संयुक्त ट्रेड यूनियनों की एकदिवसीय हड़ताल से शहर की रफ्तार थमी, बैंक से लेकर स्कूल तक प्रभावित

श्रम कानून संशोधनों और भारत–अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में कर्मचारियों का प्रदर्शन

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केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच से जुड़े कर्मचारियों और श्रमिकों ने गुरुवार को एकदिवसीय हड़ताल की, जिससे शहर में जनजीवन प्रभावित हुआ। बैंकिंग सेवाओं से लेकर सरकारी प्राथमिक स्कूलों तक असर देखा गया। मिड-डे मील कर्मियों, पीएसपीसीएल, पीआरटीसी और पनबस के संविदा कर्मचारियों ने भी विरोध में भाग लिया।

केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच के आह्वान पर गुरुवार को कर्मचारियों और श्रमिकों ने एकदिवसीय हड़ताल की, जिससे शहर में सामान्य जनजीवन प्रभावित रहा। यह हड़ताल श्रम कानूनों में संशोधन और हाल ही में घोषित भारत–अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में की गई।

स्कूलों में मिड-डे मील व्यवस्था प्रभावित

हड़ताल का असर सरकारी प्राथमिक स्कूलों में साफ नजर आया, जहां मिड-डे मील कर्मियों के काम पर न आने से शिक्षकों को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।
सरकारी प्राथमिक स्कूल, खन्ना की प्रभारी अंजू सूद ने बताया,

“गुरुवार को कढ़ी-चावल का मिड-डे मील था। हमें कुछ निजी लोगों से भोजन बनवाने में मदद लेनी पड़ी। शिक्षक भी भोजन तैयार कराने और अस्थायी कर्मियों की निगरानी में जुटे रहे। इस सबके बीच पढ़ाई प्रभावित हुई।”

कई स्कूलों में शिक्षकों ने स्वयं आगे बढ़कर विद्यार्थियों के लिए भोजन तैयार कराने में सहयोग किया। वहीं, जीएसएसएस, सेमेट्री स्कूल में मिड-डे मील कर्मियों ने पहले भोजन तैयार किया और उसके बाद हड़ताल में शामिल हो गए।

बैंकिंग सेवाओं पर भी असर

हड़ताल के चलते बैंकिंग सेवाएं भी प्रभावित रहीं। कर्मचारियों के विरोध में शामिल होने से चेक जमा, क्लियरेंस और आरटीजीएस जैसी नियमित सेवाएं काफी हद तक बाधित रहीं।

इस अवसर पर पंजाब बैंक कर्मचारी महासंघ (पीबीईएफ), लुधियाना द्वारा भारत नगर चौक स्थित केनरा बैंक शाखा के सामने एक विशाल रैली आयोजित की गई।

श्रम संहिताओं को बताया श्रमिक अधिकारों पर हमला

पीबीईएफ के महासचिव कामरेड पी.आर. मेहता ने कहा कि नई श्रम संहिताएं मेहनतकश वर्ग के वर्षों में हासिल किए गए अधिकारों पर सीधा हमला हैं।
उन्होंने कहा कि ये संहिताएं मौजूदा श्रम कानूनों को कमजोर करती हैं, सामूहिक सौदेबाजी को सीमित करती हैं, हड़ताल के अधिकार पर अंकुश लगाती हैं और संविदा भर्ती तथा आसान हायर-एंड-फायर नीति को बढ़ावा देकर रोजगार को असुरक्षित बनाती हैं।

उन्होंने कहा कि इन संहिताओं के लागू होने से यूनियन बनाना, उसका संचालन करना, स्थायी नेतृत्व विकसित करना और संघर्ष करना बेहद कठिन हो जाएगा।

पीबीईएफ के सचिव कामरेड नरेश गौर ने कहा कि श्रम संहिताएं बड़े कॉरपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने के लिए बनाई गई हैं, जबकि इससे श्रमिकों के कल्याण और सामाजिक सुरक्षा को नुकसान होगा। उन्होंने सरकार से इन संहिताओं को वापस लेने और ट्रेड यूनियनों के साथ सार्थक संवाद शुरू करने की मांग की।

परिवहन सेवाएं प्रभावित, निजी ऑपरेटरों को मिला लाभ

इस बीच पनबस और पीआरटीसी के संविदा कर्मचारी भी गुरुवार को हड़ताल पर रहे। सरकारी बसों के न चलने से यात्रियों को निजी बसों का सहारा लेना पड़ा।

स्मॉल स्केल मिनी बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन के महासचिव जे.एस. ग्रेवाल ने कहा कि पनबस और पीआरटीसी के संविदा ड्राइवरों और कंडक्टरों की हड़ताल के कारण निजी बस ऑपरेटरों को लाभ मिला और यात्रियों ने बड़ी संख्या में निजी बसों से सफर किया।

कुल मिलाकर, हड़ताल के कारण शहर में कई जरूरी सेवाएं प्रभावित रहीं, हालांकि स्थिति शांतिपूर्ण बनी रही।Screenshot_1145

Edited By: Karan Singh

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