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अमेरिका के प्रसिद्ध प्रवासी पंजाबी वकील जसप्रीत सिंह का शिक्षा पर जोर, GNDU में ₹3 करोड़ की सिख स्टडी चेयर स्थापित की
न्यूयॉर्क स्थित इमिग्रेशन अटॉर्नी ने पंजाब की उच्च शिक्षा को मजबूत बनाने, शोध को बढ़ावा देने और पंजाबी भाषा सीखने के लिए AI आधारित ऐप विकसित करने की पहल की।
गुरु नानक देव विश्वविद्यालय (GNDU) के पूर्व छात्र और न्यूयॉर्क के प्रतिष्ठित इमिग्रेशन अटॉर्नी जसप्रीत सिंह ने पंजाब में शिक्षा और शोध को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया है। उन्होंने GNDU में सिख स्टडी चेयर की स्थापना के लिए ₹3 करोड़ का योगदान दिया है और पंजाबी भाषा सीखने के लिए AI आधारित एप्लिकेशन विकसित करने की पहल भी की है।
पंजाबी प्रवासी समुदाय को शिक्षा और शोध से जोड़ने की पहल
पंजाब का प्रवासी समुदाय दुनिया के सबसे सफल और प्रभावशाली समुदायों में गिना जाता है। इसी कड़ी में गुरु नानक देव विश्वविद्यालय (GNDU), अमृतसर ने अपने पूर्व छात्रों और विदेशों में कार्यरत शिक्षाविदों को विश्वविद्यालय से जोड़ने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है। इस पहल के तहत न्यूयॉर्क स्थित प्रसिद्ध इमिग्रेशन अटॉर्नी और GNDU के पूर्व छात्र जसप्रीत सिंह की भूमिका चर्चा में है।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. करमजीत सिंह की पहल पर एलुमनाई नेटवर्क को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि प्रवासी पंजाबी शिक्षा, अनुसंधान और प्रतिभा विकास के क्षेत्र में विश्वविद्यालयों के साथ सहयोग कर सकें।
GNDU में स्थापित की सिख स्टडी चेयर, छात्रों को मिलेगा शोध का अवसर
जसप्रीत सिंह ने वर्ष 2025 में GNDU में सिख स्टडी चेयर की स्थापना की थी। इसके अलावा उन्होंने मेधावी विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति कार्यक्रम भी शुरू किया। विश्वविद्यालय ने उनकी शैक्षणिक और सामाजिक सेवाओं को देखते हुए उन्हें इस वर्ष प्रोफेसर ऑफ एमिनेंस नियुक्त किया तथा 51वें दीक्षांत समारोह में मानद उपाधि (Honoris Causa) से सम्मानित किया।₹3 करोड़ का योगदान
सिख इतिहास, संस्कृति और आध्यात्मिक पहचान पर शोध को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जसप्रीत सिंह ने सिख स्टडी चेयर की स्थापना के लिए लगभग 3 करोड़ रुपये का योगदान दिया है। उनका मानना है कि शिक्षा युवाओं को सकारात्मक दिशा देकर समाज की कई समस्याओं का समाधान कर सकती है।
शिक्षा से नशाखोरी और गैंगस्टरवाद जैसी चुनौतियों का समाधान संभव
अमृतसर ट्रिब्यून से बातचीत में जसप्रीत सिंह ने कहा कि पंजाब में उच्च शिक्षा संस्थानों को और मजबूत बनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यदि युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और करियर के अवसर मिलें तो नशाखोरी और गैंगस्टरवाद जैसी सामाजिक समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
'शिक्षित युवा भविष्य निर्माण में निभाते हैं अहम भूमिका'
उन्होंने कहा कि शिक्षित युवा अपने करियर पर अधिक ध्यान देते हैं और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके लिए राज्य के विश्वविद्यालयों और प्रवासी समुदाय के बीच मजबूत साझेदारी विकसित करना समय की मांग है।
पंजाबी भाषा सीखने के लिए AI आधारित एप्लिकेशन विकसित करने की पहल
जसप्रीत सिंह ने पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला के साथ मिलकर पंजाबी भाषा सीखने के लिए एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित एप्लिकेशन विकसित करने की पहल भी की है।
उन्होंने बताया कि यह एप्लिकेशन विशेष रूप से उन लोगों के लिए तैयार किया जा रहा है जो पंजाबी भाषा नहीं जानते। अमेरिका में रहने वाले सिख परिवारों और नई पीढ़ी को पंजाबी भाषा और संस्कृति से जोड़ने में यह प्लेटफॉर्म महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
विदेशों में पंजाबी भाषा संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम
जसप्रीत सिंह अमेरिका में 18 सिख गुरुद्वारों के कानूनी सलाहकार भी हैं। उनके अनुसार, विदेशों में रहने वाले बच्चों को पंजाबी भाषा सिखाने के लिए प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी है। ऐसे में AI आधारित तकनीक भाषा सीखने को आसान और सुलभ बना सकती है।
प्रवासी पंजाबी समुदाय को शोध और नवाचार से जोड़ने पर जोर
उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि प्रवासी समुदाय का योगदान केवल आर्थिक सहायता तक सीमित न रहे, बल्कि शोध, नवाचार और प्रतिभा विकास जैसे क्षेत्रों में भी मजबूत साझेदारी विकसित की जाए। इससे पंजाब के विश्वविद्यालयों को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिल सकती है।
Key Highlights:
- GNDU के पूर्व छात्र जसप्रीत सिंह ने शिक्षा और शोध को बढ़ावा देने की अपील की।
- GNDU में सिख स्टडी चेयर की स्थापना के लिए ₹3 करोड़ का योगदान दिया।
- मेधावी छात्रों के लिए छात्रवृत्ति कार्यक्रम भी शुरू किया।
- पंजाबी भाषा सीखने के लिए AI आधारित एप्लिकेशन विकसित करने की पहल।
- विश्वविद्यालयों और प्रवासी समुदाय के बीच मजबूत साझेदारी पर जोर।
- शिक्षा को नशाखोरी और गैंगस्टरवाद जैसी समस्याओं के समाधान का माध्यम बताया।
FAQ Section
प्रश्न 1: जसप्रीत सिंह कौन हैं?
जसप्रीत सिंह न्यूयॉर्क स्थित प्रसिद्ध इमिग्रेशन अटॉर्नी और गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र हैं।
प्रश्न 2: उन्होंने GNDU को क्या योगदान दिया है?
उन्होंने GNDU में सिख स्टडी चेयर स्थापित करने के लिए ₹3 करोड़ का दान दिया और छात्रवृत्ति कार्यक्रम भी शुरू किया।
प्रश्न 3: AI आधारित एप्लिकेशन का उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य गैर-पंजाबी भाषी लोगों और विदेशों में रहने वाले युवाओं को पंजाबी भाषा सीखने में मदद करना है।
प्रश्न 4: शिक्षा को लेकर उनका क्या दृष्टिकोण है?
उनका मानना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा युवाओं को सही दिशा देती है और नशाखोरी तथा गैंगस्टरवाद जैसी समस्याओं को कम करने में मदद कर सकती है।
Conclusion
जसप्रीत सिंह की पहल यह दर्शाती है कि प्रवासी पंजाबी समुदाय केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, अनुसंधान और तकनीकी नवाचार के माध्यम से पंजाब के भविष्य को मजबूत बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। सिख स्टडी चेयर और AI आधारित पंजाबी भाषा एप्लिकेशन जैसी परियोजनाएं आने वाले समय में शिक्षा और सांस्कृतिक संरक्षण के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर सकती हैं।

