पराली जलाने की घटनाओं में बड़ी गिरावट, पंजाब के जिले में अब तक सिर्फ 23 मामले; इंडस्ट्री में हो रहा धान के भूसे का इस्तेमाल

डिप्टी कमिश्नर दीक्षिखा शर्मा के मुताबिक, 2026 में 5.07 लाख मीट्रिक टन पराली के वैज्ञानिक प्रबंधन का लक्ष्य; बेलर मशीनों, बायोमास प्लांट और ईंट भट्ठों की मदद से किसानों को मिल रहा विकल्प

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पंजाब के एक जिले में पराली जलाने की घटनाओं में इस साल उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। प्रशासन के अनुसार, अब तक 23 मामले सामने आए हैं, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह संख्या 50 से अधिक थी। पराली को ईंधन के रूप में इस्तेमाल करने, आधुनिक मशीनों और फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने से प्रबंधन अभियान को गति मिली है।

पंजाब में पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए प्रशासन की ओर से किए जा रहे प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। एक जिले में इस साल अब तक पराली जलाने के 23 मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 50 से अधिक मामले सामने आए थे। वर्ष 2024 में इसी अभियान से संबंधित आंकड़ा 110 मामलों का था।

जिला प्रशासन के अनुसार, धान के भूसे को इकट्ठा करके पेलेट प्लांट, ईंट भट्ठों और अन्य औद्योगिक इकाइयों तक पहुंचाने की व्यवस्था से किसानों को पराली के निपटारे का वैकल्पिक रास्ता मिल रहा है। इसके साथ ही किसानों को पारंपरिक धान की खेती के बजाय दूसरी फसलों को अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

2026 में पराली प्रबंधन का लक्ष्य बढ़ाकर 5.07 लाख मीट्रिक टन किया

डिप्टी कमिश्नर दीक्षिखा शर्मा ने बताया कि वर्ष 2026 के लिए जिले में खेतों से बाहर पराली के प्रबंधन यानी एक्स-सीटू मैनेजमेंट की योजना तैयार की गई है। इसके तहत 84,000 हेक्टेयर क्षेत्र में 5.07 लाख मीट्रिक टन धान के भूसे के प्रबंधन का लक्ष्य रखा गया है।

इसकी तुलना में वर्ष 2025 में 42,000 हेक्टेयर क्षेत्र से 2.70 लाख मीट्रिक टन पराली के प्रबंधन का लक्ष्य था। इस तरह प्रस्तावित मात्रा में लगभग 88 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

प्रशासन के अनुमान के मुताबिक, इस सीजन में जिले में करीब 11 लाख मीट्रिक टन धान का भूसा पैदा होने की संभावना है। पिछले सप्ताह तक बेलर मशीनों की मदद से 22,320 हेक्टेयर क्षेत्र में पराली प्रबंधन किया जा चुका था।

पराली के प्रबंधन के लिए बढ़ाई गई मशीनों की संख्या

प्रशासन ने फसल अवशेष प्रबंधन के लिए आधुनिक कृषि मशीनरी की उपलब्धता भी बढ़ाई है। जिले में अब 136 बेलर मशीनें उपलब्ध हैं, जिनमें इस सीजन में जोड़ी गई 41 नई मशीनें भी शामिल हैं।

इसके अलावा, पराली को इकट्ठा करने के लिए 107 स्ट्रॉ रेक मशीनें उपलब्ध हैं। इनमें 29 मशीनें हाल ही में खरीदी गई हैं।

इन मशीनों की मदद से खेतों में बचे धान के अवशेषों को इकट्ठा करना, गांठों में बांधना, परिवहन करना और सुरक्षित स्थान पर जमा करना आसान होता है। इससे किसानों को खेतों की अगली फसल के लिए तैयारी करने में मदद मिलती है और पराली जलाने की जरूरत कम हो सकती है।

पेलेट प्लांट और ईंट भट्ठे बन रहे पराली के खरीदार

जिला प्रशासन पराली के लिए औद्योगिक बाजार तैयार करने पर भी ध्यान दे रहा है। डिप्टी कमिश्नर के अनुसार, पेलेट और बायोमास इकाइयां खेतों से एकत्र किए गए धान के भूसे को खरीदकर उसका उपयोग ईंधन बनाने में कर रही हैं।

इस प्रक्रिया में पराली से पेलेट या बायोमास ईंधन तैयार किया जाता है, जिसका इस्तेमाल औद्योगिक बॉयलर और ईंट भट्ठों में किया जा सकता है। इससे कृषि अवशेष को बेकार समझने के बजाय उपयोगी संसाधन में बदलने का अवसर मिलता है।

जिले में 63 ईंट भट्ठे चालू हैं और बायोमास ईंधन की खरीद के लिए 20 खरीद आदेशों की जानकारी दी गई है। SAEL उद्योग ने भी तीन लाख मीट्रिक टन पराली के प्रबंधन की जानकारी दी है।

हालांकि, इन आंकड़ों से अलग-अलग इकाइयों के वास्तविक उपयोग और पूरे जिले में प्रबंधन की कुल स्थिति का आकलन करने के लिए विस्तृत आधिकारिक आंकड़े जरूरी होंगे।

