- Hindi News
- राज्य
- हरियाणा
- हरियाणा के आलू किसानों को अब भी नहीं मिला भावांतर भरपाई का पैसा, 90 करोड़ रुपये बकाया होने का दावा
हरियाणा के आलू किसानों को अब भी नहीं मिला भावांतर भरपाई का पैसा, 90 करोड़ रुपये बकाया होने का दावा
आलू की नई बुवाई शुरू होने से पहले मुआवजा जारी करने की मांग, BKU (चरूणी) ने सरकार पर देरी का आरोप लगाया
हरियाणा में पिछले सीजन आलू बेचने वाले किसानों को भावांतर भरपाई योजना के तहत अब तक पूरा मुआवजा नहीं मिला है। BKU (चरूणी) ने दावा किया कि करीब 90 करोड़ रुपये की राशि अभी बकाया है।
हरियाणा के आलू किसानों की परेशानी नई फसल की बुवाई के करीब पहुंचने के बावजूद खत्म नहीं हुई है। पिछले फसल सीजन में कम बाजार भाव के कारण नुकसान झेलने वाले कई किसान अब भी भावांतर भरपाई योजना (BBY) के तहत मिलने वाली मुआवजा राशि का इंतजार कर रहे हैं।
भारतीय किसान यूनियन (चरूणी) ने राज्य सरकार से मांग की है कि आलू की अगली फसल की बुवाई शुरू होने से पहले किसानों का लंबित भुगतान जारी किया जाए। संगठन का कहना है कि पिछले सीजन में बाजार में आलू की आवक बढ़ने और मांग कमजोर रहने से बड़ी मात्रा में फसल सुरक्षित मूल्य से नीचे बिकी थी।
सुरक्षित मूल्य से कम भाव मिलने पर मिलता है मुआवजा
भावांतर भरपाई योजना के तहत किसानों को उस स्थिति में मुआवजा दिया जाता है, जब उनकी फसल सरकार द्वारा निर्धारित सुरक्षित मूल्य से कम कीमत पर बिकती है।पिछले सीजन में आलू का सुरक्षित मूल्य 600 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया था। बाजार में ज्यादा आवक और कमजोर मांग के चलते कई किसानों को अपनी उपज इससे कम कीमत पर बेचनी पड़ी।
ऐसे में किसानों को सुरक्षित मूल्य और औसत बाजार मूल्य के बीच के अंतर की भरपाई योजना के तहत की जानी थी।
किसानों को लागत निकालना भी मुश्किल हुआ
BKU (चरूणी) के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चरूणी ने कहा कि आलू की बुवाई जल्द शुरू होने वाली है, लेकिन बड़ी संख्या में किसानों को पिछली फसल का मुआवजा अभी तक नहीं मिला है।
उन्होंने कहा कि पिछले सीजन में बाजार भाव बेहद कम रहने से किसानों को भारी नुकसान हुआ। कई किसानों के लिए उत्पादन लागत तक निकालना मुश्किल हो गया था।
करीब 90 करोड़ रुपये बकाया होने का दावा
गुरनाम सिंह चरूणी ने दावा किया कि राज्य में आलू उत्पादकों का भावांतर भरपाई योजना के तहत करीब 90 करोड़ रुपये का भुगतान अभी लंबित है।
उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से योजना के तहत दो किस्तें जारी की जा चुकी हैं, लेकिन कई महीने बीतने के बाद भी बड़ी संख्या में किसानों के खातों में पूरी राशि नहीं पहुंची है।
चरूणी के मुताबिक, किसान संगठन को पिछले महीने करीब 50 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत किए जाने की जानकारी दी गई थी, लेकिन यह रकम अभी तक किसानों के बैंक खातों में जमा नहीं हुई है।
बढ़ती खेती लागत ने बढ़ाई परेशानी
