एशियन गेम्स में हरियाणा की बेटियों का जलवा, किरण पहल और नीरू धांडा ने पदकों से रचा इतिहास

सोनीपत की किरण पहल ने भारतीय महिला 4x400 मीटर रिले टीम को दिलाया स्वर्ण, वहीं जींद की नीरू धांडा ने शूटिंग में दो गोल्ड और एक सिल्वर मेडल जीतकर बढ़ाया देश का मान।

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हरियाणा की दो बेटियों किरण पहल और नीरू धांडा ने एशियन गेम्स में शानदार प्रदर्शन कर अपनी मेहनत और संघर्ष की कहानी को नई पहचान दी है। एक ने एथलेटिक्स में भारत को स्वर्ण पदक दिलाया, तो दूसरी ने शूटिंग में तीन पदक जीतकर इतिहास रचा। दोनों खिलाड़ियों की सफलता के पीछे वर्षों का संघर्ष, त्याग और दृढ़ संकल्प रहा है।

 

हरियाणा की बेटियों ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। नागोया में आयोजित एशियन गेम्स में सोनीपत की किरण पहल और जींद की नीरू धांडा ने अपने शानदार प्रदर्शन से देश का नाम रोशन किया है। दोनों खिलाड़ियों ने वर्षों की मेहनत, कठिन परिस्थितियों और तमाम चुनौतियों का सामना करते हुए पदक हासिल किए हैं।

किरण पहल ने भारतीय महिला 4x400 मीटर रिले टीम को स्वर्ण पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाई। वहीं, निशानेबाज नीरू धांडा ने व्यक्तिगत ट्रैप और मिक्स्ड टीम ट्रैप स्पर्धाओं में दो स्वर्ण पदक जीतने के साथ टीम स्पर्धा में रजत पदक भी अपने नाम किया।

संघर्ष से सफलता तक पहुंचीं हरियाणा की दो बेटियां

इन दोनों खिलाड़ियों की सफलता के पीछे अलग-अलग संघर्ष की कहानियां हैं। किरण पहल ने महज 10 साल की उम्र में अपने गांव के रेतीले मैदान में नंगे पैर दौड़कर एथलेटिक्स की शुरुआत की थी। दूसरी ओर, नीरू धांडा ने चोट के कारण कबड्डी छोड़कर 19 साल की उम्र में शूटिंग को अपना करियर बनाया।

दोनों खिलाड़ियों ने आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद खेल के प्रति अपना समर्पण बनाए रखा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।

किरण पहल ने भारतीय रिले टीम को दिलाया स्वर्ण पदक

सोनीपत जिले के गुमड़ गांव की रहने वाली किरण पहल ने भारतीय महिला 4x400 मीटर रिले टीम के लिए शुरुआती लेग में दौड़ लगाई। उनके प्रदर्शन ने टीम की स्वर्ण पदक जीत में अहम योगदान दिया।

किरण के लिए यह उपलब्धि वर्षों के संघर्ष का परिणाम है। उन्होंने बचपन में गांव के साधारण रेतीले मैदान पर नंगे पैर अभ्यास शुरू किया था। सीमित संसाधनों के बीच शुरू हुआ उनका सफर अब अंतरराष्ट्रीय खेल जगत में उपलब्धियों तक पहुंच गया है।

नागोया से द ट्रिब्यून से बातचीत के दौरान किरण ने कहा कि जीत हासिल करने के लिए जिद जरूरी है। उन्होंने हरियाणा में लड़कियों के सामने आने वाली चुनौतियों का जिक्र करते हुए बताया कि उन्हें कई मोर्चों पर संघर्ष करना पड़ता है।

19 साल की उम्र में कबड्डी छोड़ शूटिंग में बनाई पहचान

जींद जिले के संगतपुरा गांव की नीरू धांडा ने एशियन गेम्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए तीन पदक अपने नाम किए। उन्होंने व्यक्तिगत ट्रैप और मिक्स्ड टीम ट्रैप स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीते, जबकि ट्रैप टीम स्पर्धा में रजत पदक हासिल किया।

नीरू का खेल सफर कबड्डी से शुरू हुआ था। शुरुआती दिनों में वह कबड्डी खेलती थीं, लेकिन चोट लगने के बाद उन्हें यह खेल छोड़ना पड़ा। इसके बाद 19 साल की उम्र में उन्होंने शूटिंग को अपना नया लक्ष्य बनाया।

आर्थिक तंगी के बावजूद नहीं छोड़ा लक्ष्य

नीरू के लिए शूटिंग में करियर बनाना आसान नहीं था। उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। हालांकि, उनके रिश्तेदार सोमबीर श्योराण ने आर्थिक सहयोग देकर उनके खेल के सफर को आगे बढ़ाने में मदद की।

कठिन परिस्थितियों के बावजूद नीरू ने अभ्यास जारी रखा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतकर अपनी मेहनत को उपलब्धि में बदल दिया।

Key Highlights

  • हरियाणा की किरण पहल और नीरू धांडा ने एशियन गेम्स में शानदार प्रदर्शन किया।

  • किरण पहल ने महिला 4x400 मीटर रिले में भारत के स्वर्ण पदक में अहम भूमिका निभाई।

  • जींद की नीरू धांडा ने शूटिंग में दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीता।

  • किरण ने 10 साल की उम्र में नंगे पैर दौड़ने से अपने खेल सफर की शुरुआत की थी।

  • नीरू ने चोट के बाद कबड्डी छोड़कर 19 साल की उम्र में शूटिंग अपनाई।

  • आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद नीरू ने अपने खेल करियर को जारी रखा।

FAQ Section

1. एशियन गेम्स में किरण पहल ने कौन-सा पदक जीता?

किरण पहल ने भारतीय महिला 4x400 मीटर रिले टीम के साथ स्वर्ण पदक जीतने में अहम योगदान दिया।

2. किरण पहल हरियाणा के किस गांव की रहने वाली हैं?

किरण पहल हरियाणा के सोनीपत जिले के गुमड़ गांव की रहने वाली हैं।

3. नीरू धांडा ने एशियन गेम्स में कितने पदक जीते?

नीरू धांडा ने कुल तीन पदक जीते, जिनमें दो स्वर्ण और एक रजत पदक शामिल हैं।

4. नीरू धांडा पहले कौन-सा खेल खेलती थीं?

नीरू धांडा शुरुआत में कबड्डी खेलती थीं। चोट लगने के बाद उन्होंने शूटिंग को अपना करियर बनाया।

5. नीरू धांडा हरियाणा के किस जिले से हैं?

नीरू धांडा हरियाणा के जींद जिले के संगतपुरा गांव की रहने वाली हैं।

Conclusion

किरण पहल और नीरू धांडा की उपलब्धियां हरियाणा की खेल प्रतिभा और खिलाड़ियों के संघर्ष को दर्शाती हैं। एक ओर किरण ने एथलेटिक्स में अपनी मेहनत से पहचान बनाई, वहीं नीरू ने चोट और आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद शूटिंग में सफलता हासिल की। दोनों खिलाड़ियों का सफर दिखाता है कि दृढ़ संकल्प और निरंतर प्रयास से कठिन चुनौतियों का सामना किया जा सकता है।Screenshot_318

Edited By: Atul Sharma

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