जिले के स्कूलों में 21 नई अटल टिंकरिंग लैब स्थापित करेगा नीति आयोग

STEM शिक्षा को बढ़ावा, छात्रों में नवाचार और वैज्ञानिक सोच विकसित करने की पहल

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नीति आयोग जिले के विभिन्न स्कूलों में 21 नई अटल टिंकरिंग लैब स्थापित करेगा, जिससे कक्षा 6 से 12 तक के छात्रों को विज्ञान और तकनीक में प्रयोगात्मक सीखने का अवसर मिलेगा।

कक्षा 6 से 12 तक के छात्रों में वैज्ञानिक कौशल विकसित करने, जिज्ञासा बढ़ाने और नवाचार को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से नीति आयोग (NITI Aayog) अपनी प्रमुख योजना अटल इनोवेशन मिशन (AIM) के तहत जिले के विभिन्न स्कूलों में 21 और अटल टिंकरिंग लैब (ATL) स्थापित करने जा रहा है।

इन प्रयोगशालाओं का उद्देश्य छात्रों को एक ऐसा मंच प्रदान करना है, जहाँ वे विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) के क्षेत्रों में व्यावहारिक तरीके से सीख सकें। ‘डू-इट-योरसेल्फ’ (DIY) पद्धति को बढ़ावा देते हुए, ये लैब छात्रों को अपने विचारों को वास्तविक मॉडलों में बदलने में मदद करेंगी, जिससे उनकी रचनात्मकता, समस्या समाधान क्षमता और नवाचार कौशल प्रारंभिक स्तर पर ही विकसित होंगे।

वर्तमान में जिले में दो पूर्ण रूप से संचालित ATL हैं—एक भादसों गांव के सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में और दूसरा कुंजपुरा स्थित सैनिक स्कूल में। इन लैब्स से मिले सकारात्मक परिणामों को देखते हुए अब इस पहल का विस्तार किया जा रहा है, ताकि अधिक छात्रों को इसका लाभ मिल सके। यह जानकारी जिला विज्ञान विशेषज्ञ और परियोजना के नोडल अधिकारी दीपक वर्मा ने दी।

उन्होंने कहा कि ATL के विस्तार से जिले में नवाचार आधारित शिक्षा को बड़ा बढ़ावा मिलेगा और छात्र वास्तविक जीवन की समस्याओं के समाधान विकसित करने के लिए प्रेरित होंगे।

दीपक वर्मा ने बताया कि प्रस्तावित 21 लैब में से 11 के लिए फर्नीचर संबंधित स्कूलों में भेजा जा चुका है। इनमें सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय (GSSS) बरसत, चोचरा, अर्दाना, ब्रास, रहरा, मोहरी जागीर, पधाना, डाचर, शेखपुरा सोहाना, कलसोरा और कर्नाल शहर के रेलवे रोड स्थित सरकारी गर्ल्स मॉडल संस्कृति सीनियर सेकेंडरी स्कूल शामिल हैं।

बाकी 10 स्कूलों में घरौंडा, कैमला, खेरिनारू, इंद्री, बियाना, कच्छवा, मोहिउद्दीनपुर, निगधू, निसिंग और तरावड़ी के स्कूल शामिल हैं, जहाँ अगले शैक्षणिक सत्र से पहले उपकरण और फर्नीचर उपलब्ध करा दिए जाएंगे।

उन्होंने बताया कि इन लैब्स को कपूरथला (पंजाब) के पुष्पा गुजराल साइंस सिटी और नई दिल्ली की नेशनल फिजिकल लेबोरेटरी जैसे प्रमुख संस्थानों के स्तर पर विकसित किया जाएगा। प्रत्येक ATL में आधुनिक तकनीकों जैसे 3D प्रिंटर, रोबोटिक्स किट और सेंसर आधारित सिस्टम उपलब्ध होंगे, जिससे छात्रों को नवीनतम वैज्ञानिक उपकरणों का अनुभव मिलेगा।

उन्होंने आगे बताया कि ATL स्थापित करने के लिए किसी भी स्कूल में माध्यमिक स्तर पर विज्ञान वर्ग में कम से कम 250 छात्र होने चाहिए, जिनमें 50 प्रतिशत से अधिक छात्राएं हों। यह मानदंड शिक्षा के विस्तार के साथ-साथ लैंगिक समानता को भी सुनिश्चित करता है।Screenshot_2097

Edited By: Karan Singh

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