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अमृतसर DLSA की मानवीय पहल, अटारी-वाघा बॉर्डर से 5 पाकिस्तानी कैदियों की हुई स्वदेश वापसी
सजा पूरी होने के बाद कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताओं के कारण हिरासत लंबी न हो, इसके लिए DLSA ने जेल प्रशासन के साथ मिलकर कराई रिहाई और प्रत्यावर्तन
अमृतसर जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण (DLSA) ने पांच पाकिस्तानी कैदियों को अटारी-वाघा सीमा के रास्ते उनके देश वापस भेजने में मदद की। इनमें एक बधिर और मूक कैदी वकास अली भी शामिल था, जिसकी सजा 2022 में ही पूरी हो चुकी थी।
अमृतसर में जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण (DLSA) ने मानवीय पहल करते हुए सजा पूरी कर चुके पांच पाकिस्तानी कैदियों की स्वदेश वापसी सुनिश्चित कराई। इन सभी को अटारी-वाघा बॉर्डर के जरिए पाकिस्तान भेजा गया। संबंधित कैदी अमृतसर की सेंट्रल जेल में बंद थे और इनमें ज्यादातर मामले पासपोर्ट एक्ट और फॉरेनर्स एक्ट के उल्लंघन से जुड़े थे।
सजा पूरी होने के बाद भी लंबी हिरासत से बचाने की पहल
इन पांचों पाकिस्तानी नागरिकों को वर्ष 2025 और 2026 की शुरुआत में विभिन्न मामलों में सजा हुई थी। सजा पूरी होने के बाद यह सुनिश्चित करने के लिए प्रयास किए गए कि केवल कानूनी, प्रशासनिक या प्रत्यावर्तन संबंधी औपचारिकताएं लंबित होने के कारण उन्हें अनावश्यक रूप से जेल में न रहना पड़े।
DLSA अमृतसर की ओर से संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय कर आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कराई गईं। इसके बाद पांचों कैदियों की रिहाई और उनके स्वदेश लौटने का रास्ता साफ हुआ।जेल प्रशासन के सहयोग से पूरी हुई प्रक्रिया
जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा DLSA अमृतसर की चेयरपर्सन जतिंदर कौर ने बताया कि प्रत्यावर्तन की प्रक्रिया सेंट्रल जेल अमृतसर के अधीक्षक और संबंधित जेल अधिकारियों के सक्रिय सहयोग से संभव हो सकी।
सेंट्रल जेल प्रशासन ने कैदियों के सत्यापन, दस्तावेज तैयार करने, आवश्यक संवाद और अन्य औपचारिकताओं को पूरा करने में सहायता की। विभिन्न स्तरों पर समन्वय के बाद कैदियों की रिहाई और अटारी-वाघा बॉर्डर के जरिए स्वदेश वापसी सुनिश्चित की गई।
वकास अली का मामला रहा खास
इस मानवीय प्रयास का एक महत्वपूर्ण पहलू पाकिस्तानी कैदी वकास अली की स्वदेश वापसी रही। वकास अली बधिर और मूक हैं और उनकी सजा वर्ष 2022 में ही पूरी हो चुकी थी।
सजा पूरी होने के बाद भी प्रत्यावर्तन से जुड़ी प्रक्रियाओं के कारण उनकी वापसी में लंबा समय लगा। DLSA और जेल प्रशासन के समन्वित प्रयासों से आखिरकार उनकी स्वदेश वापसी संभव हो सकी।
मानवीय दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण कदम
DLSA की इस पहल का उद्देश्य केवल कानूनी प्रक्रिया पूरी करना नहीं था, बल्कि सजा पूरी कर चुके विदेशी कैदियों को अनावश्यक हिरासत से बचाते हुए उनके देश वापस भेजने की व्यवस्था करना भी था।
अटारी-वाघा सीमा भारत और पाकिस्तान के बीच लोगों के प्रत्यावर्तन की महत्वपूर्ण सीमा है। ऐसे मामलों में कानूनी प्रक्रिया के साथ-साथ पहचान सत्यापन, दस्तावेजीकरण और संबंधित प्रशासनिक एजेंसियों के बीच समन्वय अहम भूमिका निभाता है।
Key Highlights:
- अमृतसर DLSA ने 5 पाकिस्तानी कैदियों की स्वदेश वापसी में मदद की।
- सभी को अटारी-वाघा बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तान भेजा गया।
- कैदी अमृतसर की सेंट्रल जेल में बंद थे।
- ज्यादातर मामले पासपोर्ट एक्ट और फॉरेनर्स एक्ट से जुड़े थे।
- सजा पूरी होने के बाद अनावश्यक हिरासत से बचाने के लिए प्रक्रिया तेज की गई।
- बधिर और मूक कैदी वकास अली की सजा 2022 में ही पूरी हो गई थी।
- सेंट्रल जेल प्रशासन ने सत्यापन, दस्तावेज और अन्य औपचारिकताओं में सहयोग किया।
FAQ Section:
सवाल: अमृतसर से कितने पाकिस्तानी कैदियों को वापस भेजा गया?
जवाब: जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण की मदद से पांच पाकिस्तानी कैदियों को अटारी-वाघा बॉर्डर के जरिए पाकिस्तान वापस भेजा गया।
सवाल: इन कैदियों के मामले किस कानून से जुड़े थे?
जवाब: इनमें ज्यादातर मामले पासपोर्ट एक्ट और फॉरेनर्स एक्ट के उल्लंघन से संबंधित थे।
सवाल: वकास अली कौन हैं?
जवाब: वकास अली पाकिस्तान के एक बधिर और मूक नागरिक हैं, जो अमृतसर की सेंट्रल जेल में बंद थे। उनकी सजा वर्ष 2022 में पूरी हो चुकी थी।
सवाल: कैदियों की वापसी में किसने सहयोग किया?
जवाब: DLSA अमृतसर, सेंट्रल जेल अमृतसर के अधीक्षक और संबंधित जेल अधिकारियों ने सत्यापन, दस्तावेजीकरण, संवाद और अन्य औपचारिकताएं पूरी करने में सहयोग किया।
Conclusion:
अमृतसर DLSA की पहल सजा पूरी कर चुके विदेशी कैदियों के मानवीय और कानूनी अधिकारों से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण कदम है। पांच पाकिस्तानी नागरिकों की स्वदेश वापसी से यह भी स्पष्ट होता है कि ऐसी प्रक्रियाओं में कानूनी औपचारिकताओं के साथ विभिन्न प्रशासनिक एजेंसियों के बीच प्रभावी समन्वय कितना जरूरी है।
