गैंगस्टर से नेता बने गुरप्रीत सिंह सेखों ने थामा AAP का दामन, पंजाब की सियासत में अंडरवर्ल्ड की एंट्री का पुराना सिलसिला फिर चर्चा में

फिरोजपुर के मुदकी गांव के रहने वाले सेखों ने रविवार को आम आदमी पार्टी ज्वाइन की; परिवार की कांग्रेस पृष्ठभूमि रही, पत्नियां पहले SAD के समर्थन से जिला परिषद चुनाव जीत चुकी हैं

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गैंगस्टर से राजनेता बने गुरप्रीत सिंह सेखों रविवार को आम आदमी पार्टी में औपचारिक रूप से शामिल हो गए। उनके AAP में आने के साथ पंजाब में अपराध की दुनिया से मुख्यधारा की राजनीति में पहुंचने वाले चेहरों का पुराना सिलसिला एक बार फिर चर्चा में है।

 

पंजाब की राजनीति में गैंगस्टर से राजनेता बने गुरप्रीत सिंह सेखों की नई राजनीतिक पारी शुरू हो गई है। फिरोजपुर जिले के मुदकी गांव के रहने वाले सेखों ने रविवार को आम आदमी पार्टी (AAP) की सदस्यता ग्रहण की। उनके पार्टी में शामिल होने के साथ पंजाब में अपराध की दुनिया से मुख्यधारा की राजनीति में कदम रखने वाले लोगों की लंबी सूची फिर चर्चा में आ गई है।

हालांकि, अब तक ऐसे किसी भी व्यक्ति को पंजाब विधानसभा चुनाव में जीत हासिल कर विधायक बनने में सफलता नहीं मिली है।

कांग्रेस पृष्ठभूमि वाले परिवार से आते हैं गुरप्रीत सिंह सेखों

गुरप्रीत सिंह सेखों का परिवार लंबे समय से कांग्रेस से जुड़ा रहा है। हालांकि, समय के साथ सेखों का अपना राजनीतिक प्रभाव बढ़ा और इसी दौरान कई राजनीतिक दलों ने उनसे संपर्क किया। अंततः उन्होंने आम आदमी पार्टी का रुख किया।

सेखों पहले भी प्रत्यक्ष रूप से नहीं बल्कि अपने परिवार के जरिए चुनावी राजनीति में अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुके हैं।

सेखों की दोनों पत्नियां जिला परिषद चुनाव जीत चुकी हैं

गुरप्रीत सिंह सेखों की दोनों पत्नियां पहले जिला परिषद चुनाव जीत चुकी हैं। उनकी पत्नी मंदीप कौर सेखों ने बाजीदपुर जोन से, जबकि कुलजीत कौर सेखों ने फिरोजशाह जोन से चुनाव जीता था।

दोनों उम्मीदवारों को शिरोमणि अकाली दल (SAD) का समर्थन हासिल था। इस तरह सेखों परिवार पहले ही स्थानीय चुनावी राजनीति में अपनी पकड़ का प्रदर्शन कर चुका है।

जिला परिषद चुनाव के दौरान हुई थी सेखों की गिरफ्तारी

गुरप्रीत सिंह सेखों की AAP में एंट्री ऐसे समय में हुई है जब जिला परिषद चुनाव के दौरान उनकी गिरफ्तारी भी राजनीतिक चर्चा का विषय बनी थी।

सेखों को जिला परिषद चुनाव के दौरान गिरफ्तार किया गया था। उनके समर्थकों ने आरोप लगाया था कि तत्कालीन सत्तारूढ़ व्यवस्था ने उनकी बढ़ती राजनीतिक और सामाजिक पकड़ को कमजोर करने के लिए यह कार्रवाई करवाई थी।

बाद में हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। इस घटनाक्रम के बाद उनके समर्थकों के बीच सहानुभूति बढ़ने की बात कही गई और उनके उम्मीदवारों को इसका फायदा मिलने का दावा किया गया।

पंजाब में गैंगस्टर से राजनीति तक पहुंचने का पुराना सिलसिला

गुरप्रीत सिंह सेखों की राजनीतिक एंट्री कोई अलग घटना नहीं है। पंजाब में अपराध की दुनिया से जुड़े कई चर्चित चेहरे समय-समय पर चुनावी राजनीति में अपनी किस्मत आजमा चुके हैं।

इनमें से किसी को विधानसभा चुनाव में सफलता नहीं मिली, लेकिन कुछ उम्मीदवारों ने चुनावी मुकाबलों में राजनीतिक दलों को कड़ी चुनौती जरूर दी।

पंजाब के पहले बड़े डॉन माने जाते थे डिंपी चांदभान

फरीदकोट के चांदभान गांव के रहने वाले प्रभजिंदर सिंह बराड़, जिन्हें डिंपी चांदभान के नाम से जाना जाता था, को पंजाब का पहला बड़ा डॉन माना जाता रहा है।

उनके शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) के साथ करीबी संबंध बताए जाते थे। उस समय सिमरनजीत सिंह मान के नेतृत्व वाली इस पार्टी ने 1989 के लोकसभा चुनाव में पंजाब में मजबूत प्रदर्शन किया था।

हालांकि, बाद में पंजाब में चुनाव रद्द होने और उग्रवाद के खिलाफ बड़े स्तर पर पुलिस कार्रवाई के चलते डिंपी चांदभान की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को झटका लगा। इसके बाद उन्हें पंजाब छोड़कर उत्तर प्रदेश जाना पड़ा, जहां उनके कथित तौर पर मुख्तार अंसारी जैसे लोगों से संबंध बने।

2006 में चंडीगढ़ के लेक क्लब के बाहर उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

