करनाल में डिफॉल्टर राइस मिलर्स पर बड़ी कार्रवाई, सरकारी बकाया वसूलने के लिए संपत्तियों की होगी नीलामी

58 राइस मिलर्स पर करीब 500 करोड़ रुपये का CMR बकाया; प्रशासन ने राजस्व विभाग के साथ शुरू की संपत्तियों की नीलामी की प्रक्रिया

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करनाल जिला प्रशासन ने लंबे समय से सरकारी बकाया नहीं चुकाने वाले राइस मिलर्स की संपत्तियों की नीलामी की प्रक्रिया शुरू कर दी है। हाल के हफ्तों में पांच डिफॉल्टर मिलों से करीब 12.5 करोड़ रुपये की वसूली की जा चुकी है।

हरियाणा के करनाल में लंबे समय से सरकारी बकाया नहीं चुकाने वाले राइस मिलर्स पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिला प्रशासन ने डिफॉल्टर राइस मिलर्स की संपत्तियों को नीलाम कर सरकारी राशि की वसूली करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

डिप्टी कमिश्नर डॉ. आनंद कुमार शर्मा ने खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के अधिकारियों को राजस्व विभाग के साथ समन्वय कर नीलामी की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का उद्देश्य वर्षों से लंबित सरकारी बकाया को जल्द से जल्द वसूल करना है।

पांच राइस मिलों से 12.5 करोड़ रुपये की वसूली

प्रशासन की कार्रवाई के बीच खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने पिछले कुछ हफ्तों में पांच डिफॉल्टर राइस मिलों से करीब 12.5 करोड़ रुपये की वसूली की है। अधिकारियों का कहना है कि रिकवरी अभियान आगे भी जारी रहेगा और जल्द ही और बड़ी रकम सरकारी खाते में आने की उम्मीद है।

डिप्टी कमिश्नर डॉ. आनंद कुमार शर्मा ने अधिकारियों के साथ बैठक कर लंबे समय से लंबित बकाया की वसूली में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने डिफॉल्टर मिलर्स की संपत्तियों की नीलामी की प्रक्रिया शुरू करने को कहा है।

डीएफएससी ने दी रिकवरी की जानकारी

जिला खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति नियंत्रक (DFSC) मुकेश कुमार ने हालिया वसूली का ब्यौरा देते हुए बताया कि डिफॉल्टर राइस मिलों से करीब 12.5 करोड़ रुपये वसूल किए जा चुके हैं।

उन्होंने कहा कि बकाया वसूली की कार्रवाई जारी रहेगी और आने वाले समय में और रकम की रिकवरी होने की उम्मीद है।

इन राइस मिलों से हुई बड़ी वसूली

हालिया रिकवरी अभियान में कई राइस मिलों से करोड़ों रुपये की राशि वसूल की गई है।

प्रमुख रिकवरी का विवरण

  • GR International: करीब 3.8 करोड़ रुपये
  • Bhuwaneshwar Rice Mill: करीब 2 करोड़ रुपये
  • Gurunanak Rice Mill: करीब 1.5 करोड़ रुपये
  • Aggarwal Rice Mill: करीब 2.5 करोड़ रुपये
  • Rohit Trading: करीब 50 लाख रुपये

इसके अलावा Vishwakarma Rice Mill से 2 करोड़ रुपये से अधिक की राशि की रिकवरी जल्द पूरी होने की उम्मीद है। वहीं Hariom Rice Mill से भी जल्द बकाया जमा कराने की उम्मीद अधिकारियों ने जताई है।

58 राइस मिलर्स पर करीब 500 करोड़ रुपये का बकाया

करनाल जिला प्रशासन ने इससे पहले डिफॉल्टर राइस मिलों की संपत्तियों का आकलन करने के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की थी। समिति की जांच में सामने आया कि 2013-14 से अब तक 58 राइस मिलर्स सरकार को करीब 500 करोड़ रुपये मूल्य का कस्टम मिल्ड राइस (CMR) उपलब्ध कराने में विफल रहे।

इससे राज्य के सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ। लंबे समय तक संबंधित खरीद एजेंसियां इन बकाया राशियों की प्रभावी वसूली नहीं कर सकीं। अब प्रशासन की कार्रवाई से वर्षों से लंबित मामलों में रिकवरी की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।

