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मोहाली के कलकट भवन को लेकर पंजाब सरकार में खींचतान! कृषि मंत्री ने उद्योग विभाग को पूरी इमारत देने पर जताई आपत्ति
कैबिनेट के फैसले के तीन महीने बाद कृषि विभाग ने उठाए सवाल, किसान संगठनों की आपत्तियों का दिया हवाला। अब उद्योग विभाग को पूरी बिल्डिंग की जगह केवल एक फ्लोर देने का प्रस्ताव।
मोहाली के एयरपोर्ट रोड स्थित कलकट भवन को लेकर पंजाब सरकार के दो विभागों के बीच मतभेद सामने आए हैं। जुलाई में कैबिनेट ने इस भवन को उद्योग विभाग को सौंपकर इनोवेशन और स्टार्टअप सेंटर बनाने की मंजूरी दी थी। लेकिन अब कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने किसान संगठनों की आपत्तियों का हवाला देते हुए पूरी इमारत सौंपने पर असहमति जताई है।
पंजाब के मोहाली में स्थित कलकट भवन को लेकर राज्य सरकार के भीतर नया विवाद सामने आया है। किसानों और कृषि क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण संस्थानों के लिए बनाए गए इस भवन को उद्योग विभाग के हवाले करने के कैबिनेट के फैसले पर अब कृषि विभाग ने आपत्ति जताई है।
कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने किसान संगठनों की ओर से उठाई गई चिंताओं का हवाला देते हुए पूरी इमारत उद्योग विभाग को सौंपने पर अलग राय रखी है। इसके बजाय कृषि विभाग ने उद्योग विभाग को भवन का केवल एक फ्लोर देने का प्रस्ताव रखा है।
यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है, जब पंजाब कैबिनेट ने करीब तीन महीने पहले ही कलकट भवन को उद्योग विभाग को ट्रांसफर करने की मंजूरी दी थी।
क्या है पूरा कलकट भवन विवाद?
मोहाली के एयरपोर्ट रोड पर स्थित कलकट भवन का नाम प्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक जीएस कलकट के नाम पर रखा गया है। यह इमारत वर्ष 2016 में बनाई गई थी।
इस भवन को बनाने का उद्देश्य किसानों, कृषि विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना था। इसके माध्यम से किसानों तक आधुनिक खेती की तकनीक, नई कृषि पद्धतियों और तकनीकी जानकारी पहुंचाने की योजना थी।
वर्तमान में इस भवन में पंजाब स्टेट फार्मर्स एंड फार्म वर्कर्स कमीशन और पंजाब बायोटेक्नोलॉजी पार्क के कार्यालय भी मौजूद हैं।
21 जुलाई को कैबिनेट ने लिया था भवन ट्रांसफर करने का फैसला
पंजाब कैबिनेट की 21 जुलाई को हुई बैठक में कलकट भवन को कृषि विभाग से उद्योग विभाग को ट्रांसफर करने की मंजूरी दी गई थी।
इस फैसले के तहत यहां इंटीग्रेटेड इनोवेशन एंड स्टार्टअप सेंटर स्थापित करने की योजना बनाई गई थी।
सरकार का तर्क था कि भवन का पूरी क्षमता के अनुसार इस्तेमाल नहीं हो रहा है। इसलिए इसकी जमीन, इमारत और परिसर में मौजूद संपत्तियों का उपयोग स्टार्टअप और इनोवेशन प्रोजेक्ट के लिए किया जाना चाहिए।
कैबिनेट के फैसले में भवन में पहले से काम कर रहे विभागों को दूसरी उपयुक्त जगह पर स्थानांतरित करने की बात भी शामिल थी।
हालांकि, इस निर्णय के बाद किसान संगठनों ने विरोध जताया और भवन के मूल उद्देश्य को लेकर सवाल उठाए।
किसान संगठनों की आपत्तियों के बाद बदला कृषि मंत्री का रुख
मामले को आगे बढ़ाने के लिए अधिकारियों की 12 सदस्यीय समिति बनाई गई थी। इस समिति का काम कलकट भवन के संचालन, प्रबंधन और गतिविधियों को सुचारू रूप से जारी रखने की व्यवस्था करना था।
22 अक्टूबर को समिति की दूसरी बैठक आयोजित हुई। इसकी अध्यक्षता उद्योग मंत्री अमन अरोड़ा और कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने की।
बैठक के दौरान खुड्डियां ने भवन के लिए जमीन आवंटित किए जाने की शर्तों और किसान संगठनों की आपत्तियों का उल्लेख किया।
रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कैबिनेट की मंजूरी के बाद प्रस्तावित हस्तांतरण को लेकर अपनी राय में बदलाव का संकेत दिया।
अब कृषि विभाग का प्रस्ताव है कि पूरी इमारत ट्रांसफर करने के बजाय उद्योग विभाग को केवल एक फ्लोर उपलब्ध कराया जाए।
जमीन आवंटन की शर्तों को लेकर भी उठे सवाल
द ट्रिब्यून को उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, कलकट भवन के लिए जमीन ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMADA) ने 16 मार्च 2016 को कृषि एवं किसान कल्याण विभाग को आवंटित की थी।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने जमीन आवंटन पत्र की शर्तों का हवाला देते हुए कहा कि इस जमीन को बेचने, उपहार में देने, गिरवी रखने या किसी अन्य तरीके से इसके अधिकार, स्वामित्व अथवा हितों को ट्रांसफर करने की अनुमति नहीं थी।
आवंटन पत्र में स्पष्ट रूप से जमीन को ट्रांसफर करने के अधिकार पर प्रतिबंध का उल्लेख किया गया था।
इसी शर्त को कृषि विभाग अपनी आपत्ति के समर्थन में महत्वपूर्ण आधार के रूप में पेश कर रहा है।
अब क्या होगा कलकट भवन का भविष्य?
