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2026 तक अंबाला को पूर्ण साक्षर बनाने का लक्ष्य, 15 हजार से अधिक वयस्क हुए साक्षर
ULLAS कार्यक्रम के तहत गैर-साक्षर युवाओं और वयस्कों को पढ़ाने के लिए छात्रों और शिक्षकों की मुहिम तेज
हरियाणा के अंबाला जिले में शिक्षा विभाग ने 2026 के अंत तक पूर्ण साक्षरता हासिल करने का लक्ष्य रखा है। Understanding of Lifelong Learning for All in Society (ULLAS) – नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत अब तक 21,740 गैर-साक्षर लोगों की पहचान कर पंजीकरण किया गया, जिनमें से 15,686 परीक्षा उत्तीर्ण कर साक्षर बन चुके हैं।
अंबाला जिला शिक्षा विभाग ने 15 वर्ष से अधिक आयु के गैर-साक्षर युवाओं और वयस्कों को बुनियादी साक्षरता और गणनात्मक ज्ञान (न्यूमेरसी) प्रदान करने के उद्देश्य से विशेष अभियान तेज कर दिया है। विभाग का लक्ष्य है कि वर्ष 2026 के अंत तक जिले से निरक्षरता पूरी तरह समाप्त कर दी जाए।
जिला शिक्षा अधिकारी सुधीर कालरा ने बताया,
“ULLAS केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित योजना है, जिसे 2022 में शुरू किया गया। 2011 की जनगणना के आधार पर अंबाला में लगभग 31,000 गैर-साक्षर लोगों का अनुमान था। विभागीय सर्वे में 21,740 ऐसे व्यक्तियों की पहचान कर उन्हें ULLAS पोर्टल पर पंजीकृत किया गया।”
FLNAT परीक्षा के माध्यम से मूल्यांकन
कार्यक्रम के तहत शिक्षार्थियों को Foundational Literacy and Numeracy Assessment Test (FLNAT) के लिए तैयार किया जाता है, जो वर्ष में दो बार (मार्च और सितंबर) आयोजित होती है।
परीक्षा में तीन विषय — पढ़ना, लिखना और गणित — प्रत्येक 50 अंकों के होते हैं। परीक्षा उत्तीर्ण करने वालों को कक्षा 3 के समकक्ष प्रमाण-पत्र प्रदान किया जाता है।
अब तक पंजीकृत 21,740 लोगों में से 16,548 परीक्षा में शामिल हो चुके हैं, जिनमें से 15,686 सफल रहे हैं।
स्वयंसेवी शिक्षक बना रहे बदलाव की मिसाल
गैर-साक्षर व्यक्तियों को शिक्षित करने के लिए स्वयंसेवी शिक्षक (VT) नियुक्त किए जाते हैं। यह कोई भी हो सकता है — शिक्षक, छात्र, रिश्तेदार, ग्राम पंचायत सदस्य, मिड-डे मील कार्यकर्ता या अन्य सामाजिक कार्यकर्ता।
छात्रों को भी स्वयंसेवी शिक्षक बनने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। कई मामलों में छात्र अपने दादा-दादी या गांव के बुजुर्गों को पढ़ा रहे हैं।
सुधीर कालरा ने कहा,
“बच्चों को अपने बड़ों को शिक्षा का उपहार देने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इससे न केवल बुजुर्गों में आत्मविश्वास बढ़ता है, बल्कि पारिवारिक संबंध भी मजबूत होते हैं। स्वयंसेवी शिक्षकों को ब्लॉक स्तर पर आयोजित ‘ULLAS सम्मान समारोह’ में सम्मानित किया जा रहा है।”
छात्रों के अनुभव
आधोया के सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के कक्षा 12 के छात्र अनिकेत ने बताया,
“मैं अब तक 12 लोगों को पढ़ा चुका हूं और सभी परीक्षा पास कर चुके हैं। ज्यादातर 40 से 65 वर्ष आयु वर्ग के थे। मुझे सम्मान मिला, जिससे और लोगों को पढ़ाने की प्रेरणा मिली।”
वहीं, बलाना के सरकारी स्कूल की पूर्व छात्रा कोमल, जो सरकारी नौकरी की तैयारी कर रही हैं, ने कहा,
“मैंने करीब छह लोगों को पढ़ाया और सभी सफल रहे। शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देकर अच्छा लगता है। थोड़े प्रयास से वे परीक्षा पास कर सके।”
साक्षर बनने का आत्मविश्वास
बेबीआल गांव की 55 वर्षीय संतोष ने कहा,
“मैं कभी स्कूल नहीं गई थी। मेरे बेटे ने मुझे पंजीकरण कराने के लिए प्रेरित किया। शिक्षकों की मदद से मैंने परीक्षा पास कर ली। अब मैं अपनी भाभी को भी साक्षर बनने के लिए प्रेरित करूंगी।”
आगे की रणनीति
जिले में अभी लगभग 5,200 पंजीकृत व्यक्ति ऐसे हैं, जिन्होंने परीक्षा नहीं दी या उत्तीर्ण नहीं हो सके हैं। शिक्षा विभाग ने प्राचार्यों, शिक्षकों और छात्रों को सर्वे तेज करने और हर गैर-साक्षर व्यक्ति तक पहुंचने के निर्देश दिए हैं।
अंबाला में चल रहा यह अभियान न केवल साक्षरता बढ़ा रहा है, बल्कि पीढ़ियों के बीच शिक्षा के माध्यम से मजबूत संबंध भी बना रहा है।
