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नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने पंजाब अनुसूचित जाति आयोग के नोटिस को हाईकोर्ट में दी चुनौती
नोटिस को बताया असंवैधानिक और पक्षपातपूर्ण, आयोग पर सत्ताधारी मंत्री के पक्ष में झुकाव का आरोप
पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग द्वारा 9 फरवरी को जारी नोटिस को चुनौती दी है। उन्होंने नोटिस को अवैध, मनमाना और संविधान के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया है।
पंजाब के नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाते हुए पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष, पंजाब सरकार और अन्य प्रतिवादियों के खिलाफ याचिका दायर की है। यह याचिका आयोग द्वारा 9 फरवरी को पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग अधिनियम के तहत जारी नोटिस को चुनौती देती है।
याचिका में बाजवा ने कहा है कि विवादित नोटिस अवैध, मनमाना, असंवैधानिक है और यह संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 का उल्लंघन करता है। उन्होंने दलील दी कि उनके नाम से जो कथन जोड़ा गया है, उसमें प्रथम दृष्टया कोई भी जाति-संबंधी आशय नहीं झलकता।
जातिगत संदर्भ से इनकार
बाजवा ने अपनी याचिका में स्पष्ट किया है कि जिस कथन को आधार बनाकर नोटिस जारी किया गया, उसका किसी भी अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति समुदाय से कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध नहीं है। उनके अनुसार, उक्त कथन को जातिगत रंग देना तथ्यों और कानून दोनों के विपरीत है।
आयोग पर पक्षपात का आरोप
नेता प्रतिपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि आयोग ने उक्त कथन की व्याख्या हरभजन सिंह ईटीओ—जो आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और कैबिनेट मंत्री हैं—के पक्ष में की, जिससे आयोग का पक्षपातपूर्ण रवैया और पूर्वाग्रहपूर्ण आचरण स्पष्ट होता है।
बाजवा ने अदालत से आग्रह किया है कि आयोग के नोटिस को रद्द किया जाए और यह घोषित किया जाए कि इस तरह की कार्रवाई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और न्यायसंगत प्रक्रिया के सिद्धांतों के खिलाफ है।
मामले की सुनवाई आगामी दिनों में होने की संभावना है, जिस पर राजनीतिक और कानूनी हलकों की नजरें टिकी हुई हैं।
