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केंद्र की नीतियों के खिलाफ श्रमिकों और किसानों का बड़ा प्रदर्शन, भंडारी पुल पर विशाल रैली
केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर हड़ताल, कई सेवाएं रहीं प्रभावित
केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर गुरुवार को यहां श्रमिकों और किसानों ने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया। भंडारी पुल पर आयोजित विशाल रैली में केंद्र सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना की गई। हड़ताल के चलते बैंक, बिजली, परिवहन, दूरसंचार और बीमा सहित कई सेवाएं प्रभावित रहीं।
केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर गुरुवार को श्रमिकों और किसानों ने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने भंडारी पुल पर एक विशाल रैली आयोजित कर केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की।
इस हड़ताल में केंद्र और राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के कर्मचारी शामिल हुए। हड़ताल के कारण कारखानों, बैंकों, बिजली विभाग, रोडवेज, दूरसंचार, डाक और बीमा सेवाएं प्रभावित रहीं। इसके अलावा आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता, मिड-डे मील कर्मचारी, ऑटो चालक और निजी परिवहन कर्मियों ने भी आंदोलन को समर्थन दिया।
किसान संगठनों की व्यापक भागीदारी
संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले भारतीय किसान यूनियन (एकता उग्राहां), जम्हूरी किसान सभा, कुल हिंद किसान सभा, कीर्ति किसान यूनियन सहित कई किसान संगठनों और खेत मजदूर यूनियनों ने रैली में भाग लिया।
रैली को संबोधित करते हुए विभिन्न संगठनों के नेताओं ने केंद्र सरकार की नीतियों को श्रमिक और किसान विरोधी बताया। वक्ताओं ने चार श्रम संहिताओं (लेबर कोड्स) को तुरंत रद्द करने की मांग की।
प्रमुख मांगें
प्रदर्शनकारियों की अन्य प्रमुख मांगों में शामिल हैं—
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विद्युत (संशोधन) विधेयक 2025 और अन्य कथित श्रमिक विरोधी नीतियों को वापस लेना
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न्यूनतम वेतन 26,000 रुपये प्रति माह तय करना
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पुरानी पेंशन योजना की बहाली
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ठेका, संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित करना
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सरकारी विभागों में नियमित भर्ती सुनिश्चित करना
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आंगनवाड़ी, आशा और मिड-डे मील कर्मचारियों को नियमित करना
इसके अलावा यूनियनों ने बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत विदेशी निवेश का विरोध किया और श्रमिक कल्याण योजनाओं को बहाल करने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने घरेलू कामगारों के लिए कल्याण बोर्ड गठित करने और गिग वर्कर्स की मांगों को स्वीकार करने की भी मांग उठाई।
सरकार पर तीखा हमला
ट्रेड यूनियन नेता अमरजीत सिंह असल ने कहा कि आंदोलन को मिला व्यापक समर्थन यह दर्शाता है कि लोग केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ खड़े हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार “कॉरपोरेट घरानों की एजेंट” की तरह काम कर रही है और मेहनतकश वर्ग की जायज मांगों की अनदेखी कर रही है।
तरनतारन में पुतला दहन
इसी क्रम में तरनतारन में भी केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की हड़ताल को जबरदस्त समर्थन मिला। किसानों, मजदूरों, कर्मचारियों, पेंशनभोगियों, आशा, मिड-डे मील और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया।
स्थानीय गांधी म्यूनिसिपल पार्क में आयोजित रैली को विभिन्न संगठनों के नेताओं ने संबोधित किया और केंद्र सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना की। इसके बाद केंद्र सरकार का पुतला भी फूंका गया।