22 अक्टूबर की बैठक में भवन की संपत्तियों की सूची तैयार करने, तकनीकी ड्रॉइंग, औपचारिक हैंडओवर और पंजाब स्मॉल इंडस्ट्रीज एंड एक्सपोर्ट कॉरपोरेशन लिमिटेड को नोडल एजेंसी नियुक्त करने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होनी थी।
लेकिन कृषि विभाग की नई आपत्ति के बाद अब भवन के भविष्य को लेकर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
एक तरफ उद्योग विभाग यहां आधुनिक इनोवेशन और स्टार्टअप सेंटर स्थापित करना चाहता है, वहीं कृषि विभाग और किसान संगठनों की ओर से भवन के मूल कृषि उद्देश्य को बनाए रखने की मांग सामने आई है।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार कैबिनेट के पुराने फैसले को लागू करेगी या कृषि विभाग के नए प्रस्ताव पर विचार करेगी।
Key Highlights
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मोहाली के कलकट भवन को लेकर पंजाब सरकार के विभागों में मतभेद।
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कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने पूरी इमारत ट्रांसफर करने पर जताई आपत्ति।
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उद्योग विभाग को केवल एक फ्लोर देने का प्रस्ताव।
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21 जुलाई को पंजाब कैबिनेट ने भवन ट्रांसफर करने की मंजूरी दी थी।
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यहां इंटीग्रेटेड इनोवेशन एंड स्टार्टअप सेंटर बनाने की योजना।
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किसान संगठनों ने भवन ट्रांसफर करने के फैसले पर विरोध जताया।
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22 अक्टूबर को मंत्रियों और अधिकारियों की समिति की बैठक हुई।
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GMADA ने 16 मार्च 2016 को कृषि विभाग को जमीन आवंटित की थी।
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जमीन आवंटन की शर्तों को लेकर कृषि विभाग ने कानूनी और प्रशासनिक सवाल उठाए।
FAQ Section
Q1. कलकट भवन कहां स्थित है?
कलकट भवन पंजाब के मोहाली में एयरपोर्ट रोड पर स्थित है।
Q2. कलकट भवन का नाम किसके नाम पर रखा गया है?
इसका नाम प्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक जीएस कलकट के नाम पर रखा गया है।
Q3. पंजाब सरकार कलकट भवन में क्या बनाना चाहती है?
पंजाब कैबिनेट ने यहां इंटीग्रेटेड इनोवेशन एंड स्टार्टअप सेंटर स्थापित करने की मंजूरी दी थी।
Q4. कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने क्या आपत्ति जताई है?
उन्होंने किसान संगठनों की चिंताओं और जमीन आवंटन की शर्तों का हवाला देते हुए पूरी इमारत उद्योग विभाग को सौंपने पर आपत्ति जताई है।
Q5. कृषि विभाग ने उद्योग विभाग को क्या प्रस्ताव दिया है?
कृषि विभाग ने पूरी इमारत ट्रांसफर करने के बजाय केवल एक फ्लोर देने का प्रस्ताव रखा है।
Q6. कलकट भवन में वर्तमान में कौन से संस्थान मौजूद हैं?
यहां पंजाब स्टेट फार्मर्स एंड फार्म वर्कर्स कमीशन और पंजाब बायोटेक्नोलॉजी पार्क के कार्यालय भी स्थित हैं।
Conclusion
मोहाली के कलकट भवन को लेकर पंजाब सरकार के भीतर सामने आया विवाद अब किसान संगठनों, कृषि विभाग और उद्योग विभाग के बीच महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है। एक तरफ सरकार यहां स्टार्टअप और इनोवेशन सेंटर स्थापित करना चाहती है, तो दूसरी तरफ कृषि विभाग भवन के मूल उद्देश्य और जमीन आवंटन की शर्तों का हवाला दे रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि पंजाब सरकार इस मामले में क्या अंतिम फैसला लेती है।

