की।
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धमकियों, निलंबन और जानलेवा हमलों का सामना करने का दावा।
FAQ Section
Q1. हरप्रीत सिंह कौन हैं?
हरप्रीत सिंह पंजाब के सीमावर्ती गांव अटारी के युवा सरपंच और स्थानीय हॉकी खिलाड़ी हैं।
Q2. हरप्रीत सिंह कब सरपंच बने थे?
वह अक्टूबर 2024 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में सरपंच चुने गए थे।
Q3. हरप्रीत सिंह ने नशे के खिलाफ क्या अभियान शुरू किया?
उन्होंने गांव के बच्चों और युवाओं को हॉकी, फुटबॉल और अन्य खेल गतिविधियों से जोड़ने की पहल की।
Q4. हरप्रीत सिंह को किस तरह की धमकियां मिलने का दावा है?
उनका दावा है कि पाकिस्तान से जुड़े बताए जा रहे विदेशी नंबरों से उन्हें नशे और ड्रोन तस्करी के खिलाफ आवाज नहीं उठाने की धमकी दी जाती है।
Q5. हरप्रीत सिंह ने किन सुरक्षा एजेंसियों की मदद की?
उनके मुताबिक, उन्होंने स्पेशल टास्क फोर्स (STF), नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) और सीमा सुरक्षा बल (BSF) की मदद की।
Q6. हरप्रीत सिंह का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उनका उद्देश्य गांव के युवाओं को नशे से दूर रखना, खेलों को बढ़ावा देना और सीमावर्ती इलाकों में नशा तस्करी के खिलाफ जागरूकता बढ़ाना है।
Conclusion
अटारी के युवा सरपंच हरप्रीत सिंह की कहानी गांव के विकास से शुरू होकर नशे के खिलाफ संघर्ष तक पहुंच गई है। बच्चों को खेलों से जोड़ने और नशा तस्करी के खिलाफ आवाज उठाने की उनकी पहल सीमावर्ती पंजाब के सामने मौजूद चुनौतियों को उजागर करती है। हालांकि, धमकियों और तस्करी नेटवर्क से जुड़े उनके दावों की जांच जरूरी है, लेकिन यह स्पष्ट है कि नशे के खिलाफ लड़ाई में स्थानीय लोगों की भागीदारी बेहद अहम हो सकती है।
