सिरसा की नई पहचान: खेती से आगे बढ़कर हाइड्रोलिक मशीन उद्योग में उभरता केंद्र

छोटे वर्कशॉप से शुरू हुआ सफर, अब देश-विदेश में पहुंच रही मशीनें

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हरियाणा का सिरसा जिला अब कृषि के साथ-साथ हाइड्रोलिक मशीन निर्माण के लिए भी पहचान बना रहा है। स्थानीय उद्यमियों के प्रयासों से यह उद्योग देश-विदेश में विस्तार कर रहा है।

हरियाणा का सिरसा जिला, जो लंबे समय से अपनी कृषि उपज के लिए जाना जाता है, अब धीरे-धीरे हाइड्रोलिक मशीन निर्माण क्षेत्र में भी पहचान बना रहा है। परंपरागत रूप से गेहूं, धान, कपास, फल और सब्जियों के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध इस जिले के लोगों ने दशकों से खेती के साथ-साथ छोटे उद्योगों को भी अपनाया है। अब ये छोटे उद्योग बड़े औद्योगिक केंद्रों में बदल चुके हैं, जो भारत और विदेशों तक अपने उत्पाद भेज रहे हैं।

इस बदलाव की शुरुआत स्थानीय लोगों द्वारा स्थापित छोटे वर्कशॉप से हुई, जिन्होंने मशीनरी और निर्माण में व्यावहारिक जरूरतों को समझा। शुरुआत में ये वर्कशॉप मरम्मत और पानी के पंप तथा मेटल शीट जैसे बुनियादी उपकरण बनाने तक सीमित थे। समय के साथ ये विशेष इकाइयों में विकसित हो गए, जो कृषि, फैब्रिकेशन, ट्रक रिपेयर, इलेक्ट्रिक पोल निर्माण और बॉडी मेकिंग उद्योगों के लिए हाइड्रोलिक मशीनें तैयार कर रहे हैं।

स्थानीय उद्यमियों ने कॉम्पैक्ट, कुशल और किफायती मशीनें डिजाइन कीं, जिससे वे बड़े और स्थापित मॉडलों से प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हो सके।

इस क्षेत्र के अग्रणी उद्यमी हरदेव सिंह धनजल ने 1980 के दशक में पंप और छोटे मैकेनिकल उपकरणों की मरम्मत से शुरुआत की थी। उन्होंने मौजूदा निर्माण प्रक्रियाओं में कमियों को देखते हुए ऐसी छोटी हाइड्रोलिक मशीनें विकसित कीं, जिनमें कम तेल और कम मेहनत की जरूरत होती थी, लेकिन प्रदर्शन बेहतर रहता था।

आज जिले में हर साल लगभग 200–225 मशीनों का उत्पादन हो रहा है, जो श्रीनगर से कन्याकुमारी तक देशभर में भेजी जाती हैं, साथ ही दुबई, कतर, केन्या और नेपाल जैसे देशों में निर्यात भी की जाती हैं।

उनके बेटे हरजीत सिंह धनजल, जिन्होंने 2008 में इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद व्यवसाय में कदम रखा, ने उत्पादन को बढ़ाकर आठ से अधिक प्रकार की हाइड्रोलिक मशीनों तक विस्तार किया है। परिवार का कहना है कि डिजिटल युग और ऑनलाइन भुगतान प्रणाली ने उनके काम को आसान बनाया है और बाजार का विस्तार करने में मदद की है।

हालांकि, इस विकास के बावजूद उद्योग को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उद्यमियों के अनुसार, कुशल श्रमिकों की कमी एक बड़ी समस्या है, क्योंकि कई इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स के पास व्यावहारिक अनुभव नहीं होता।

स्थानीय निर्माताओं ने युवाओं को प्रशिक्षण देने की पहल शुरू की है, लेकिन प्रगति अभी धीमी है। इसके अलावा, नियमों से जुड़ी बाधाएं, टैक्स रिफंड में देरी और सीमित सरकारी सहयोग भी उद्योग के विकास को प्रभावित कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार औद्योगिक क्लस्टर स्थापित करे, कॉमन फैसिलिटी सेंटर उपलब्ध कराए और छोटे निर्माताओं को सहयोग दे, तो उत्पादन तीन गुना तक बढ़ सकता है और सैकड़ों रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।

वर्तमान में, कई निर्माता कुछ हिस्सों के लिए बाहरी ठेकेदारों पर निर्भर हैं, क्योंकि उनके पास पर्याप्त जगह और उपकरण नहीं हैं। यदि सरकार सहयोग करे, तो पूरे निर्माण प्रक्रिया को जिले के भीतर ही समेकित किया जा सकता है, जिससे दक्षता और रोजगार दोनों में वृद्धि होगी।Screenshot_2304

 
 
Edited By: Karan Singh

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