रॉकी फाजिल्का ने भी लड़ा था विधानसभा चुनाव

डिंपी चांदभान के कभी सहयोगी रहे जसविंदर सिंह भुल्लर, जिन्हें रॉकी फाजिल्का के नाम से जाना जाता था, ने भी चुनावी राजनीति में कदम रखा।

उन्होंने 2012 के विधानसभा चुनाव में फाजिल्का सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था। उन्हें SAD का कथित तौर पर परोक्ष समर्थन प्राप्त था।

रॉकी फाजिल्का भाजपा के सुरजीत कुमार ज्याणी से बेहद करीबी मुकाबले में हार गए थे। दोनों के बीच वोटों का अंतर 1,700 से भी कम रहा था।

2016 में हिमाचल प्रदेश के परवाणू के पास रॉकी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। आरोप था कि उनकी हत्या एक अन्य गैंगस्टर जयपाल भुल्लर ने की थी।

रॉकी की बहन ने भी आगे बढ़ाई राजनीतिक विरासत

रॉकी फाजिल्का की बहन राजदीप कौर ने भी परिवार की राजनीतिक महत्वाकांक्षा को आगे बढ़ाया। कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने 2017 के विधानसभा चुनाव में फाजिल्का सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा।

राजदीप कौर को 38 हजार से अधिक वोट मिले, लेकिन वह चुनाव जीत नहीं सकीं।

2018 में उन्होंने शिरोमणि अकाली दल का दामन थाम लिया। सुखबीर सिंह बादल की ओर से संबोधित एक 'पोल खोल' रैली में वह SAD में शामिल हुई थीं। इस मौके पर उन्हें सिरोपा भी दिया गया था।

जयपाल भुल्लर का भी रहा चर्चित आपराधिक रिकॉर्ड

जयपाल भुल्लर का नाम भी पंजाब के चर्चित गैंगस्टरों में रहा है। उस पर 40 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज होने की बात कही गई थी और वह पुलिस की मोस्ट-वांटेड सूची में शामिल था।

2021 में कोलकाता में पुलिस मुठभेड़ के दौरान जयपाल भुल्लर मारा गया था।

Key Highlights:

  • गुरप्रीत सिंह सेखों रविवार को आम आदमी पार्टी में शामिल हुए।
  • सेखों फिरोजपुर जिले के मुदकी गांव के रहने वाले हैं।
  • उनका परिवार कांग्रेस की राजनीतिक पृष्ठभूमि से जुड़ा रहा है।
  • उनकी दोनों पत्नियां पहले जिला परिषद चुनाव जीत चुकी हैं।
  • दोनों को SAD का समर्थन प्राप्त था।
  • जिला परिषद चुनाव के दौरान सेखों की गिरफ्तारी हुई थी।
  • हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद उन्हें रिहा किया गया।
  • पंजाब में गैंगस्टर से राजनीति में आने वाले कई चेहरे पहले भी चुनाव लड़ चुके हैं।
  • अब तक ऐसे किसी चेहरे को पंजाब विधानसभा चुनाव में जीत नहीं मिली है।
  • डिंपी चांदभान, रॉकी फाजिल्का और जयपाल भुल्लर इस सिलसिले के चर्चित नाम रहे हैं।

FAQ Section:

गुरप्रीत सिंह सेखों कौन हैं?

गुरप्रीत सिंह सेखों फिरोजपुर जिले के मुदकी गांव के रहने वाले हैं। वह गैंगस्टर से राजनेता बने और रविवार को आम आदमी पार्टी में औपचारिक रूप से शामिल हुए।

गुरप्रीत सिंह सेखों ने किस पार्टी को ज्वाइन किया है?

गुरप्रीत सिंह सेखों ने आम आदमी पार्टी यानी AAP की सदस्यता ग्रहण की है।

क्या सेखों की पत्नियां चुनाव जीत चुकी हैं?

हां। मंदीप कौर सेखों और कुलजीत कौर सेखों पहले जिला परिषद चुनाव जीत चुकी हैं। दोनों को शिरोमणि अकाली दल का समर्थन प्राप्त था।

क्या पंजाब में गैंगस्टर से नेता बने किसी व्यक्ति ने विधानसभा चुनाव जीता है?

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अपराध की दुनिया से राजनीति में आए इन चर्चित चेहरों में से किसी ने पंजाब विधानसभा चुनाव जीतकर विधायक बनने में सफलता हासिल नहीं की है।

रॉकी फाजिल्का ने कौन सा चुनाव लड़ा था?

रॉकी फाजिल्का ने 2012 में फाजिल्का विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था। वह भाजपा के सुरजीत कुमार ज्याणी से 1,700 से कम वोटों के अंतर से हार गए थे।

डिंपी चांदभान कौन थे?

प्रभजिंदर सिंह बराड़ उर्फ डिंपी चांदभान फरीदकोट के चांदभान गांव से थे और उन्हें पंजाब का पहला बड़ा डॉन माना जाता रहा है। उनके राजनीति से जुड़े रहने की भी चर्चा रही थी।

Conclusion:

गुरप्रीत सिंह सेखों के आम आदमी पार्टी में शामिल होने के बाद पंजाब की राजनीति में अपराध की दुनिया से मुख्यधारा की सियासत तक पहुंचने वाले चेहरों को लेकर बहस फिर तेज हो सकती है। सेखों से पहले भी डिंपी चांदभान, रॉकी फाजिल्का और जयपाल भुल्लर जैसे नाम इस सिलसिले में चर्चा में रहे हैं। हालांकि, ऐसे चेहरों में से किसी को पंजाब विधानसभा चुनाव में जीत हासिल नहीं हुई है। अब देखना होगा कि AAP में शामिल होने के बाद सेखों की राजनीतिक भूमिका किस तरह आगे बढ़ती है।Screenshot_1268

Edited By: Atul Sharma

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