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डीसी कार्यालय के बाहर आशा वर्करों का प्रदर्शन, लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ रोष
न्यूनतम वेतन कानून लागू करने और ₹24,000 मासिक मानदेय की मांग; सेवानिवृत्ति पर ₹5 लाख और पेंशन देने की भी उठी आवाज
आशा वर्कर्स यूनियन के सदस्यों ने सोमवार को डिप्टी कमिश्नर कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने लंबे समय से लंबित मांगों को पूरा करने की मांग करते हुए न्यूनतम वेतन, भत्तों की बहाली और बेहतर सेवानिवृत्ति सुविधाओं की मांग की।
Accredited Social Health Activists (ASHA) Workers’ Union के सदस्यों ने सोमवार को अपनी लंबित मांगों को लेकर डिप्टी कमिश्नर कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया।
यूनियन नेताओं ने कहा कि जिन आशा वर्करों को सेवा करते हुए 10 वर्ष से अधिक समय हो चुका है, उन्हें न्यूनतम वेतन कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए।
उन्होंने मांग की कि आशा वर्करों को हर महीने ₹24,000 का निश्चित मानदेय दिया जाए।
प्रदर्शनकारियों ने निलंबित भत्तों की बहाली और उन्हें बढ़ाने की भी मांग की। साथ ही यात्रा भत्ता बढ़ाकर ₹500 करने और शहरी क्षेत्रों में भी आशा वर्करों की भर्ती करने की मांग उठाई।
प्रदर्शन के दौरान आशा वर्करों ने सेवानिवृत्ति से जुड़े मुद्दे भी उठाए। उन्होंने मांग की कि सेवानिवृत्ति के समय ₹5 लाख की एकमुश्त राशि दी जाए।
इसके अलावा उन्होंने हरियाणा की तर्ज पर आधी तनख्वाह के बराबर पेंशन देने की भी मांग की।
