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अमृतसर के 32 गांवों को मिलेगा साफ पानी, गुरजीत सिंह औजला ने संगना वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का लिया जायजा
11 MLD क्षमता वाले प्लांट से आर्सेनिक प्रभावित गांवों में पहुंचेगा ट्रीटेड पानी, पंचायतों को टैंकों की सफाई और रखरखाव की जिम्मेदारी निभाने की अपील
अमृतसर के बोहरू-इब्बन स्थित संगना वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का सांसद गुरजीत सिंह औजला ने निरीक्षण किया। 11 MLD क्षमता वाला यह प्लांट आर्सेनिक प्रभावित करीब 32 गांवों को साफ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए तैयार किया जा रहा है।
32 गांवों तक पहुंचेगा ट्रीटेड पानी
अमृतसर से सांसद गुरजीत सिंह औजला ने बोहरू-इब्बन स्थित संगना वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (WTP) का दौरा कर परियोजना की प्रगति की समीक्षा की। यह परियोजना उन गांवों में साफ पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार की जा रही है, जहां भूजल में आर्सेनिक और अन्य प्रदूषकों की समस्या सामने आई है।
प्लांट की क्षमता 11 मिलियन लीटर प्रतिदिन (MLD) है। इसके जरिए करीब 32 गांवों को उपचारित पानी उपलब्ध कराने की योजना है।गांवों के स्टोरेज टैंकों तक पहुंचेगा पानी
सांसद औजला के अनुसार, प्लांट में उपचारित पानी को संबंधित गांवों में बनाए गए स्टोरेज टैंकों तक पहुंचाया जाएगा। इसके बाद गांवों के भीतर पानी के वितरण की जिम्मेदारी संबंधित ग्राम पंचायतों की होगी।
उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में भूजल की गुणवत्ता गंभीर रूप से प्रभावित हुई है, वहां सतही जल का उपचार कर उसे पीने योग्य बनाकर उपलब्ध कराना जरूरी है।
भूजल में आर्सेनिक की समस्या लंबे समय से चिंता का विषय
औजला ने कहा कि इस क्षेत्र में भूजल की गुणवत्ता लंबे समय से चिंता का विषय रही है। उनके अनुसार, कई इलाकों में भूजल में आर्सेनिक और अन्य प्रदूषकों की मौजूदगी सामने आने के बाद उन्होंने इस मुद्दे को संसद में प्रमुखता से उठाया था।
उनका कहना है कि प्रभावित गांवों के लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए सतही जल आधारित परियोजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
पानी की टंकियों की सफाई पर जोर
सांसद ने पंचायतों, सरपंचों और गांव के प्रतिनिधियों से पानी की टंकियों की नियमित सफाई और रखरखाव सुनिश्चित करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि सरकार और संबंधित विभाग की जिम्मेदारी साफ पानी की आपूर्ति करना है, लेकिन पानी के उचित वितरण और जल भंडारण ढांचे के रखरखाव में पंचायतों और ग्रामीणों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।
बिना टैंक वाले गांवों का होगा सर्वे
औजला ने उन गांवों का सर्वे करने पर भी जोर दिया, जहां अभी तक पानी के स्टोरेज टैंक नहीं बनाए गए हैं। ऐसे गांवों में टैंकों के निर्माण के लिए प्रस्ताव तैयार करने की जरूरत बताई गई है।
परियोजना का पूरा लाभ लेने के लिए समन्वय जरूरी
सतही जल आधारित इस परियोजना से आर्सेनिक प्रभावित गांवों को साफ पेयजल उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, परियोजना का पूरा लाभ तभी मिल सकेगा जब संबंधित विभाग, ग्राम पंचायतें और ग्रामीण मिलकर पानी की आपूर्ति, वितरण और टैंकों के रखरखाव की व्यवस्था को सुचारु रखें।
Key Highlights:
- बोहरू-इब्बन में संगना वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का निरीक्षण।
- प्लांट की क्षमता 11 मिलियन लीटर प्रतिदिन है।
- करीब 32 आर्सेनिक प्रभावित गांवों को मिलेगा ट्रीटेड पानी।
- पानी गांवों के स्टोरेज टैंकों तक पहुंचाया जाएगा।
- गांवों में पानी के वितरण की जिम्मेदारी पंचायतों की होगी।
- पंचायतों से पानी की टंकियों की नियमित सफाई और रखरखाव की अपील।
- बिना टैंक वाले गांवों का सर्वे कर निर्माण के प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे।
FAQ Section:
संगना वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता कितनी है?
संगना वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता 11 मिलियन लीटर प्रतिदिन (MLD) है।
इस प्लांट से कितने गांवों को पानी मिलेगा?
योजना के अनुसार करीब 32 गांवों को उपचारित पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा।
इन गांवों में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की जरूरत क्यों पड़ी?
क्षेत्र के कई गांवों में भूजल में आर्सेनिक और अन्य प्रदूषकों की समस्या सामने आई है। ऐसे क्षेत्रों में सतही जल को उपचारित कर पीने योग्य पानी उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है।
गांवों में पानी के वितरण की जिम्मेदारी किसकी होगी?
प्लांट से पानी गांवों के स्टोरेज टैंकों तक पहुंचाया जाएगा। इसके बाद गांव के भीतर पानी के वितरण की जिम्मेदारी संबंधित ग्राम पंचायतों की होगी।
पानी की टंकियों की सफाई क्यों जरूरी है?
ट्रीटेड पानी की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए स्टोरेज टैंकों की नियमित सफाई और रखरखाव जरूरी है।
Conclusion:
संगना वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के जरिए आर्सेनिक प्रभावित करीब 32 गांवों तक उपचारित पेयजल पहुंचाने की योजना है। 11 MLD क्षमता वाली इस परियोजना के साथ पानी के स्टोरेज, वितरण और टैंकों के रखरखाव की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होगी। सांसद गुरजीत सिंह औजला ने पंचायतों और अधिकारियों से इन व्यवस्थाओं को प्रभावी बनाए रखने पर जोर दिया है।
