केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के ‘भारत बंद’ का करनाल में सीमित असर, दफ्तर और परिवहन सामान्य

कर्मचारियों व किसानों ने फाउंटेन पार्क से निकाला विरोध मार्च, मांगों को लेकर नारेबाजी

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केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर सर्व कर्मचारी संघ (एसकेएस), सीटू, बैंक यूनियनों, सेवानिवृत्त कर्मचारी संघों और संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले गुरुवार को ‘भारत बंद’ मनाया गया, लेकिन करनाल जिले में इसका दृश्य प्रभाव सीमित रहा।

केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर गुरुवार को करनाल में ‘भारत बंद’ का आयोजन किया गया। हालांकि जिले में कार्यालयों का कामकाज सामान्य रूप से चलता रहा और बड़ी संख्या में कर्मचारी अपने-अपने दफ्तरों में उपस्थित दिखे।

सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था भी अप्रभावित रही। स्थानीय बस अड्डों से बसें नियमित रूप से चलती रहीं। एहतियात के तौर पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुबह से ही बस अड्डे पर पुलिस टीमें तैनात रहीं।

मांगें और मुद्दे

कर्मचारियों और किसानों ने हड़ताल के जरिए चार श्रम संहिताओं को वापस लेने, सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण पर रोक लगाने, सभी संविदा व योजना आधारित कर्मचारियों के नियमितीकरण, पुरानी पेंशन योजना की बहाली, भारत–अमेरिका कृषि व्यापार समझौते को रद्द करने और बिजली विधेयक 2025 को वापस लेने की मांग उठाई।

इसके अलावा 30,000 रुपये मासिक न्यूनतम वेतन, रिक्त पदों को स्थायी भर्ती से भरने की मांग भी की गई। किसानों ने सभी फसलों पर एमएसपी की कानूनी गारंटी और कृषि ऋण माफी की मांग रखी।

विरोध मार्च और नारेबाजी

सीमित असर के बावजूद बड़ी संख्या में कर्मचारी, सेवानिवृत्त कर्मी, श्रमिक और किसान फाउंटेन पार्क में एकत्र हुए और बाद में विरोध मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की।

कुल मिलाकर, करनाल में ‘भारत बंद’ का प्रशासनिक और परिवहन व्यवस्था पर प्रभाव सीमित रहा, जबकि विरोध प्रदर्शनों के जरिए मांगों को मुखर किया गया।Screenshot_1153

Edited By: Karan Singh

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