- Hindi News
- राज्य
- हरियाणा
- PGIMS रोहतक में क्लीनिकल ट्रायल्स की होगी व्यापक जांच, सभी विभागों से मांगी गई रिसर्च और वित्तीय रिक...
PGIMS रोहतक में क्लीनिकल ट्रायल्स की होगी व्यापक जांच, सभी विभागों से मांगी गई रिसर्च और वित्तीय रिकॉर्ड की पूरी जानकारी
पारदर्शिता और नियामकीय अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए संस्थान ने क्लीनिकल ट्रायल्स के लिए नई गाइडलाइन लागू की, एक महीने में रिपोर्ट सौंपने के निर्देश।
पंडित बीडी शर्मा पीजीआईएमएस (PGIMS), रोहतक में चल रहे और पहले किए जा चुके सभी क्लीनिकल ट्रायल्स की समीक्षा शुरू कर दी गई है। संस्थान प्रशासन ने सभी विभागों और प्रमुख शोधकर्ताओं से ट्रायल, रिसर्च और वित्तीय लेनदेन से जुड़े विस्तृत रिकॉर्ड एक महीने के भीतर जमा करने को कहा है।
PGIMS रोहतक में क्लीनिकल ट्रायल्स पर सख्ती, सभी विभागों से मांगी गई विस्तृत रिपोर्ट
हरियाणा के पंडित बीडी शर्मा पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PGIMS), रोहतक में वर्तमान और पूर्व में किए गए सभी क्लीनिकल ट्रायल्स की समीक्षा शुरू कर दी गई है। संस्थान प्रशासन ने पारदर्शिता, जवाबदेही और नियामकीय मानकों का पालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सभी संबंधित विभागों और प्रमुख शोधकर्ताओं (Principal Investigators) से ट्रायल्स और उनसे जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड का पूरा विवरण मांगा है।
नई गाइडलाइन लागू, संस्थागत प्रक्रिया होगी एक समान
संस्थान प्रशासन ने पाया कि विभिन्न विभागों और फैकल्टी सदस्यों द्वारा क्लीनिकल ट्रायल्स से संबंधित एमओयू (MoU) अलग-अलग तरीके से प्रस्तुत किए जा रहे थे और इसके लिए कोई समान संस्थागत नीति नहीं थी।
इसी को ध्यान में रखते हुए संस्थान ने अब क्लीनिकल ट्रायल्स के संचालन के लिए व्यापक दिशानिर्देश (Comprehensive Guidelines) को मंजूरी दे दी है, ताकि भविष्य में सभी प्रक्रियाएं एक समान और नियमों के अनुरूप संचालित की जा सकें।एक महीने के भीतर जमा करनी होगी पूरी जानकारी
हाल ही में PGIMS के निदेशक डॉ. एस.के. सिंघल द्वारा जारी आदेश के अनुसार, जिन विभागों, इकाइयों या सेल्स ने क्लीनिकल ट्रायल्स किए हैं या वर्तमान में कर रहे हैं, उन्हें एक महीने के भीतर निर्धारित जानकारी जमा करनी होगी।
यह जानकारी रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेल के वरिष्ठ प्रोफेसर प्रभारी और एथिक्स कमेटी के माध्यम से प्रस्तुत करनी होगी।
ट्रायल्स से जुड़े सभी दस्तावेज होंगे जांच के दायरे में
संस्थान ने प्रत्येक विभाग और प्रमुख शोधकर्ता से अब तक किए गए सभी क्लीनिकल ट्रायल्स का विवरण मांगा है। इसके साथ ही निम्नलिखित दस्तावेज भी जमा करने होंगे—
- क्लीनिकल ट्रायल्स की संख्या
- ऑडिट रिपोर्ट
- ट्रायल रिपोर्ट
- शोध के परिणाम (Outcomes)
- निष्कर्ष (Findings)
- अन्य संबंधित दस्तावेज और रिकॉर्ड
फार्मा कंपनियों से मिले फंड का भी देना होगा पूरा हिसाब
सूत्रों के अनुसार, संस्थान ने सभी विभागों से उन क्लीनिकल ट्रायल्स के लिए प्राप्त फंड या अनुदान (Grant) का भी पूरा विवरण मांगा है, जो विभिन्न दवा कंपनियों या अन्य प्रायोजक एजेंसियों द्वारा उपलब्ध कराया गया था।
वित्तीय रिकॉर्ड भी होंगे जांच का हिस्सा
प्रशासन ने निर्देश दिया है कि विभाग निम्नलिखित वित्तीय दस्तावेज भी प्रस्तुत करें—
- ऑडिटेड अकाउंट्स
- यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट
- व्यय विवरण (Expenditure Statement)
- फंड के उपयोग से संबंधित सभी सहायक दस्तावेज
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्राप्त धनराशि का उपयोग निर्धारित नियमों और स्वीकृत उद्देश्यों के अनुरूप किया गया हो।
Key Highlights:
- PGIMS रोहतक में सभी पुराने और वर्तमान क्लीनिकल ट्रायल्स की समीक्षा होगी।
- सभी विभागों और प्रमुख शोधकर्ताओं से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई।
- क्लीनिकल ट्रायल्स के लिए नई संस्थागत गाइडलाइन लागू।
- ऑडिट रिपोर्ट, ट्रायल रिपोर्ट और शोध परिणाम जमा करने के निर्देश।
- फार्मा कंपनियों से मिले फंड और खर्च का पूरा हिसाब भी देना होगा।
- एक महीने के भीतर जानकारी जमा करने का आदेश।
FAQ Section
प्रश्न 1: PGIMS रोहतक ने यह कदम क्यों उठाया है?
क्लीनिकल ट्रायल्स में पारदर्शिता, जवाबदेही और नियामकीय अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए यह निर्णय लिया गया है।
प्रश्न 2: किन लोगों से जानकारी मांगी गई है?
सभी विभागों, संबंधित इकाइयों और क्लीनिकल ट्रायल्स से जुड़े प्रमुख शोधकर्ताओं (Principal Investigators) से जानकारी मांगी गई है।
प्रश्न 3: कौन-कौन से दस्तावेज जमा करने होंगे?
ट्रायल रिपोर्ट, ऑडिट रिपोर्ट, शोध निष्कर्ष, फंड का विवरण, ऑडिटेड अकाउंट्स, यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट और व्यय संबंधी रिकॉर्ड जमा करने होंगे।
प्रश्न 4: जानकारी जमा करने की समय सीमा क्या है?
सभी संबंधित विभागों को एक महीने के भीतर पूरी जानकारी जमा करनी होगी।
Conclusion
PGIMS रोहतक का यह कदम क्लीनिकल ट्रायल्स की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नई गाइडलाइन और विस्तृत रिकॉर्ड की समीक्षा से भविष्य में शोध कार्यों में संस्थागत मानकों और वित्तीय जवाबदेही को और मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

