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करतारपुर कॉरिडोर: भारत-पाकिस्तान के बीच 4.2 किमी का धार्मिक रास्ता, जानिए कैसे हुआ था इसका निर्माण
1999 में पहली बार उठा था करतारपुर कॉरिडोर का प्रस्ताव, 2018 में रखी गई नींव और नवंबर 2019 में श्रद्धालुओं के लिए खोला गया रास्ता
करतारपुर कॉरिडोर भारत के डेरा बाबा नानक को पाकिस्तान के गुरुद्वारा दरबार साहिब, करतारपुर से जोड़ता है। इस कॉरिडोर की नींव 2018 में रखी गई और नवंबर 2019 में श्रद्धालुओं के लिए इसे शुरू किया गया।
करतारपुर कॉरिडोर क्या है?
करतारपुर कॉरिडोर भारत और पाकिस्तान के बीच धार्मिक यात्रा के लिए बनाया गया करीब 4.2 किलोमीटर लंबा मार्ग है। यह पंजाब के डेरा बाबा नानक को पाकिस्तान के नारोवाल जिले में स्थित गुरुद्वारा दरबार साहिब, करतारपुर से जोड़ता है।
भारत सरकार के अनुसार, भारतीय श्रद्धालुओं को गुरुद्वारा दरबार साहिब तक आसान और सुगम पहुंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इस कॉरिडोर का विकास किया गया था।1999 में पहली बार सामने आया था प्रस्ताव
करतारपुर कॉरिडोर की मांग कोई नई नहीं थी। भारत और पाकिस्तान के बीच इसे लेकर चर्चा 1999 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के दौर में हुई थी।
इसके बाद करीब दो दशक तक इस प्रस्ताव पर अलग-अलग स्तर पर बातचीत चलती रही। नवंबर 2018 में भारत सरकार ने औपचारिक रूप से करतारपुर कॉरिडोर के विकास को मंजूरी दी।
2018 में रखी गई थी नींव
भारत की तरफ से करतारपुर कॉरिडोर की नींव 26 नवंबर 2018 को डेरा बाबा नानक में रखी गई थी। पाकिस्तान की तरफ से भी दो दिन बाद 28 नवंबर 2018 को निर्माण की शुरुआत की गई।
भारत सरकार ने इस परियोजना को गुरु नानक देव जी की 550वीं जयंती के अवसर पर विकसित करने का निर्णय लिया था।
नवंबर 2019 में शुरू हुई यात्रा
भारत और पाकिस्तान ने 24 अक्टूबर 2019 को करतारपुर साहिब कॉरिडोर के संचालन को लेकर समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसके बाद 9 नवंबर 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डेरा बाबा नानक में इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट का उद्घाटन किया और श्रद्धालुओं के पहले जत्थे को रवाना किया।
यह शुरुआत गुरु नानक देव जी की 550वीं जयंती के अवसर पर हुई थी।
भारत में तैयार हुआ आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर
भारत की तरफ से कॉरिडोर के लिए करीब 4.2 किलोमीटर लंबा चार लेन मार्ग बनाया गया। इसके साथ डेरा बाबा नानक में आधुनिक पैसेंजर टर्मिनल भी तैयार किया गया था।
सरकारी जानकारी के अनुसार, टर्मिनल में यात्रियों की सुविधा के लिए बड़ी संख्या में इमिग्रेशन काउंटर, प्रार्थना कक्ष, मेडिकल सुविधा, चाइल्ड केयर और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गई थीं। इसे प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं की आवाजाही को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था।
भारत-पाकिस्तान के बीच लोगों के संपर्क की पहल
करतारपुर कॉरिडोर को भारत और पाकिस्तान के लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने की एक पहल के तौर पर देखा गया। इससे पहले दोनों देशों के बीच लोगों की आवाजाही बढ़ाने के लिए समझौता एक्सप्रेस और सदा-ए-सरहद बस सेवा जैसी पहल भी शुरू की गई थीं।
2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने करतारपुर कॉरिडोर को दोनों देशों के बीच संपर्क और संबंधों में नई संभावनाओं से जोड़कर देखा था।
बंटवारे के बाद करतारपुर भारत से अलग हो गया