फसल विविधीकरण को बढ़ावा दे रहा प्रशासन

पराली प्रबंधन के साथ-साथ जिला प्रशासन किसानों को फसल विविधीकरण अपनाने के लिए भी प्रेरित कर रहा है। इसके लिए कृषि और बागवानी विभागों के माध्यम से किसानों को दूसरी फसलों की खेती के विकल्पों से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।

मिर्च की खेती और बाजार से जुड़ाव पर जोर

प्रशासन किसान उत्पादक संगठनों यानी FPOs को निर्यातकों से जोड़ने पर काम कर रहा है, ताकि मिर्च की खेती को अधिक बाजारोन्मुख बनाया जा सके।

इस पहल के तहत बीज की योजना, खेतों में तकनीकी मार्गदर्शन, उत्पादन संबंधी सहायता और फसल की संगठित ढंग से आपूर्ति पर जोर दिया जा रहा है।

इसका उद्देश्य किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना और खेती में विविधता लाने के लिए प्रोत्साहित करना है। प्रशासन को उम्मीद है कि फसल विविधीकरण और पराली के वैकल्पिक इस्तेमाल से कृषि अवशेष जलाने की समस्या को कम करने में मदद मिलेगी।

पराली जलाने पर रोक के लिए क्या है आगे की रणनीति?

जिले में पराली प्रबंधन के लिए मशीनरी, औद्योगिक खरीदारों और फसल विविधीकरण को एक साथ जोड़ने की कोशिश की जा रही है। किसानों के खेतों से अवशेष इकट्ठा करने के बाद उन्हें औद्योगिक इकाइयों तक पहुंचाने की व्यवस्था इस योजना का अहम हिस्सा है।

यदि पराली की खरीद, परिवहन और भंडारण की व्यवस्था प्रभावी बनी रहती है, तो किसानों को फसल अवशेषों के निपटारे के लिए व्यावहारिक विकल्प मिल सकते हैं। साथ ही, आधुनिक मशीनों की उपलब्धता बढ़ने से बड़े क्षेत्र में पराली प्रबंधन करना आसान हो सकता है।

Key Highlights

  • इस साल अब तक पराली जलाने के 23 मामले सामने आए हैं।

  • पिछले साल इसी अवधि में 50 से अधिक और वर्ष 2024 में 110 मामले दर्ज किए गए थे।

  • वर्ष 2026 में 84,000 हेक्टेयर क्षेत्र से 5.07 लाख मीट्रिक टन पराली के प्रबंधन का लक्ष्य है।

  • वर्ष 2025 में लक्ष्य 42,000 हेक्टेयर और 2.70 लाख मीट्रिक टन था।

  • जिले में 136 बेलर और 107 स्ट्रॉ रेक मशीनें उपलब्ध हैं।

  • जिले में 63 चालू ईंट भट्ठे और बायोमास ईंधन के 20 खरीद आदेशों की जानकारी दी गई है।

  • SAEL उद्योग ने तीन लाख मीट्रिक टन पराली के प्रबंधन की जानकारी दी है।

  • किसानों को मिर्च की खेती और निर्यातकों से जुड़ाव के माध्यम से फसल विविधीकरण के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

FAQ Section

1. इस साल पराली जलाने के कितने मामले सामने आए हैं?

जिला प्रशासन के अनुसार, इस साल अब तक पराली जलाने के 23 मामले सामने आए हैं। पिछले साल इसी अवधि में 50 से अधिक मामले दर्ज किए गए थे।

2. पंजाब के इस जिले में 2026 के लिए पराली प्रबंधन का लक्ष्य क्या है?

प्रशासन ने 84,000 हेक्टेयर क्षेत्र में 5.07 लाख मीट्रिक टन धान के भूसे के प्रबंधन का लक्ष्य रखा है।

3. पराली का इस्तेमाल किन कामों में किया जा रहा है?

एकत्र की गई पराली का इस्तेमाल पेलेट और बायोमास ईंधन तैयार करने में किया जा रहा है। इस ईंधन का उपयोग औद्योगिक बॉयलर और ईंट भट्ठों में किया जा सकता है।

4. पराली प्रबंधन में बेलर मशीनों की क्या भूमिका है?

बेलर मशीनें खेतों में फैले फसल अवशेषों को इकट्ठा करके दबाव से गांठों में बदलती हैं। इससे पराली को उठाने, परिवहन करने और भंडारण में आसानी होती है।

5. फसल विविधीकरण से किसानों को कैसे मदद मिल सकती है?

फसल विविधीकरण के तहत किसान धान के अलावा मिर्च जैसी दूसरी फसलों की खेती के विकल्प तलाश सकते हैं। बाजार, बीज और तकनीकी मार्गदर्शन से जुड़ाव किसानों को उत्पादन और बिक्री की योजना बनाने में मदद कर सकता है।

Conclusion

पंजाब के इस जिले में पराली जलाने की घटनाओं में आई कमी के साथ पराली के औद्योगिक इस्तेमाल और आधुनिक मशीनरी पर आधारित प्रबंधन योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। वर्ष 2026 के लिए निर्धारित लक्ष्य पिछले साल की तुलना में काफी बड़ा है। हालांकि, अभियान की दीर्घकालिक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि किसानों को समय पर मशीनें, पराली के खरीदार, परिवहन सुविधाएं और फसल विविधीकरण के व्यावहारिक विकल्प कितनी प्रभावी ढंग से उपलब्ध कराए जाते हैं।


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Edited By: Atul Sharma

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