किसान संगठन ने कहा कि पहले से ही कृषि लागत लगातार बढ़ रही है। डीजल, खाद, कीटनाशक, बीज और अन्य कृषि इनपुट पर किसानों का खर्च बढ़ा है।
ऐसे में पिछली फसल का मुआवजा समय पर नहीं मिलने से किसानों पर आर्थिक दबाव और बढ़ रहा है। चरूणी ने भुगतान में देरी को किसानों के साथ अन्याय बताया।
अक्टूबर के पहले सप्ताह से शुरू होगी आलू की बुवाई
BKU (चरूणी) के प्रवक्ता राकेश बैन्स ने बताया कि आलू की बुवाई अक्टूबर के पहले सप्ताह से शुरू होने की संभावना है।
नई फसल की तैयारी के लिए किसानों को बीज खरीदने के साथ खेत तैयार करने और अन्य कृषि खर्चों के लिए पैसे की जरूरत होगी। संगठन का कहना है कि यदि पिछली फसल का लंबित मुआवजा समय पर मिल जाए तो किसानों को अगली फसल शुरू करने में आर्थिक मदद मिल सकती है।
Key Highlights:
- हरियाणा के आलू किसानों का पिछले सीजन का मुआवजा अब भी लंबित।
- BKU (चरूणी) ने सरकार से भुगतान जल्द जारी करने की मांग की।
- संगठन के अनुसार करीब 90 करोड़ रुपये बकाया हैं।
- पिछले सीजन आलू का सुरक्षित मूल्य 600 रुपये प्रति क्विंटल था।
- ज्यादा आवक और कमजोर मांग के कारण फसल सुरक्षित मूल्य से नीचे बिकी।
- सरकार दो किस्तें जारी कर चुकी है, लेकिन कई किसानों को भुगतान नहीं मिला।
- करीब 50 करोड़ रुपये स्वीकृत होने के बावजूद राशि खातों में नहीं पहुंचने का दावा।
- डीजल, खाद, कीटनाशक और अन्य कृषि लागत बढ़ने से किसान आर्थिक दबाव में हैं।
- आलू की बुवाई अक्टूबर के पहले सप्ताह से शुरू होने की उम्मीद है।
- किसानों को बीज और खेती के अन्य खर्चों के लिए तत्काल धन की जरूरत है।
FAQ Section:
सवाल: भावांतर भरपाई योजना क्या है?
जवाब: भावांतर भरपाई योजना के तहत किसानों को उस समय मूल्य अंतर की भरपाई की जाती है, जब उनकी उपज सरकार द्वारा निर्धारित सुरक्षित मूल्य से कम बाजार भाव पर बिकती है।
सवाल: पिछले सीजन आलू का सुरक्षित मूल्य कितना था?
जवाब: पिछले सीजन में आलू के लिए सुरक्षित मूल्य 600 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया था।
सवाल: हरियाणा के आलू किसानों का कितना मुआवजा बकाया है?
जवाब: BKU (चरूणी) के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चरूणी ने करीब 90 करोड़ रुपये की राशि लंबित होने का दावा किया है।
सवाल: आलू की अगली बुवाई कब शुरू होने की संभावना है?
जवाब: BKU (चरूणी) के प्रवक्ता राकेश बैन्स के अनुसार, आलू की बुवाई अक्टूबर के पहले सप्ताह से शुरू होगी।
सवाल: किसानों को मुआवजा जल्द क्यों चाहिए?
जवाब: किसानों को नई फसल के लिए बीज खरीदने और अन्य खेती संबंधी खर्चों को पूरा करने के लिए धन की जरूरत है। पिछली फसल का भुगतान लंबित होने से उनकी आर्थिक मुश्किल बढ़ रही है।
Conclusion:
हरियाणा के आलू किसानों के सामने पिछली फसल का मुआवजा न मिलने और नई फसल की तैयारी का दोहरा दबाव है। BKU (चरूणी) ने करीब 90 करोड़ रुपये के लंबित भुगतान का दावा करते हुए सरकार से बुवाई शुरू होने से पहले राशि जारी करने की मांग की है। अब किसानों की नजर सरकार की ओर से लंबित भुगतान को लेकर अगले कदम पर है।
