श्रम संहिताओं के विरोध में पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में ट्रेड यूनियनों का प्रदर्शन

केंद्र की नीतियों को बताया ‘कॉरपोरेट समर्थक’, सेक्टर-17 चंडीगढ़ से लेकर लुधियाना तक नारेबाजी

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केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच से जुड़े कर्मचारियों और मजदूरों ने गुरुवार को पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में केंद्र सरकार की श्रम सुधारों और आर्थिक नीतियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए। प्रमुख मांगों में चार श्रम संहिताओं को रद्द करना और विवादित विधेयकों की वापसी शामिल रही।

केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच से जुड़े कर्मचारियों और मजदूरों ने गुरुवार को पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में केंद्र सरकार की श्रम सुधार नीतियों के विरोध में प्रदर्शन किए। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र की नीतियों को ‘कॉरपोरेट समर्थक’ करार देते हुए सरकार के खिलाफ नारे लगाए।

चंडीगढ़ और पंजाब में प्रदर्शन

चंडीगढ़ के सेक्टर-17 में आयोजित प्रदर्शन के दौरान यूनियन प्रतिनिधियों ने तख्तियां उठाईं, जिन पर “हमने श्रम संहिताओं को खारिज किया” और “श्रम विरोधी संहिताओं का विरोध” जैसे नारे लिखे थे।

लुधियाना में पंजाब बैंक कर्मचारी महासंघ (पीबीईएफ) ने भारत नगर चौक पर एक विशाल रैली आयोजित की।
पीबीईएफ के महासचिव पी.आर. मेहता ने आरोप लगाया कि नई श्रम संहिताएं हड़ताल के अधिकार को सीमित करती हैं और संविदा रोजगार को बढ़ावा देकर नौकरी को असुरक्षित बनाती हैं।

हरियाणा में मिला-जुला असर

हरियाणा के सोनीपत, रोहतक और हिसार सहित कई स्थानों पर भी प्रदर्शन हुए, हालांकि अधिकतर जगहों पर बैंक और रोडवेज बस सेवाएं सामान्य रहीं।

सोनीपत में ऑल इंडिया स्टेट गवर्नमेंट एम्प्लॉइज फेडरेशन के अध्यक्ष सुभाष लांबा ने बस अड्डा परिसर में हुए प्रदर्शन को “अच्छी प्रतिक्रिया” वाला बताया।
उन्होंने कहा कि मानेसर, गुरुग्राम, फरीदाबाद, बावल और धारूहेड़ा के औद्योगिक क्षेत्रों में भी कई मजदूर हड़ताल में शामिल हुए। आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने भी प्रदर्शन में भाग लिया।

सरकारी विभागों पर असर

लांबा के अनुसार, हड़ताल का असर शहरी स्थानीय निकाय, बिजली, पर्यटन, सिंचाई, स्वास्थ्य और राजस्व विभागों में भी देखा गया।
राज्य रोडवेज कर्मचारियों ने विभिन्न बस डिपो पर सुबह 10 से दोपहर 12 बजे तक दो घंटे का विरोध प्रदर्शन किया।

देशभर में विरोध

यह प्रदर्शन पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, केरल और तमिलनाडु सहित देश के कई हिस्सों में भी देखे गए।

प्रमुख मांगें

ट्रेड यूनियनों की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं—

  • चार श्रम संहिताओं को रद्द किया जाए

  • ड्राफ्ट बीज विधेयक और बिजली संशोधन विधेयक वापस लिए जाएं

  • शांति (SHANTI) अधिनियम को निरस्त किया जाए

  • मनरेगा को बहाल किया जाए

  • विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 को रद्द किया जाए

चार श्रम संहिताओं में वेतन संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियां संहिता 2020 शामिल हैं।

ट्रेड यूनियनों की चेतावनी

पीबीईएफ के सचिव नरेश गौर ने कहा कि ये संहिताएं श्रमिक कल्याण और सामाजिक सुरक्षा की कीमत पर बड़े कॉरपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने के लिए बनाई गई हैं।

वहीं ट्रेड यूनियन नेता डॉ. राजिंदर पाल सिंह औलख ने कहा कि इन नीतियों से बड़ी संख्या में मजदूर श्रम कानूनों के दायरे से बाहर हो जाएंगे, जिससे उनका शोषण और बढ़ेगा।

प्रदर्शन स्थलों पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात रहा। यूनियनों ने चेतावनी दी कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।Screenshot_1155

Edited By: Karan Singh

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