1947 के भारत-पाकिस्तान विभाजन के दौरान करतारपुर पाकिस्तान की सीमा में चला गया। गुरुद्वारा दरबार साहिब वह स्थान है जहां गुरु नानक देव जी ने अपने जीवन के अंतिम वर्षों का बड़ा हिस्सा बिताया था।
विभाजन के बाद भारतीय सिख श्रद्धालुओं के लिए करतारपुर साहिब की सीधी पहुंच सीमित हो गई। लंबे समय से श्रद्धालु भारत की सीमा से गुरुद्वारा साहिब के दर्शन की आसान व्यवस्था की मांग करते रहे।
1965 के युद्ध के दौरान जसर पुल को नुकसान
विभाजन के बाद शुरुआती वर्षों में कुछ श्रद्धालु जसर पुल के रास्ते अनौपचारिक रूप से करतारपुर तक पहुंचने में सक्षम होते थे। 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान यह पुल नष्ट हो गया, जिसके बाद ऐसी आवाजाही भी संभव नहीं रही।
इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में करतारपुर कॉरिडोर को भारत से गुरुद्वारा दरबार साहिब तक सीधी पहुंच उपलब्ध कराने वाली महत्वपूर्ण परियोजना के रूप में विकसित किया गया।
कॉरिडोर पर रही श्रद्धालुओं की नजर
कॉरिडोर के निर्माण के समय भारत की तरफ से प्रतिदिन करीब 5,000 श्रद्धालुओं की आवाजाही को ध्यान में रखते हुए सुविधाएं तैयार की गई थीं। सरकारी दस्तावेजों में भी प्रतिदिन 5,000 यात्रियों को सुविधा देने के लिए बुनियादी ढांचे का उल्लेख किया गया है।
हालांकि, शुरुआती दिनों में वास्तविक यात्रियों की संख्या अनुमानित क्षमता से कम रही। बाद के वर्षों में कॉरिडोर का इस्तेमाल करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी।
Key Highlights:
- करतारपुर कॉरिडोर करीब 4.2 किलोमीटर लंबा मार्ग है।
- यह भारत के डेरा बाबा नानक को पाकिस्तान के गुरुद्वारा दरबार साहिब से जोड़ता है।
- कॉरिडोर का प्रस्ताव 1999 में चर्चा में आया था।
- भारत की तरफ से नींव 26 नवंबर 2018 को रखी गई।
- भारत और पाकिस्तान ने 24 अक्टूबर 2019 को संचालन समझौते पर हस्ताक्षर किए।
- 9 नवंबर 2019 को कॉरिडोर का उद्घाटन किया गया।
- कॉरिडोर गुरु नानक देव जी की 550वीं जयंती के अवसर पर शुरू हुआ।
- भारतीय श्रद्धालुओं के लिए वीजा-मुक्त यात्रा की व्यवस्था की गई थी।
FAQ Section:
करतारपुर कॉरिडोर कितना लंबा है?
करतारपुर कॉरिडोर करीब 4.2 किलोमीटर लंबा मार्ग है, जो भारत के डेरा बाबा नानक को पाकिस्तान के करतारपुर से जोड़ता है।
करतारपुर कॉरिडोर का प्रस्ताव पहली बार कब आया था?
करतारपुर कॉरिडोर का प्रस्ताव 1999 में तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के दौर में चर्चा में आया था।
करतारपुर कॉरिडोर की नींव कब रखी गई?
भारत की तरफ से कॉरिडोर की नींव 26 नवंबर 2018 को रखी गई थी।
करतारपुर कॉरिडोर कब शुरू हुआ?
9 नवंबर 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की तरफ से इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट का उद्घाटन किया और श्रद्धालुओं के पहले जत्थे को रवाना किया।
करतारपुर कॉरिडोर किस गुरुद्वारे तक जाता है?
यह कॉरिडोर पाकिस्तान के नारोवाल जिले में स्थित गुरुद्वारा दरबार साहिब, करतारपुर तक जाता है।
करतारपुर कॉरिडोर क्यों बनाया गया?
इसका मुख्य उद्देश्य भारत से गुरुद्वारा दरबार साहिब, करतारपुर जाने वाले श्रद्धालुओं को आसान और सुगम मार्ग उपलब्ध कराना था।
Conclusion:
करतारपुर कॉरिडोर करीब दो दशक से अधिक समय तक चली चर्चा और प्रक्रिया के बाद नवंबर 2019 में श्रद्धालुओं के लिए शुरू हुआ। 4.2 किलोमीटर का यह मार्ग डेरा बाबा नानक को गुरुद्वारा दरबार साहिब, करतारपुर से जोड़ता है और गुरु नानक देव जी से जुड़े इस ऐतिहासिक धार्मिक स्थल तक भारतीय श्रद्धालुओं की सीधी पहुंच का माध्यम बना। इसके निर्माण के साथ भारत और पाकिस्तान के बीच धार्मिक यात्रा के लिए एक विशेष व्यवस्था स्थापित हुई।
