सीएम नायब सैनी ने वोट चोरी के आरोप खारिज किए, विपक्ष पर साधा निशाना

राज्यसभा चुनाव पर बोले—न वोट चोरी हुई, न ईवीएम में गड़बड़ी; कांग्रेस के आरोप बेबुनियाद

On

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राज्यसभा चुनाव में वोट चोरी और ईवीएम गड़बड़ी के आरोपों को खारिज करते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला बोला।

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मंगलवार को हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव में वोट चोरी के कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि न तो कोई वोट चोरी हुआ है और न ही इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) में कोई गड़बड़ी हुई है।

यह विवाद कांग्रेस के पांच विधायकों द्वारा क्रॉस-वोटिंग और चार वोटों के अमान्य घोषित होने के बाद सामने आया है।

चुनाव परिणाम का बचाव करते हुए सैनी ने कहा कि भाजपा ने अपने उम्मीदवार संजय भाटिया की जीत सुनिश्चित की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को चुनाव लड़ने का अधिकार है और सतीश नांदल जैसे निर्दलीय उम्मीदवार का समर्थन करना भी पूरी तरह लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है।

कांग्रेस विधायक रघुवीर कादियान द्वारा चुनाव प्रक्रिया को संदिग्ध बताते हुए वोट चोरी के आरोप लगाने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए मुख्यमंत्री ने इन दावों को “पूरी तरह निराधार और दुर्भाग्यपूर्ण” बताया। विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा,

“जो खुद का ध्यान नहीं रख सकते, वे घर का ध्यान कैसे रखेंगे?”

सैनी ने ये टिप्पणियां विधानसभा में बजट पर चल रही चर्चा के दौरान दीं। इससे पहले कांग्रेस विधायकों ने वॉकआउट किया, क्योंकि स्पीकर ने उन्हें राज्यसभा चुनाव पर बोलने की अनुमति नहीं दी थी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सैनी ने कहा कि विपक्ष “पहले आरोप लगाता है और फिर जवाब मिलने पर भाग जाता है।”
उन्होंने कहा, “वे केवल उपस्थिति दर्ज कराने आते हैं और फिर चले जाते हैं। यह गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार है।”

बजट प्रावधानों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि 2026-27 के बजट में सतलुज-यमुना लिंक (SYL) नहर के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जबकि उनके अनुसार कांग्रेस सरकार के बजट में इस परियोजना का कोई उल्लेख नहीं था।

हरियाणा टेलीकॉम लिमिटेड (HTL) भूमि मामले में कांग्रेस के मुख्य सचेतक बीबी बत्रा द्वारा उठाए गए आरोपों पर सैनी ने कहा कि राज्य सरकार पहले ही सुप्रीम कोर्ट में अपील कर चुकी है, जिसे अप्रैल 2025 में खारिज कर दिया गया था। उन्होंने कहा, “इसके बाद वर्तमान सरकार के पास ज्यादा विकल्प नहीं हैं, क्योंकि यह समस्या कांग्रेस शासन के दौरान उत्पन्न हुई थी।”

उन्होंने बताया कि सितंबर 2025 में महाधिवक्ता की कानूनी सलाह के बाद विभाग ने 18.56 करोड़ रुपये का डिमांड ड्राफ्ट स्वीकार किया और सफल बोलीदाता को अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किया।

राज्य के बढ़ते कर्ज के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने विपक्ष की श्वेत पत्र की मांग को भी खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि कर्ज से जुड़े आंकड़े पहले से ही कैग (CAG), भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और राज्य के बजट दस्तावेजों में सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं, इसलिए अलग से श्वेत पत्र जारी करने की जरूरत नहीं है।

उन्होंने यह भी बताया कि 2014-15 में कांग्रेस शासन के दौरान हरियाणा का कर्ज 96,875 करोड़ रुपये था, जो राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) का 22.16 प्रतिशत था, जो वित्त आयोग की उधारी सीमा के करीब था।Screenshot_2107

Edited By: Karan Singh

खबरें और भी हैं

क्रॉस-वोटिंग के बावजूद कांग्रेस उम्मीदवार करमवीर बौद्ध की जीत

नवीनतम

Copyright (c) Undekhi Khabar All Rights Reserved.
Powered By Vedanta Software