वसूली में देरी पर उठे सवाल

करीब एक दशक से अधिक समय तक बकाया वसूल नहीं होने के कारण सरकारी तंत्र की निगरानी और जवाबदेही पर भी सवाल उठे हैं। प्रशासन अब संपत्तियों की पहचान और नीलामी के जरिए लंबित सरकारी राशि की भरपाई की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

वन टाइम सेटलमेंट पॉलिसी पर भी विचार

सूत्रों के अनुसार, सरकार बकाया वसूली में तेजी लाने के लिए One-Time Settlement (OTS) Policy लाने पर भी विचार कर सकती है।

संभावित नीति के तहत डिफॉल्टर राइस मिलर्स को मूलधन, ब्याज या जुर्माने में कुछ रियायत देकर लंबे समय से लंबित देनदारियों का निपटारा करने का मौका मिल सकता है।

यदि ऐसी नीति लागू होती है तो इससे डिफॉल्टर मिलर्स को अपने बकाये का निपटारा करने में राहत मिल सकती है और सरकार को भी वर्षों से लंबित रकम तेजी से वापस मिलने की संभावना होगी।

Key Highlights:

  • करनाल प्रशासन ने डिफॉल्टर राइस मिलर्स की संपत्तियों की नीलामी की प्रक्रिया शुरू की।
  • पांच राइस मिलों से हाल में करीब 12.5 करोड़ रुपये वसूले गए।
  • GR International से करीब 3.8 करोड़ रुपये की रिकवरी हुई।
  • 58 राइस मिलर्स पर करीब 500 करोड़ रुपये मूल्य के CMR की देनदारी का मामला सामने आया।
  • बकाया वर्ष 2013-14 से लंबित बताया गया है।
  • Vishwakarma Rice Mill से 2 करोड़ रुपये से अधिक की रिकवरी जल्द होने की उम्मीद है।
  • Hariom Rice Mill से भी जल्द बकाया जमा होने की संभावना है।
  • सरकार बकाया निपटाने के लिए One-Time Settlement Policy पर विचार कर सकती है।
  • प्रशासन ने संपत्तियों का आकलन करने के लिए पहले तीन सदस्यीय समिति गठित की थी।

FAQ Section:

करनाल में राइस मिलर्स की संपत्तियां क्यों नीलाम की जा रही हैं?

लंबे समय से सरकारी बकाया की वसूली नहीं होने के कारण प्रशासन ने डिफॉल्टर राइस मिलर्स की संपत्तियों की नीलामी के जरिए सरकारी राशि वसूलने की प्रक्रिया शुरू की है।

हाल में कितने रुपये की रिकवरी हुई है?

पिछले कुछ हफ्तों में पांच डिफॉल्टर राइस मिलों से करीब 12.5 करोड़ रुपये की वसूली की गई है।

कितने राइस मिलर्स पर बकाया है?

प्रशासन की तीन सदस्यीय समिति के आकलन के अनुसार 58 राइस मिलर्स ने करीब 500 करोड़ रुपये मूल्य का CMR सरकार को उपलब्ध नहीं कराया।

CMR क्या है?

CMR का अर्थ Custom Milled Rice यानी सरकारी एजेंसियों के लिए कस्टम मिलिंग के बाद निर्धारित चावल की आपूर्ति से है।

क्या सरकार One-Time Settlement Policy ला सकती है?

सूत्रों के अनुसार सरकार बकाया वसूली तेज करने के लिए One-Time Settlement Policy पर विचार कर सकती है। इसके तहत मूलधन, ब्याज या जुर्माने में संभावित रियायत दी जा सकती है।

Conclusion:

करनाल जिला प्रशासन ने वर्षों से लंबित सरकारी बकाये की वसूली के लिए डिफॉल्टर राइस मिलर्स पर कार्रवाई तेज कर दी है। संपत्तियों की नीलामी के साथ-साथ हाल में पांच मिलों से 12.5 करोड़ रुपये की रिकवरी हुई है। वहीं 58 मिलर्स से जुड़े करीब 500 करोड़ रुपये के CMR बकाये का मामला प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है। संभावित One-Time Settlement Policy और संपत्तियों की नीलामी के जरिए सरकार अब लंबे समय से अटकी रकम को सरकारी खजाने में वापस लाने की कोशिश कर रही है।Screenshot_1216

Edited By: Atul Sharma

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