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मिरी-पीरी मेडिकल संस्थान पर विवाद गहराया, HSGMC में बढ़ी अंदरूनी खींचतान
संस्थान के नियंत्रण को लेकर HSGMC और SGPC आमने-सामने, हाईकोर्ट में मामला लंबित
शाहाबाद स्थित मिरी-पीरी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के नियंत्रण को लेकर हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी (HSGMC) के भीतर विवाद तेज हो गया है। SGPC और HSGMC के बीच भी टकराव बढ़ता जा रहा है।
शाहाबाद स्थित मिरी-पीरी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च के नियंत्रण को लेकर हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के भीतर मतभेद और गहरे हो गए हैं।
HSGMC के सह-नामित सदस्य बलजीत सिंह दादूवाल के नेतृत्व में एक समूह द्वारा संस्थान का नियंत्रण लेने की हालिया कोशिश के बाद समिति के सदस्यों के बीच दरार और बढ़ गई है।
HSGMC के अध्यक्ष जगदीश सिंह झिंडा जहां इस प्रयास की आलोचना कर रहे हैं, वहीं असंतुष्ट सदस्य अपने फैसले का बचाव करते हुए कह रहे हैं कि वे कानूनी तरीके से संस्थान का नियंत्रण लेने की कोशिश जारी रखेंगे।
HSGMC लंबे समय से इस संस्थान पर दावा कर रही है और उसका कहना है कि इसका नियंत्रण हरियाणा समिति के पास होना चाहिए। दूसरी ओर, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के नेता इस दावे को खारिज करते हुए कहते हैं कि संस्थान एक ट्रस्ट द्वारा संचालित किया जा रहा है।
इस मामले से जुड़ा एक केस पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में भी लंबित है। SGPC के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी इस संस्थान का संचालन करने वाले ट्रस्ट के चेयरमैन हैं।
बलजीत सिंह दादूवाल ने कहा, “संस्थान और SGPC के प्रतिनिधि इसके संचालन और प्रबंधन को लेकर विरोधाभासी दावे कर रहे हैं। हम अपने दावे पर कायम हैं और शांतिपूर्ण व कानूनी तरीके से इसका नियंत्रण लेंगे। संस्थान हरियाणा में है, इसलिए इसका प्रबंधन हरियाणा समिति को सौंपा जाना चाहिए।”
उन्होंने आरोप लगाया कि HSGMC अध्यक्ष इस मुद्दे पर अकाली दल और SGPC के साथ मिलकर काम कर रहे हैं और संस्थान का नियंत्रण लेने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वे हरियाणा सरकार से हरियाणा सिख गुरुद्वारा ज्यूडिशियल कमीशन को अधिक अधिकार देने की मांग करेंगे, ताकि वह ऐसे मामलों में हस्तक्षेप कर सके।
वहीं, जगदीश सिंह झिंडा ने कहा, “हमने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि HSGMC का इस संस्थान पर कानूनी अधिकार है और हम इस मामले को हाईकोर्ट में लड़ेंगे। जरूरत पड़ी तो सुप्रीम कोर्ट भी जाएंगे।”
उन्होंने यह भी कहा कि दादूवाल और उनके समर्थकों द्वारा बिना सूचना और बिना समिति की कार्यकारिणी व आम सभा से चर्चा किए संस्थान पहुंचने से SGPC को हरियाणा समिति पर हमला करने का मौका मिल गया है।

